होमशिक्षा-करियरजोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने की कशमकश...वजह-इस सीढ़ी से शुरू सफर सीएम, मंत्री एवं एमएएल की कुर्सी तक पहुंचा
शिक्षा-करियर

जोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने की कशमकश...वजह-इस सीढ़ी से शुरू सफर सीएम, मंत्री एवं एमएएल की कुर्सी तक पहुंचा

जोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने की कशमकश...वजह-इस सीढ़ी से शुरू सफर सीएम, मंत्री एवं एमएएल की कुर्सी तक पहुंचा जोधपुर नगर निकाय राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी पाठशाला रहा है. इसी पाठशाला के छात्र रहे व्यास एवं बरकतुल्लाह…

ETV Bharat के अनुसार4 सितंबर 2026 को 11:33 am बजे
जोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने की कशमकश...वजह-इस सीढ़ी से शुरू सफर सीएम, मंत्री एवं एमएएल की कुर्सी तक पहुंचा

सौजन्य से:- ETV Bharat

जोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने की कशमकश...वजह-इस सीढ़ी से शुरू सफर सीएम, मंत्री एवं एमएएल की कुर्सी तक पहुंचा

जोधपुर नगर निकाय राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी पाठशाला रहा है. इसी पाठशाला के छात्र रहे व्यास एवं बरकतुल्लाह प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

Published : September 4, 2026 at 3:49 PM IST

जोधपुर: जोधपुर नगर निगम चुनाव में पार्षद बनने के लिए जबरदस्त होड़ है. पार्षद का काम भले सीमित हो, लेकिन ऊंचे पद का रास्ता इधर से भी गुजरता है, इसी सपने को लेकर लोग पार्षद बनने को लालायित दिखते हैं. सियासी जानकार मानते हैं कि जोधपुर के पार्षद का अगले स्तर पर भी नंबर लग सकता हैं. जोधपुर से पार्षद रहे कई नेता विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री तक बने हैं. जोधपुर नगर निकाय राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी पाठशाला रहा है. इसी पाठशाला के छात्र रहे जयनारायण व्यास एवं बरकतुल्लाह खान प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे. शहर की पहली महिला पार्षद सूर्यकांता व्यास तो छह बार विधायक बनीं.

भाजपा जिलाध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को समय आने पर जिला, प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर जिम्मेदारियां देती रही है. इसके चलते आज सबसे बड़ी पार्टी है. यह कार्यकर्ताओं की शक्ति की देन हैं. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ओमकार वर्मा ने बताया कि पार्टी की रीति और नीति पर चलने वाले कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने का मौका मिलता है. इसके कई उदाहरण जोधपुर कांग्रेस में है.

पढ़ें:जोधपुर का वार्ड 7 बना शेखावत की प्रतिष्ठा से जुड़ा, बोले- मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण

स्वतंत्रता से पहले चैयरमेन, बाद में सीएम: स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका के चलते जोधपुर के जयनारायण व्यास शेर-ए-राजस्थान कहलाए. उन्होंने 1930 के दशक में जोधपुर नगर पालिका से पार्षद के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया. वर्ष 1941-42 में जोधपुर नगर पालिका अध्यक्ष बने. देश की आजादी के बाद वे राजस्थान की राजनीति में तेजी से उभरे. मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश का दो बार नेतृत्व किया. वे राज्यसभा सदस्य भी रहे.

आजादी के बाद पार्षद बने, सीएम तक पहुंचे: पेशे से वकील और जोधपुर के उर्दू कवि बरकतुल्लाह खां 1951-52 के दौरान पार्षद और नगरीय निकाय चेयरमैन रहे. इसके बाद वे कांग्रेस की प्रदेश की राजनीति में शरीक हुए. उन्होंने 1971 में अलवर के तिजारा से एमएलए का चुनाव लड़ा और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे. वे प्रदेश के पहले एवं इकलौते अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री थे. 1973 में मृत्यु होने तक सीएम रहे थे. उनके नाम से जोधपुर में अशोक गहलोत ने स्टेडियम बनाया.

पार्षद हारे, विधायक से मंत्री बने: जोधपुर में भाजपा के राजेंद्र गहलोत ऐसे नेता हैं, जिनकी राजनीति पार्षद चुनाव से शुरू हुई. गहलोत ने 1973 में पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. जनसंघ में सक्रिय रहे एवं इमरजेंसी में जेल गए. भाजपा बनी तो उसमें सक्रिय हुए. 1990 में सरदारपुरा से विधायक बन राज्य सरकार में मंत्री रहे. यूआईटी चैयरमेन भी रहे. वर्ष 2014 में वसुंधरा राजे ने उन्हें फिर नगर निकाय की राजनीति में उतारा, जिसमें निर्वाचित हुए. इसके बाद राज्यसभा में भेजे गए, उनका कार्यकाल हाल में पूरा हुआ.

पार्षद से छह बार विधायक बनीं जीजी : जीजी के नाम से मशहूर सूर्यकांता व्यास जोधपुर की पहली महिला नेता थीं, जो छह बार विधायक बनीं. हालांकि उन्हें भाजपा की सरकार आने पर भी कभी मंत्री नहीं बनाया, लेकिन वसुंधरा राजे से उनकी नजदीकी से पावरफुल रहीं. सूर्यकांता व्यास की राजनीति की शुरूआत पार्षद के रूप में हुई. तब महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं होता था. 1972-73 में जनसंघ से पार्षद मनोनीत की गई. 1980 में दोबारा पार्षद बनीं. 1990 में पहली बार विधायक बनीं.

पहले पार्षद, फिर तीन बार विधायक: जोधपुर के मानसिंह देवड़ा तीन बार कांग्रेस के विधायक रहे. उनकी राजनीति की शुरुआत पार्षद से हुई. उन्होंने 1971-72 में नगर परिषद का चुनाव मात्र एक वोट से जीता था. इसके बाद राज्य की राजनीति में गए 1977 में सरदारपुरा क्षेत्र से विधायक चुने गए. कुल तीन बार जीते. 1999 में अशोक गहलोत के लिए विधायक का पद छोड़ा था. उस सीट पर गहलोत ने चुनाव जीता और अब भी वहीं से एमएलए हैं. गहलोत ने देवड़ा को राजस्थान आवासन मंडल का अध्यक्ष बनाया.

पार्षद से विधायक बनीं मनीषा: नई पीढ़ी की नेता मनीषा पंवार महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष रहीं. 2004 में पार्षद चुनी गईं. पार्टी में लगातार सक्रिय रहने के बाद वर्ष 2018 में जोधपुर शहर से विधायक निर्वाचित हुईं. गत चुनाव में हार गई, लेकिन राजनीति में सक्रिय हैं. पंवार ने बताया कि पार्टी के प्रति समर्पण से ही आगे बढ़ने का मौका मिलता हैं. पार्षद बनने के बाद मुझे मौका मिला विधायक बनीं. ऐसे ही सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी आगे बढ़ाती हैं.

छात्र राजनीति से भी आए नेता: जोधपुर की जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी भी देश व राज्य की राजनीति में बड़े पदों तक पहुंचे हैं. पूर्व सीएम, अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री एवं मौजूदा सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत, जिले के शेरगढ़ से एमएलए बाबूसिंह राठौड़, बाड़मेर की शिव से विधायक रविंद्र सिंह भाटी एवं पूर्व विधायक, जालमसिंह रावलोत तथा बायतू एमएलए हरीश चौधरी जैसे नाम जेएनवी की छात्र राजनीति की उपज है.

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें