जयपुर राजस्थान में "TOP PRIORITY" पर गर्भवती महिलाएं, सीएम भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सीएस ने हेल्थ में संभाला "मोर्चा", देखिए खास रिपोर्ट
जयपुरः प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर सवालों के घेरे में आए चिकित्सा विभाग में अब गर्भवती महिलाएं "टॉप प्रायोरिटी" पर आ गई है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर खुद सूबे के सीएस वी श्रीनिवास ने…

सौजन्य से:- First India News
जयपुरः प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामलों को लेकर सवालों के घेरे में आए चिकित्सा विभाग में अब गर्भवती महिलाएं "टॉप प्रायोरिटी" पर आ गई है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर खुद सूबे के सीएस वी श्रीनिवास ने हेल्थ सेक्टर में "मोर्चा" संभाला है. वे पिछले चार दिनों से लगातार प्रदेशभर में मातृ-शिशु सेवाओं की मॉनिटरिंग कर रहे है, साथ ही "हाई रिस्क" श्रेणी समेत सभी गर्भवती महिलाओं को बेहतर से बेहतर ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने के लिए "प्रसव सखी" जैसे नवाचार पर फोकस शुरू किया गया है.
आधा दर्जन से अधिक जिलों में 20 से अधिक प्रसूताओं की मौत के बाद राजस्थान देशभर में चर्चाओं में हैं. हालांकि, पहले दिन से भी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और सख्त एक्शन लेने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी पुख्ता किया जा रहा है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने चिकित्सा विभाग की कमान संभाले हुए रोजाना मॉनिटरिंग शुरू कर दी है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी देख जा रहे है. फिर चाहे मेडिकल कॉलेज से अटैच अस्पताल हो या ब्लॉक स्तर के चिकित्सा केन्द्र, खुद मुख्य सचिव रोजाना स्वास्थ्य भवन से वीसी के जरिए फील्ड अधिकारियों से रूबरू हो रहे है. इस दौरान हर गर्भवती महिला की वन-टू-वन ट्रेकिंग और हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं(HSP) के साथ स्वास्थ्य कार्मिक अटैच करने के नवाचार शुरू किए गए. प्रकरण में सरकार की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक-एक HSP के लिए आशा, एएनएम, MO, वाहन चालक को जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के लिए डेडिकेटेड हेल्प डेस्क और "प्रसव सखी" की तैनातगी जैसे कदम भी उठाए जा रहे है.
"प्रसव सखी" की ये रहेगी जिम्मेदारी
- चरणबद्ध तरीके से सभी अस्पतालों में बनेगी डेडिकेटेड हेल्प डेस्क
- 500 से 1500 मासिक डिलीवरी पर शिफ्ट में चलेगी हेल्प डेस्क
- जबकि इससे अधिक डिलीवरी पर 24X7 तैनात होंगी "प्रसव सखी"
- सिंगल पाइंट सपोर्ट एण्ड कॉडिनेशन की भूमिका में होगी "प्रसव सखी"
- चिकित्सालय में आने पर तत्काल पंजीयन और चिकित्सकीय परामर्श
-HRP महिला के बारे में तत्काल प्रशासन को सूचना देना, विशेषज्ञों से कनेक्ट करवाना
- एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के लिए चिकित्सकीय व्यवस्था करना
- गर्भवती महिला की भर्ती प्रक्रिया और जांच प्रक्रिया में करेगी सहयोग
- अस्पताल में काम के दबाव के हिसाब से तय होगी "प्रसव सखी" की संख्या
इन जिलों में सर्वाधिक HRP,विभाग की विशेष मॉनिटरिंग
- चिकित्सा विभाग ने जुलाई माह में प्रस्तावित डिलीवरी का डेटा किया तैयार
- इसमें 64198 महिलाओं की जुलाई में थी डिलीवरी डेट,जिनमें से 7625 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं चिन्हित
- जिलेवार देखे तो सीकर, जयपुर प्रथम, चूरू, कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा,
जयपुर द्वितीय, उदयपुर और झुंझुनूं में मिली सर्वाधिक हाईरिस्क महिलाएं
- हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की भी केटेगिरी देखे तो सर्वाधिक वे जो 18 साल से कम या फिर 35 साल से अधिक की है
- इसके अलावा एनीमिया और हाईपर टेंशन से पीड़ित महिलाएं भी मिली "हाई रिस्क" श्रेणी में
- इस डेटा के आधार पर ही विभाग ने हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं पर फोकस किया शुरू
- मौजूदा स्थिति को देखते हुए निर्धारित तिथि से सात दिन पहले ही ऐसी गर्भवती महिला को अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश
जननी एक्सप्रेस की व्यवस्था होगी मजबूत
- जननी एक्सप्रेस में बीपी जांचने की मशीन, पल्स ऑक्सीमीटर, इन्फ्रारेड थर्मामीटर
स्टेथोस्कोप, टॉर्च, ग्लव्स, आईवी कैनुला, आईवी सेट समेत सभी जरूरी उपकरण रखना जरूरी
- गर्भवती महिला को घर से स्वास्थ्य केन्द्र तक तय समय में लाया जाएगा
- इस प्रक्रिया में HRP महिला को दी जाएगी प्राथमिकता, तत्काल मिलेगी सेवा
- जरूरत पड़ने पर उच्च स्तरीय संस्थान तक रैफरल परिवहन के लिए भी किया जाएगा कॉर्डिनेशन
चौथे दिन बैठक के बाद फर्स्ट इंडिया से खास बातचीत में CS ने स्थिति को कंट्रोल में बताया. उन्होंने कहा कि पिछले दिनों में जो प्रकरण सामने आते है, उनकी केस टू केस समीक्षा के बाद कई बदलाव किए गए है. उन्होंने कहा कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है !
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