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ऊंट के शरणागत कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र का सहयोग

राजस्थान में ऊँटों की संख्या में गंभीर गिरावट देखी जा रही है, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर एक साझा मिशन पर उतरे हैं, यहाँ ऊँटों के संरक्षण, आय पैदा करने और उनके बेहतरीन उत्पादों को बढ़ावा देने का लक्ष्य.

ETV Bharat के अनुसार15 जुलाई 2026 को 02:03 pm बजे
ऊंट के शरणागत कृषि विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र का सहयोग

सौजन्य से:- ETV Bharat

ऊंटनी का दूध बनेगा 'सुपर फूड': जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय देगा ऊंट पालकों को नया रोजगार

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र बीकानेर के सहयोग से विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत चारागाह भूमि विकसित की जाएगी. ऊंट पालकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा

Published : July 15, 2026 at 6:37 PM IST

जोधपुर: धोरों की शान और प्रदेश की संस्कृति के गौरव राज्य पशु ऊंट के अस्तित्व पर लगातार संकट के बादल मंडरा रहे हैं. पश्चिमी राजस्थान में लंबे समय तक आजीविका के मुख्य साधन रहे ऊंटों की संख्या में गंभीर गिरावट आ रही है. प्रदेश में ऊंटों की संख्या सिर्फ डेढ़ लाख ही रह गई है. इसी को देखते हुए कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत की पहल पर कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर की ओर से पहली बार विश्वविद्यालय स्तर पर ऊंट के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे.

इसकी पहली शुरुआत विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, गुड़ामालानी से की जाएगी. इसके तहत न सिर्फ स्थानीय लोगों को जागरूक किया जाएगा. विविध प्रयासों के तहत इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जाएगा. ऊंट का दूध और उसके उत्पाद एवं ऊंट के बालों के उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा.

राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र का लेंगे सहयोग: कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने बताया कि खेती और परिवहन में आधुनिक वाहनों का उपयोग एवं चरागाहों की लगातार घटती संख्या से न सिर्फ ऊंट पर संकट आया, बल्कि हमारी मरुस्थलीय अर्थव्यवस्था एवं पर्यावरण भी प्रभावित हुआ. उन्होंने बताया कि अब इस दिशा में काम करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, गुड़ामालानी से शुरुआत करते हुए राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC), बीकानेर के सहयोग से विभिन्न प्रोजेक्ट के तहत चारागाह भूमि को विकसित किया जाएगा. साथ ही उष्ट्र पालकों में जागरूकता बढ़ाकर सरकार की ओर से प्रदत्त विभिन्न सरकारी योजनाओं से भी उन्हें जोड़ा जाएगा.

दूध के उत्पादों को दिया जाएगा प्लेटफार्म: कृषि विज्ञान केंद्र, गुड़ामालानी के वरिष्ठ वैज्ञानिक व अध्यक्ष डॉ. प्रदीप पगारिया ने बताया कि ऊंट संरक्षण की दिशा में आय संवर्धन करना सबसे महत्वपूर्ण है. इसके लिए केंद्र की ओर से पोषक तत्वों से भरपूर 'सुपर फूड' ऊंटनी के दूध का संग्रहण केंद्र बनाकर एवं उसका मूल्य संवर्धन कर विभिन्न उत्पाद बनाए जाएंगे. इससे न सिर्फ ऊंट पालकों को प्लेटफार्म मिलेगा, बल्कि केंद्र के सहयोग से मार्केटिंग होने से कमाई का जरिया भी बढ़ेगा. इसके अतिरिक्त ऊंट के बालों से बने उत्पादों जैसे कालीन, बैग को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के लिए सहायता प्रदान की जाएगी.

विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर शुरुआत: डॉ. पगारिया ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद- अटारी, पशुपालन विभाग, विभिन्न एनजीओ, एफपीओ, कॉरपोरेट सेक्टर सहित कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पहली कार्यशाला का आयोजन कर रोड मैप भी तैयार कर लिया गया है.

डॉ. पगारिया के अनुसार जलवायु परिवर्तन के दौर में ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करने, मरुस्थलीय इकोसिस्टम को बचाने एवं ऊंटनी के दूध जैसे 'सुपर फूड' के माध्यम से नई ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खड़ा करने का यह मिशन है. इस पशु को डेयरी उद्योग, पर्यावरण पर्यटन एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों से जोड़ना ही इसकी घटती संख्या को रोकने का व्यावहारिक उपाय है.

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