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राजस्थान में साइबर ठगी का जाल: 2026 में अब तक 387 करोड़ की ठगी, जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

राजस्थान में साइबर ठगी का जाल: 2026 में अब तक 387 करोड़ की ठगी, जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट राजस्थान में 2026 में अब तक साइबर ठग 387 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉ…

Amar Ujala के अनुसार22 जुलाई 2026 को 10:02 am बजे
राजस्थान में साइबर ठगी का जाल: 2026 में अब तक 387 करोड़ की ठगी, जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

सौजन्य से:- Amar Ujala

राजस्थान में साइबर ठगी का जाल: 2026 में अब तक 387 करोड़ की ठगी, जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट

राजस्थान में 2026 में अब तक साइबर ठग 387 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। जयपुर-अलवर-भरतपुर कॉरिडोर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है, जबकि निवेश घोटालों से सबसे अधिक नुकसान हुआ।

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विस्तार

तीन साल में दोगुनी हुई साइबर ठगी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में साइबर ठगी की राशि 2023 में 354 करोड़ रुपये थी, जो 2024 में बढ़कर 795 करोड़ रुपये पहुंच गई। 2025 में यह घटकर 768 करोड़ रुपये रही, जबकि 2026 में 12 जुलाई तक ही 387 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज हो चुकी है। इसी अवधि में शिकायतों की संख्या 2023 के 77,880 से बढ़कर 2025 में 1,27,782 हो गई। एफआईआर भी 237 से बढ़कर 492 तक पहुंच गई हैं।

निवेश के नाम पर सबसे बड़ी ठगी

साल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि इन्वेस्टमेंट फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है। कुल आर्थिक नुकसान का 75 प्रतिशत हिस्सा इसी तरह की ठगी से हुआ, जबकि शिकायतों में इसकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत रही।

इसके अलावा-

डिजिटल अरेस्ट: 8% नुकसान

क्रेडिट कार्ड फ्रॉड: 27% शिकायतें, लेकिन केवल 7% आर्थिक नुकसान

सेक्सटॉर्शन: 18% शिकायतें, 4% नुकसान

राष्ट्रीय साइबर हॉटस्पॉट मैप के अनुसार राजस्थान में जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा और जोधपुर साइबर अपराध के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। दिल्ली-एनसीआर से सटे पूर्वी राजस्थान का यह कॉरिडोर लगातार साइबर अपराधियों की गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। राज्य में वर्ष 2024 में 64,424, 2025 में 60,895 और 2026 के पहले छह महीनों में ही 23,799 साइबर हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए।

रकम बचाने में बढ़ी सफलता

पुलिस के अनुसार साइबर ठगी के बाद खातों में राशि फ्रीज करने की व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी हुई है। 2023 की तुलना में फ्रीज की गई राशि (लियन) में 339 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि पीड़ितों को लौटाई गई रकम लगभग 10 गुना बढ़कर 10 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है।

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साइबर पुलिसिंग का हुआ विस्तार

राजस्थान पुलिस ने 2023 में साइबर क्राइम ब्रांच की स्थापना के बाद राज्यभर में साइबर पुलिसिंग को मजबूत किया है। सभी 41 जिलों में 43 साइबर पुलिस थाने संचालित हैं।

1930 हेल्पलाइन की 53 लाइनें 24 घंटे काम कर रही हैं। 2026 में 5 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामलों में ऑटोमैटिक जीरो ई-एफआईआर प्रणाली लागू की गई, जिसके तहत अब तक 438 एफआईआर स्वत: दर्ज हुई हैं। सायबर शील्ड, वज्र प्रहार, एंटी वायरस और म्यूल हंटर जैसे अभियानों में इस वर्ष 9,744 फर्जी बैंक खाते, वेबसाइट और ऐप बंद कराए गए।

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

राजस्थान ने पिछले तीन वर्षों में साइबर अपराध से निपटने के लिए अपनी व्यवस्था को काफी मजबूत किया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ऑनलाइन धोखाधड़ी पर नियंत्रण के मामले में राज्य देश के सबसे सक्रिय राज्यों में शामिल हो गया है। फरवरी 2023 में पुलिस मुख्यालय में स्थापित राजस्थान साइबर क्राइम ब्रांच अब पुलिस महानिदेशक (DGP), अतिरिक्त डीजी, डीआईजी, एसपी और 196 कर्मियों के साथ कार्य कर रही है।

राज्य में 1930 साइबर हेल्पलाइन की 53 लाइनें चौबीसों घंटे संचालित हैं, जिन्हें बढ़ाकर 60 करने की तैयारी है। इसके अलावा सभी 41 जिलों में 43 समर्पित साइबर पुलिस थाने संचालित हैं, जबकि छह नए थानों की मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।

इस सुदृढ़ व्यवस्था का असर भी दिखाई दिया है। 1930 हेल्पलाइन का कॉल रिस्पॉन्स रेट 2025 के 71.69 प्रतिशत से बढ़कर 2026 के मध्य तक 92.29 प्रतिशत हो गया है। जनवरी 2026 से लागू ऑटोमेटेड जीरो ई-एफआईआर प्रणाली के तहत 5 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी के मामलों में अब तक 438 एफआईआर स्वतः दर्ज की जा चुकी हैं।

इसके अलावा Cyber Shield, Vajra Prahar, Antivirus और Mule Hunter जैसे विशेष अभियानों के तहत वर्ष 2026 में अब तक 9,744 फर्जी बैंक खाते, वेबसाइट और मोबाइल ऐप बंद या निष्क्रिय किए जा चुके हैं।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है-

हालांकि, साइबर विशेषज्ञ मुकेश चौधरी का कहना है कि राजस्थान में साइबर अपराध की वास्तविक स्थिति सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिलने वाली अनेक शिकायतें अभी तक एफआईआर में परिवर्तित नहीं हो पाई हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि साइबर जांच के लिए विभाग में समर्पित साइबर सलाहकार या मुख्य साइबर विशेषज्ञ की कमी है। वर्ष 2022 में साइबर अपराध की रोकथाम और जांच को मजबूत करने के लिए स्वीकृत 50 करोड़ रुपये का बजट भी अब तक खर्च नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कम एफआईआर, कमजोर अनुसंधान और कम दोषसिद्धि दर की बड़ी वजह यह है कि कई जांच अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने, संरक्षित करने और अदालत में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं है, जिससे साइबर अपराधियों के खिलाफ मुकदमे कमजोर पड़ जाते हैं।

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