देहदान कर 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले जयपुर हाईकोर्ट के वकील, 11 हजार किलोमीटर का तय करेंगे सफर
देहदान कर 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले जयपुर हाईकोर्ट के वकील, 11 हजार किलोमीटर का तय करेंगे सफर जयपुर हाईकोर्ट के वकील 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले हैं. यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने अपना द…

सौजन्य से:- ETV Bharat
देहदान कर 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले जयपुर हाईकोर्ट के वकील, 11 हजार किलोमीटर का तय करेंगे सफर
जयपुर हाईकोर्ट के वकील 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले हैं. यात्रा शुरू करने से पहले उन्होंने अपना देहदान कर दिया.
Published : July 22, 2026 at 1:40 PM IST
कोडरमा: देहदान का संदेश देशभर में प्रसारित करने के उद्देश्य से 12 ज्योतिर्लिंगों की पैदल यात्रा पर निकले जयपुर उच्च न्यायलय के अधिवक्ता चंद्रकांत चौहान कोडरमा पहुंचे. जहां से वे देवघर के लिए रवाना हुए.
11 हजार किलोमीटर का पैदल सफर करेंगे तय
जयपुर हाईकोर्ट के वकील चंद्रकांत चौहान 27 अप्रैल को देहदान को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए पैदल 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर निकले हैं. 12 ज्याेर्तिलिंगों के दर्शन के लिए निकले चंद्रकांत एक साल के भीतर तकरीबन 11 हजार किलोमीटर का पैदल सफर तय करेंगे. इस यात्रा की शुरूआत करने से पहले चंद्रकांत ने जयपुर के सवाई मान सिंह चिकित्सा महाविद्यालय के शरीर रचना विभाग में अपना देहदान के लिए स्वैच्छिक स्वीकृति के लिए पपत्र दिया है, जिसे स्वीकृत किया जा चुका है.
देहदान को लेकर लोगों को करेंगे जागरूक
कोडरमा पहुंचे चंद्रकांत चौहान ने बताया कि बारिश के कारण पिछले कुछ दिनों से उनकी यात्रा पर असर पड़ा है, लेकिन उनके हौसले कम नहीं हुए हैं. वे बुलंद हौसले के साथ देहदान की मुहिम के साथ राह में मिलने वाले लोगों को जोड़ते जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जब लोग उनकी यात्रा के उद्देश्य के बारे में जानते हैं तो उनका भरपूर सहयोग करते हैं.
चंद्रकांत का कहना है कि मरने के बाद शरीर को जलाकर या मिट्टी में दफनाकर नष्ट ही करना है तो इससे अच्छा है कि मरने के बाद भी किसी के शरीर में जिंदा रहा जाए. उन्होंने बताया कि शरीर के अंग मरने के कई घंटे बाद भी दूसरे के शरीर में इस्तेमाल के लायक होते हैं, ऐसे में देहदान करके किसी की जिंदगी को रोशन करने की मुहिम शुरू की है. उन्होंने कहा कि अगर उनके शरीर के अंग दूसरों के काम के नहीं हैं, तो उस स्थिति में उनका शरीर मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए प्रैक्टिकल कामों में काम आएगा.
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