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राजस्थान में दो से अधिक संतान वालों को भी मिली बिना अड़चन चुनाव लड़ने की मंजूरी, खत्म हो रहा रोक-थाम का प्रावधान, पढ़ें आदेश

राजस्थान सरकार ने निकाय और पंचायत चुनाव में दो से अधिक संतान वालों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने वाले प्रावधान को समाप्त करने के लिए 21 जुलाई 2026 को आदेश जारी किया। X के अनुसार, यह आदेश राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन के कारण हुआ है, जिससे अब दो से अधिक संतान वाले उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकते हैं।

Navbharat Times के अनुसार22 जुलाई 2026 को 04:01 am बजे
राजस्थान में दो से अधिक संतान वालों को भी मिली बिना अड़चन चुनाव लड़ने की मंजूरी, खत्म हो रहा रोक-थाम का प्रावधान, पढ़ें आदेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मंगलवार को पंचायत निकाय चुनाव से जुड़ा बड़ा फैसला लिया गया है। 21 जुलाई 2026 को जारी नए निर्देशों के अनुसार अब दो से अधिक संतान होने संबंधी घोषणा-पत्र प्रत्याशियों को नहीं देना होगा।

जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव लड़ने वाले इच्छा रखने वाले प्रत्याशियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के लिए ने एक बड़ा फैसला लिया है। आयोग की ओर से 21 जुलाई 2026 को जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब नगरपालिका चुनाव में सदस्य पद के उम्मीदवारों से दो से अधिक संतान होने संबंधी घोषणा-पत्र (अंडरटेकिंग) नहीं लिया जाएगा। इस संंबंध में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आदेश जारी करदिया गया है।

दो से अधिक संतानों वाली बाध्यता खत्म

यह आदेश राजस्थान सरकार की 25 मार्च 2026 को प्रकाशित अधिसूचना के क्रम में जारी किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24 में संशोधन कर दो से अधिक संतान होने के आधार पर चुनाव लड़ने की अयोग्यता के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया है।

बिना कानूनी अड़चन लड़ सकेंगे चुनाव

इस महत्वपूर्ण बदलाव के बाद अब दो से अधिक बच्चों वाले उम्मीदवार भी बिना किसी कानूनी अड़चन के नगरीय निकाय चुनाव में अपनी दावेदारी ठोक सकेंगे। निर्वाचन आयोग के इन निर्देशों से चुनाव लड़ने के इच्छुक कई उम्मीदवारों को राहत मिली है।

हजारों लोगों को राजनीति में भाग्य आजमाने के रास्ते खुले

चार महीने पहले 24 मार्च 2026 को राजस्थान सरकार की ओर से राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 के तहत नोटिफिकेशन जारी किया था। विधानसभा सत्र के दौरान राज्य सरकार यह संशोधन अधिनियम लेकर आई थी। इस अधिनियम के मुताबिक निकाय और पंचायत चुनाव में संतान संबंधी बाध्यताओं को समाप्त कर दिया गया था। सरकार के इस कदम ने प्रदेश के हजारों लोगों को राजनीति में भाग्य आजमाने के रास्ते खोल दिए।

भैरोंसिंह शेखावत के शासन में लगी थी रोक

31 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के शासनकाल में साल 1995 में पंचायती राज कानून और राजस्थान नगरपालिका कानून में बदलाव किया गया था। उन दिनों नए कानून में दो से अधिक संतानों वाले व्यक्तियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने प्रावधान जोड़ा गया था। उस समय इसका उद्देश्य जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देना बताया गया था।

लंबे समय से उठ रही थी मांग

निकाय और पंचायत चुनाव में दो से ज्यादा संतान वाले प्रावधान को खत्म करने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी। भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य दलों के जनप्रतिनिधि भी समय समय पर यह मांग करते रहे कि दो से ज्यादा संतान से जुड़े प्रावधान को हटाया जाए। इस संबंध में राजस्थान विधानसभा में भी कई बार आवाज उठी थी। सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में दो से ज्यादा संतान की अड़चन हटाने के बाद निकाय और पंचायत चुनाव के जुड़े इस प्रावधान को हटाने की मांग उठाई जा रही थी। भजनलाल सरकार ने जनप्रतिनिधियों की इस मांग को पूरा कर दिया।

लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।

विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।

पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें

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