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पुष्य नक्षत्र का धार्मिक और आर्थिक महत्व: जानें, जयपुर में कैसे मनाया जा रहा यह शुभ अवसर

पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष शास्त्र में सबसे शुभ और कल्याणकारी नक्षत्र माना जाता है. जयपुर में आज गणेश मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किए जा रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है.

ETV Bharat के अनुसार15 जुलाई 2026 को 06:01 am बजे
पुष्य नक्षत्र का धार्मिक और आर्थिक महत्व: जानें, जयपुर में कैसे मनाया जा रहा यह शुभ अवसर

सौजन्य से:- ETV Bharat

पुष्य नक्षत्र पर जयपुर में उमड़ी आस्था, गणेश मंदिरों में मंत्रोच्चार के साथ प्रथम पूज्य का विशेष अभिषेक और पूजा-अर्चना

इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, जप-तप, दान-पुण्य और नए कार्यों का शुभारंभ विशेष फलदायी माना जाता है.

Published : July 15, 2026 at 10:40 AM IST

जयपुर: नक्षत्रों के राजा कहे जाने वाले पुष्य नक्षत्र के शुभ संयोग पर बुधवार को छोटी काशी पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबी नजर आई. शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं. प्रथम पूज्य भगवान गणेश का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पंचामृत अभिषेक, विशेष शृंगार और महाआरती की गई. श्रद्धालुओं ने विघ्नहर्ता से परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्य, व्यापार में उन्नति और जीवन के सभी संकट दूर करने की प्रार्थना की. इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों का दौर भी चलता रहा.

खास है पुष्य नक्षत्र :ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में सबसे शुभ और कल्याणकारी माना गया है. इसे समृद्धि, सौभाग्य, उन्नति और सफलता का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषाचार्य डॉ. मनोज गुप्ता के अनुसार, इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, जप-तप, दान-पुण्य और नए कार्यों का शुभारंभ विशेष फलदायी माना जाता है. भगवान गणेश की आराधना इस दिन कई गुना ज्यादा पुण्य प्रदान करने वाली मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन गणपति की विधिवत पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है.

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मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भव्य अभिषेक :शहर के प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पुष्य नक्षत्र के अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए. भगवान गणेश का सबसे पहले गंगाजल, केवड़ा जल और गुलाब जल से शुद्ध स्नान हुआ. इसके बाद 251 लीटर दूध, 21 किलो दही, 5 किलो घी, 21 किलो बूरा, शहद और सुगंधित द्रव्यों से पंचामृत अभिषेक किया गया. महंत कैलाश शर्मा ने बताया, वैदिक मंत्रों और गणपति सहस्त्रनाम के पाठ के बीच अभिषेक संपन्न हुआ. इसके बाद भगवान को नई पोशाक धारण कराकर आकर्षक फूलों से विशेष शृंगार किया गया. श्रद्धा स्वरूप 1001 मोदकों का भोग अर्पित किया गया और आखिर में खीर का विशेष नैवेद्य लगाकर भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया.

नहर के गणेश मंदिर में दूर्वाभिषेक :नहर के गणेश मंदिर में भी पुष्य योग के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की गई. मंदिर के युवाचार्य पंडित मानव शर्मा ने बताया कि भगवान गणेश का दूर्वा मार्जन के साथ पंचामृत अभिषेक किया गया. गणपति अथर्वशीर्ष, अष्टोत्तर शतनामावली और ऋग्वेदोक्त गणपति मातृका के मंत्रों का सामूहिक पाठ किया गया. पंचोपचार विधि से पूजा संपन्न होने के बाद श्रद्धालुओं को अभिमंत्रित रक्षासूत्र बांधे गए. शाम के समय 251 दीपकों से भव्य महाआरती की जाएगी. इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.

खरीदारी के लिए माना जाता है अत्यंत शुभ :धार्मिक महत्व के साथ पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व व्यापारिक गतिविधियों में भी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, भूमि, मकान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की खरीदारी शुभ फल देती है. इसी कारण शहर के सर्राफा बाजार, ऑटोमोबाइल शोरूम और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी अच्छी ग्राहकी रहने की संभावना है.

मंत्र सिद्धि और साधना के लिए उत्तम मुहूर्त :ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पुष्य नक्षत्र साधकों के लिए भी विशेष महत्व रखता है. इस दिन किए गए मंत्र जाप, साधना, यंत्र स्थापना और आध्यात्मिक अनुष्ठानों को शीघ्र सिद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है. यही कारण है कि अनेक साधक और श्रद्धालु इस दिन विशेष जप, तप और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं. बहरहाल, पुष्य नक्षत्र के अवसर पर शहर के अन्य गणेश मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन और प्रसादी वितरण के कार्यक्रम किए गए. श्रद्धालु परिवार सहित मंदिर पहुंचे और भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया. कई लोगों ने अपने नए कार्यों की शुरुआत भी की.

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