राजस्थान: निकाय-पंचायत चुनाव एक बड़ा राजनीतिक इम्तिहान
राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत चुनाव का ऐलान होते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है. ये चुनाव 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले का सबसे बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माने जा रहे हैं.

सौजन्य से:- ABP News
Rajasthan: निकाय-पंचायत चुनाव से पहले BJP-कांग्रेस एक्टिव, भजनलाल सरकार के कामकाज का होगा टेस्ट
Rajasthan Panchayat Elections: निकाय और पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है. बीजेपी और कांग्रेस ने रणनीति तेज कर दी है. भजनलाल सरकार के लिए यह चुनाव 2028 विधानसभा से पहले बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं.
राजस्थान में नगर निकाय और पंचायत चुनावों का ऐलान होते ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है. इन चुनावों को सिर्फ स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले का सबसे बड़ा राजनीतिक इम्तिहान माना जा रहा है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने अभी से चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. वहीं, चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार और विभिन्न आयोगों में नियुक्तियों का काम भी कुछ महीनों के लिए टलना तय माना जा रहा है.
सितंबर में निकाय, अक्टूबर में पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नगर निकाय चुनाव सितंबर में दो चरणों में कराए जाएंगे. इसके लिए 22 अगस्त को अधिसूचना जारी होगी. वहीं पंचायत चुनाव अक्टूबर में 4 चरणों में होंगे और इसकी अधिसूचना 23 सितंबर को जारी की जाएगी. नगर निकाय चुनाव करीब एक साल और पंचायत चुनाव लगभग डेढ़ साल की देरी से हो रहे हैं.
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राजनीतिक जानकार इन चुनावों को 2028 विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रहे हैं. चुनावी नतीजे यह तय करेंगे कि प्रदेश में किस पार्टी की पकड़ मजबूत है. बीजेपी और कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी), भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), आम आदमी पार्टी (आप) और एआईएमआईएम भी चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगी.
बीजेपी को सरकार होने का फायदा, लेकिन दबाव भी
सत्ता में होने के कारण बीजेपी को सरकारी योजनाओं और संगठन का फायदा मिलने की उम्मीद है, लेकिन अच्छे प्रदर्शन का दबाव भी रहेगा. कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का कहना है कि स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं और हर चुनाव के अपने मुद्दे होते हैं.
उनके मुताबिक पार्टी स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार की उपलब्धियों को भी जनता के बीच लेकर जाएगी. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी इन चुनावों में बड़ी जीत दर्ज करेगी.
वहीं कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाकर चुनाव टालने की कोशिश कर सकती है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का कहना है कि तय समय पर चुनाव होने की संभावना कम दिखाई देती है. उनका दावा है कि अगर चुनाव समय पर हुए तो जनता बीजेपी को हार का स्वाद चखाएगी क्योंकि लोग मौजूदा सरकार से नाराज हैं.
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राजस्थान में कुल 309 नगर निकाय हैं, जिनमें 10,245 वार्ड शामिल हैं और हर वार्ड से एक पार्षद चुना जाएगा. इसके अलावा प्रदेश की 11,071 ग्राम पंचायतों में सरपंच का चुनाव होगा. साथ ही 41 जिला परिषद अध्यक्ष और 367 ब्लॉक प्रमुख के पदों के लिए भी मतदान कराया जाएगा.
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इन चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है. अब सभी राजनीतिक दलों की नजर इन चुनावों पर है, क्योंकि इनके नतीजे प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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