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जोधपुर- बाजरा-मूंग की फसलें खराब,रेत में दबे सैकड़ों बीघा खेत: किसान बोले-बारिश नहीं होने से जल गए पौधे; पशुओं के लिए चारा भी कहां से लाएंगे - Jodhpur News

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Dainik Bhaskar के अनुसार22 जुलाई 2026 को 06:06 am बजे
जोधपुर- बाजरा-मूंग की फसलें खराब,रेत में दबे सैकड़ों बीघा खेत:  किसान बोले-बारिश नहीं होने से जल गए पौधे; पशुओं के लिए चारा भी कहां से लाएंगे - Jodhpur News

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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जोधपुर- बाजरा-मूंग की फसलें खराब,रेत में दबे सैकड़ों बीघा खेत:किसान बोले-बारिश नहीं होने से जल गए पौधे; पशुओं के लिए चारा भी कहां से लाएंगे

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राजस्थान में इस बार मानसून सात दिन की देरी से आया। वहीं अब तक बारिश भी कम हुई है। इससे कई बांध खाली हैं। किसान भी परेशान हैं।

जोधपुर में मानसून की एंट्री के साथ किसानों को उम्मीद थी कि बारिश का दौर चलेगा। ऐसे में खरीफ की फसलों की बुवाई शुरू कर दी थी, लेकिन जिले में मानसून की एंट्री के बाद से अच्छी बारिश नहीं हुई।

जोधपुर में अब तक औसत से 45 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जोधपुर के शेरगढ़ क्षेत्र में बारिश नहीं होने से 15 से ज्यादा गांवों में सैकड़ों बीघा खेतों में फसल खराब हो गई हैं। किसानों की मेहनत बेकार हो गई।

किसान बोले- कई घंटों तक तपती धूप में मेहनत करते हुए फसलों की बुवाई की थी। हवा की वजह से जो फसलें खड़ी थी, वे रेत में दब गईं। रिपोर्ट में पढ़ें किसानों का दर्द…

पहले देखें ये PHOTOS… कैसे खेत बन गए ‘रेगिस्तान’

15 से ज्यादा गांवों में फसलें जल गईं

जोधपुर जिले के शेरगढ़ क्षेत्र के सोइंतरा, भैर नगर, साई, हिम्मतपुरा, चाबा, सुवालिया, सोलंकियातला, सोमेसर, दासानिया, पाबूसर, चुतरपुरा, भूंगरा, तेना, खिरजा, रायसर, रामगढ़, साबरसर सहित आस-पास के गांवों में फसलें बर्बाद हो गईं।

कम बारिश के बावजूद किसानों ने उम्मीद के साथ बुवाई की, लेकिन अब नमी की कमी और तेज गर्म हवा से फसलें झुलसने लगी हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।

किसान बोले- पूरा खेत तबाह हो गया, अब कुछ नहीं बचा

सोइंतरा, भैर नगर निवासी किसान राणाराम ने बताया- मेरे 50 बीघा से ज्यादा खेत है। इस बार बारिश की उम्मीद में बाजरा, मूंग, मोठ, तिल और ग्वार बोए थे। बुवाई के लिए 30 घंटे तक ट्रैक्टर चलाया था। इस पर करीब 50 हजार रुपए का खर्चा आया। बारिश नहीं होने से मेहनत पर पानी फिर गया। पूरी फसल जलकर खराब हो गई। इतने रुपए खर्च करने के बाद पूरा खेत तबाह हो गया। अब कुछ नहीं बचा।

वहीं सोइंतरा, भैर नगर निवासी किसान रामूराम ने बताया- मेरे पास करीब 20 बीघा खेत है। बुवाई के लिए मजदूरों ने एक घंटे के एक हजार रुपए मजदूरी ली। खेत में जो फसलें खड़ी हैं, वे जल गई हैं। एक महीने से हवा चल रही है, जिससे फसल रेत में दब गई। पूरी फसल बर्बाद हो चुकी है।

किसान बोले- बारिश नहीं हुई तो चारा कहां से लाएंगे

क्षेत्र के किसानों ने बताया- बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें खराब हो चुकी हैं। ऐसे में चिंता बढ़ गई है कि पशुओं के लिए चारा कहां से लाएंगे। किसानाें ने मांग रखी कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करवाकर हमें अनुदान दिया जाए। साथ ही पशुओं के चारे के लिए व्यवस्था करने की भी मांग की।

खरीफ फसल : टारगेट से 39% कम बुवाई

कृषि विभाग की 17 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार- इस साल खरीफ की फसलों का टारगेट 7.34 लाख हेक्टेयर है। अब तक केवल 4.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो पाई है। कुल लक्ष्य का करीब 61 प्रतिशत ही पूरा हो सका है। टारगेट से 39 फीसदी कम बुवाई हुई है।

मौजूदा स्थिति पिछले साल की तुलना में काफी कमजोर है। पिछले साल 15 जुलाई तक जिले में खरीफ फसलों की बुवाई तय टारगेट से ज्यादा हो चुकी थी। कृषि विशेषज्ञ इस बार कम बुवाई को मानसून की कमजोर शुरुआत का सीधा परिणाम मान रहे हैं।

कंटेंट/वीडियो इनपुट: विक्रम सिंह

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