होमक्राइमजयपुर में RTO और पुलिस के बीच विवाद: जांच जारी, सच्चाई का पता लगाने की कोशिश
क्राइम

जयपुर में RTO और पुलिस के बीच विवाद: जांच जारी, सच्चाई का पता लगाने की कोशिश

जयपुर में RTO इंस्पेक्टर और पुलिस के बीच विवाद सामने आया है। आरोप हैं कि परिवहन विभाग की टीम ने कथित अवैध वसूली के दौरान वाहन चालक से मारपीट की, जबकि पुलिस ने आरोप लगाया है कि आरटीओ कर्मचारी चालक को मारपीट करने के साथ-साथ सरकारी वाहन के शीशे भी तोड़ गए। हिंगोनिया टोल पर हुई घटना की जांच में पुलिस कर रही है।

Hindustan के अनुसार22 जुलाई 2026 को 04:10 am बजे
जयपुर में RTO और पुलिस के बीच विवाद: जांच जारी, सच्चाई का पता लगाने की कोशिश

सौजन्य से:- Hindustan

जयपुर में RTO और पुलिस आमने-सामने, दोनों ने खोला एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा

जानकारी के अनुसार, मामला 19 जुलाई का है। आरोप है कि हिंगोनिया टोल के पास परिवहन विभाग की टीम ने एक वाहन चालक कालूराम को रोका। इसी दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके सिर में चोट आई।

राजधानी जयपुर के कानोता थाना क्षेत्र में परिवहन विभाग (RTO) की टीम और पुलिस के बीच ऐसा विवाद सामने आया है, जिसने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर आरटीओ इंस्पेक्टर ने थानाधिकारी पर थाने में मारपीट और अवैध रूप से बंद करने का आरोप लगाया है, तो दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि आरटीओ कर्मचारी कथित अवैध वसूली के दौरान वाहन चालक से मारपीट कर फरार हो गए थे। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच में जुट गई है।

हिंगोनिया टोल पर शुरू हुआ पूरा विवाद

जानकारी के अनुसार, मामला 19 जुलाई का है। आरोप है कि हिंगोनिया टोल के पास परिवहन विभाग की टीम ने एक वाहन चालक कालूराम को रोका। इसी दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके सिर में चोट आई। परिजनों ने घायल को अस्पताल में भर्ती कराया।

शुरुआत में घायल चालक ने बयान दिया कि चार पुलिसकर्मियों ने कथित अवैध वसूली के दौरान उसके साथ मारपीट की। हालांकि पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो मामला पुलिस का नहीं बल्कि परिवहन विभाग की टीम से जुड़ा हुआ सामने आया।

RTO इंस्पेक्टर बोले- थाने में थप्पड़ मारा, बंद कर दिया

आरटीओ इंस्पेक्टर नवल मीणा का आरोप है कि वह 20 जुलाई की शाम इंस्पेक्टर रामसिंह के साथ कानोता थाने पहुंचे थे। उन्होंने वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दी थी, जिसमें लिखा था कि चालक ने रुकने के संकेत के बावजूद वाहन नहीं रोका और बाद में उनकी टीम पर हमला कर सरकारी वाहन के शीशे भी तोड़ दिए।

नवल मीणा का आरोप है कि रिपोर्ट देने के दौरान थानाधिकारी मुनींद्र सिंह ने उनसे अभद्र भाषा में बात की और कहा, “तू ज्यादा होशियार बनता है क्या?” इसके बाद उनके साथ मारपीट की गई और कुछ समय के लिए थाने में बंद कर दिया गया। उनका कहना है कि बाद में उन्हें बिना किसी कार्रवाई के जाने दिया गया।

SHO का पलटवार- सिर फोड़कर भागे, अब सफाई देने आए हैं

वहीं कानोता थाना प्रभारी मुनींद्र सिंह ने आरटीओ इंस्पेक्टर के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के कुछ कर्मचारी आए दिन कथित अवैध वसूली को लेकर विवादों में रहते हैं।

थानाधिकारी का दावा है कि एक दिन पहले भी एक अन्य चालक के साथ मारपीट कर उसका पैर तोड़ने का मामला सामने आया था। इसके बाद दूसरे दिन कथित वसूली के दौरान एक अन्य चालक कालूराम का सिर फोड़ दिया गया और घटना के बाद आरटीओ कर्मचारी मौके से चले गए।

एसएचओ ने कहा कि यदि वास्तव में आरटीओ टीम पर हमला हुआ था तो वे उसी समय थाने क्यों नहीं पहुंचे। उनका आरोप है कि अब जब मामला खुल गया है तो खुद का बचाव करने के लिए पुलिस पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

घायल चालक का दावा- अवैध वसूली के चक्कर में किया हमला

घायल चालक कालूराम का आरोप है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों ने कथित अवैध वसूली के दौरान उसके साथ मारपीट की। उसने कहा कि इसी दौरान उसके सिर पर गंभीर चोट लगी। चालक का कहना है कि घटना के बाद आरटीओ कर्मचारी मौके से चले गए, जबकि परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।

चालक के आरोपों के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है, क्योंकि शुरुआती बयान में उसने पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया था, लेकिन बाद की जांच में मामला परिवहन विभाग से जुड़ा सामने आया।

पुलिस कर रही हर एंगल से जांच

फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घायल चालक के साथ वास्तव में मारपीट किसने की, सिर पर चोट कैसे लगी और क्या कथित अवैध वसूली की बात में कोई सच्चाई है।

साथ ही आरटीओ इंस्पेक्टर की ओर से थानाधिकारी पर लगाए गए मारपीट और थाने में बंद करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। यदि दोनों पक्षों के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।

आरोपों के बीच बढ़ा विवाद

फिलहाल यह मामला आरटीओ और पुलिस के बीच टकराव का रूप ले चुका है। एक ओर परिवहन विभाग के अधिकारी पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस का कहना है कि आरटीओ कर्मचारी खुद सवालों के घेरे में हैं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगा कि हिंगोनिया टोल पर हुई घटना के पीछे असल सच्चाई क्या है और जिम्मेदार कौन है।

लेखक के बारे में

Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)

सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।

सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।

शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।

लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें