बीएड-एमएड में गुजरात-राजस्थान और यूपी के विद्यार्थियों की दिलचस्पी अधिक, मध्य प्रदेश में फीस काफी कम
By Kapil NileyEdited By: Ramnath Mutkule Publish Date: Sun, 07 Jun 2026 10:44:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 07 Jun 2026 10:44:54 AM (IST) - अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में फीस बेहद कम, 9 जून को आएगा अलॉटमेंट -…

सौजन्य से:- Nai Dunia
By Kapil NileyEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sun, 07 Jun 2026 10:44:54 AM (IST)Updated Date: Sun, 07 Jun 2026 10:44:54 AM (IST)
- अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश में फीस बेहद कम, 9 जून को आएगा अलॉटमेंट
- 17 हजार सीटें अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई है
- प्रदेश में बीएड-एमएड कोर्स की सालभर की फीस महज 32 हजार रुपये है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर ऑनलाइन काउंसिलिंग का दूसरा चरण चल रहा है, जिसमें प्रदेश के अलावा भी अन्य राज्यों के विद्यार्थी आवेदन करने में लगे है। यानी 17 हजार सीटें अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित रखी गई है।
पंजीयन करवाने वालों में गुजरात-राजस्थान और उत्तर प्रदेश के छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक है। इसके पीछे वजह यह है कि इन राज्यों से बीएड-एमएड की फीस मध्य प्रदेश से काफी ज्यादा है। इन राज्यों में पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों से 80 हजार से लेकर एक लाख रुपये सालना की फीस वसूली जाती है। जबकि प्रदेश में बीएड-एमएड कोर्स की सालभर की फीस महज 32 हजार रुपये है। इसलिए ही यहां से विद्यार्थी पढ़ने में दिलचस्पी दिखा रहे है।
प्रदेशभर में 500 से अधिक सरकारी-निजी और अनुदान प्राप्त कॉलेज हैं। यहां से बीएड-एमएड, बीपीएड, एमपीएड, बीएडएमएड सहित अन्य कोर्स की 68 हजार सीटें है, जिसमें 25 फीसद सीटों पर अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को प्रवेश देने का प्रावधान है। इसके चलते गुजरात, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से विद्यार्थी आवेदन करते है। उच्च शिक्षा विभाग ने आनलाइन काउंसिलिंग का दूसरा चरण 28 मई से शुरू किया है। 3 जून तक विद्यार्थियों को आवेदन करना है।
पंजीयन की संख्या 30 हजार से ऊपर पहुंच गई है। इनमें अन्य राज्यों के 8 हजार छात्र-छात्राओं ने आवेदन कर रखा है। 4 जून को दस्तावेज सत्यापन किया गया है। उसके आधार पर विद्यार्थियों को 9 जून को सीटें आवंटित की जाएगी और 9 से 12 जून तक विद्यार्थियों को कालेजों में रिपोर्टिंग कर फीस जमा करना होंगी।
अशासकीय कालेज संचालक संघ के पदाधिकारी कमल हिरानी और रामबाबू शर्मा का कहना है कि च्वाइंस फीलिंग के दौरान विद्यार्थी अपने जिले के कालेज चुनते है, लेकिन अलाटमेंट में 200-250 किमी दूर कालेज दिए जाते है। इसके चलते विद्यार्थी प्रवेश से जुड़ी पूरी प्रक्रिया नहीं करते है। वे कहते है कि अन्य राज्यों के विद्यार्थियों की संख्या अच्छी रहती है, लेकिन आवंटन में बहुत दिक्कतें आती है। उन्हें पसंदीदा कालेज नहीं मिलता है। इस वजह से फीस नहीं भरते है।
प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही उच्च शिक्षा विभाग की फीस विनियम समिति ने कालेजों की फीस रिवाइज की है। पिछले साल की तुलना में फीस में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। अधिकांश कालेजों से संचालित पाठ्यक्रम की फीस 32 हजार रुपये रखी गई है। इसे लेकर कालेज संचालकों ने आपत्ति उठाई है। संघ के सदस्य अभय पांडे और डा. कविता कासलीवाल का कहना है कि 2009 में विभाग की समिति बनी थी, लेकिन 17 साल से 32 हजार फीस रखी जा रही है। फीस में संशोधन जरूरी है।
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