होमक्राइमभाजपा सांसद ने भी उंगली उठाई: आदिवासियों को यूसीसी से छूट दें!
क्राइम

भाजपा सांसद ने भी उंगली उठाई: आदिवासियों को यूसीसी से छूट दें!

भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने सरकार से सुझाव दिया है कि राजस्थान के आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से बाहर रखा जाए। उन्होंने तर्क दिया कि आदिवासी परंत्राओं को नुकसान होगा यदि यूसीसी को उत्तराखंड के तर्ज पर लागू किया जाए।

Navbharat Times के अनुसार22 जुलाई 2026 को 08:01 am बजे
भाजपा सांसद ने भी उंगली उठाई: आदिवासियों को यूसीसी से छूट दें!

सौजन्य से:- Navbharat Times

Rajasthan UCC : राजस्थान में यूसीसी कानून को लेकर सुगबुगाहट तेज है। इसी बीच उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने सरकार से आदिवासी समुदायों को इस एक्ट के दायरे से बाहर रखने का आग्रह किया है।

उदयपुर: राजस्थान में यूसीसी कानून को इसी मानसून सत्र में लागू करने की कवायद चल रही है। इसका मसौदा तैयार किया जा रहा है। ड्राफ्टिंग कमेटी की ओर से सुझाव भी आमंत्रित है। इसी बीच भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार से आग्रह किया है कि राजस्थान के आदिवासी समुदायों को प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के दायरे से बाहर रखा जाए।

बीजेपी सांसद ने दिया है ये तर्क

उन्होंने तर्क दिया कि राजस्थान को उत्तराखंड और गोवा मॉडल का अनुसरण करना चाहिए, जहाँ अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून से छूट दी गई है। सांसद रावत ने कहा कि यह छूट टीएसपी (TSP) और नॉन-टीएसपी (non-TSP) दोनों क्षेत्रों में रहने वाले सभी आदिवासियों पर लागू होनी चाहिए। वहीं, उन्होंने मुस्लिम और ईसाई जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए यूसीसीको सख्ती से लागू करने का समर्थन किया।

आदिवासी परंपराओं पर पड़ेगा असर

सांसद ने कहा कि यूसीसीके लागू होने से विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़ी आदिवासियों की सदियों पुरानी परंपराएं प्रभावित हो सकती हैं। उनका कहना है कि दक्षिण राजस्थान के आदिवासी समुदायों में कई विशेष प्रथाएं प्रचलित हैं। नाता प्रथा: पुनर्विवाह का एक पारंपरिक रूप।

पारंपरिक न्याय: पारंपरिक पंचायतों के माध्यम से तलाक को समुदाय में मान्यता।

विवाह पंजीकरण: कई आदिवासी विवाह औपचारिक पंजीकरण के बिना पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न होते हैं।

सांसद का कहना- आदिवासी परपंराएं खत्म होगी

यदि राजस्थान भी उत्तराखंड की तर्ज पर यूसीसी लागू करता है, तो एक-पत्नी/पति नियम (मोनोगेमी) , अनिवार्य विवाह पंजीकरण, अदालत द्वारा मान्यता प्राप्त तलाक और समान उत्तराधिकार नियम जैसी व्यवस्थाएं आदिवासियों की इन पारंपरिक प्रथाओं को खत्म कर सकती हैं,जब तक कि उन्हें विशेष रूप से छूट न दी जाए।

जो अनुसूचित जनजातियां अपनी मूल परंपराओं और कस्टमरी प्रथाओं का पालन करती आ रही हैं, उन्हें यूसीसीसे बाहर रखा जाना चाहिए।

मन्नालाल रावत, उदयपुर, भाजपा सांसद

धर्मांतरित लोगों पर लागू हो कानून

अदालती फैसलों का हवाला देते हुए सांसद रावत ने स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन्हीं को मिलनी चाहिए जो वास्तव में आदिवासी रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। उन्होंने कहा, 'न्यायपालिका पहले ही व्यवस्था दे चुकी है कि जब कोई व्यक्ति आदिवासी रीति-रिवाजों को छोड़कर कोई अन्य धर्म (जैसे ईसाई धर्म) अपना लेता है, तो उसे SC/ST अधिनियम के तहत मिलने वाला संरक्षण समाप्त हो जाता है। ठीक इसी तरह, ऐसे धर्मांतरित व्यक्तियों पर यूसीसीपूरी तरह लागू होना चाहिए।'

यूसीसी को लेकर मांगे जा रहे हैं सुझाव

उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने प्रस्तावित यूसीसी पर राज्यव्यापी परामर्श शुरू कर दिया है और आगामी मानसून सत्र में इसे विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है। ऐसे समय में भाजपा सांसद की इस मांग को काफी अहम माना जा रहा है।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

कन्वर्सेशन शुरू करें

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें