कोटा में डायलिसिस से इनकार, महिलाएं इच्छामृत्यु की मांग कर रही हैं: क्या है कारण
राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती चार महिलाओं ने डायलिसिस से इनकार किया है और सरकार से इच्छामृत्यु की मांग की है। जानिए वे क्यों डायलिसिस से इनकार कर रही हैं और क्या है उनकी अपील।

सौजन्य से:- Hindustan
कोटा में 70 दिन से अस्पताल में भर्ती महिलाएं मांग रहीं इच्छा मृत्यु! डायलिसिस कराने से इंकार; क्या वजह?
Women demand euthanasia in Kota: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले 70 दिनों से भर्ती चार महिला मरीजों ने डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया है। अब महिलाओं ने सरकार से इच्छा मृत्यु की मांग की है। जानिए आखिर क्या है मामला।
Women demand euthanasia in Kota: राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले करीब 70 दिनों से भर्ती पांच महिला मरीजों में से चार ने बुधवार को अस्पताल के बाहर आकर अपनी पीड़ा मीडिया के सामने रखी। महिलाओं ने आरोप लगाया कि लगातार डायलिसिस के बावजूद उनकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने डायलिसिस कराने से इनकार करते हुए सरकार से किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की है। साथ ही, उनकी मांग पूरी नहीं होने पर इच्छामृत्यु देने की अपील भी की है।
बताया जा रहा है कि इन सभी महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी के बाद तबीयत बिगड़ गई थी और उनकी किडनियां प्रभावित हो गईं। फिलहाल सभी महिलाएं कोटा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विंग के नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती हैं और डायलिसिस के सहारे जीवन जी रही हैं।
‘अब डायलिसिस कराने की ताकत नहीं बची’
पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती हुए दो महीने से अधिक समय हो गया है। हर दूसरे दिन डायलिसिस होने से उनका शरीर पूरी तरह टूट चुका है। उनका कहना है कि डायलिसिस के बाद तेज बुखार आता है और तबीयत और ज्यादा बिगड़ जाती है। लंबे समय से अस्पताल में भर्ती रहने के कारण वे अपने परिवार और छोटे बच्चों से भी नहीं मिल पा रही हैं।
महिलाओं ने कहा कि अब उनमें बार-बार डायलिसिस कराने की शारीरिक और मानसिक ताकत नहीं बची है। उनका कहना है कि वे केवल किडनी ट्रांसप्लांट चाहती हैं। यदि सरकार उनकी मदद नहीं कर सकती, तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने क्या कहा?
कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने महिलाओं के आरोपों पर कहा कि जिन पांच महिलाओं की सीजेरियन के बाद हालत गंभीर हुई थी, उनकी स्थिति अब पहले से काफी बेहतर है और वे धीरे-धीरे रिकवर कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि मरीजों का डायलिसिस केवल चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार किया जा रहा है। अभी यह कहना संभव नहीं है कि उन्हें कब तक डायलिसिस की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि यह उनकी किडनियों की रिकवरी पर निर्भर करेगा।
डॉ. जैन ने यह भी कहा कि यदि महिलाएं अस्पताल से घर जाना चाहती हैं तो उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकता है। इसके बाद वे तय समय पर डायलिसिस के लिए अस्पताल आ सकती हैं। फिलहाल डॉक्टरों का मानना है कि किडनियों की कार्यक्षमता पूरी तरह लौटने तक डायलिसिस जारी रखना जरूरी है।
रिपोर्ट- योगेंद्र महावर
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