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जयपुर पहुंचे शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोले-बहस की आवश्यकता नहीं, कर्मचारियों की थी गलती

जयपुर पहुंचे शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोले-बहस की आवश्यकता नहीं, कर्मचारियों की थी गलती शंकराचार्य बोले, गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाता है तो आपत्ति नहीं, लेकिन इसके लिए न दबाव डालेंगे…

ETV Bharat के अनुसार28 सितंबर 2026 को 03:05 pm बजे
जयपुर पहुंचे शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोले-बहस की आवश्यकता नहीं, कर्मचारियों की थी गलती

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर पहुंचे शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती, राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर बोले-बहस की आवश्यकता नहीं, कर्मचारियों की थी गलती

शंकराचार्य बोले, गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाता है तो आपत्ति नहीं, लेकिन इसके लिए न दबाव डालेंगे और न पक्ष या विरोध में बोलेंगे.

Published : September 28, 2026 at 7:43 PM IST

जयपुर: जगद्गुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती सोमवार को जयपुर पहुंचे. यहां उन्होंने शहर के प्रथम पूज्य मोतीडूंगरी गणेशजी के दर्शन किए और देश-प्रदेश में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की. इस दौरान मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने उनकी अगवानी की और मंदिर की समृद्ध परंपराओं एवं इतिहास की जानकारी दी. महंत कैलाश शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शंकराचार्य का सम्मान किया. इस दौरान मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी से लेकर गौमाता को राष्ट्र माता बनाने के लिए छिड़ी बहस पर बेबाकी से अपनी बात रखी.

गोविंददेवजी और गणेशजी जयपुर की गरिमा के रक्षक: मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में दर्शन के बाद शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि जयपुर भगवान गोविंददेवजी की नगरी है. वृंदावन से गोविंददेवजी के अलावा मदन मोहनजी, युगल किशोरजी, मथुरेशजी सहित अन्य विग्रह भी अलग-अलग स्थानों पर पधारे थे. मदन मोहनजी करौली, युगल किशोरजी पन्ना और मथुरेशजी कोटा चले गए, जबकि जयपुर में प्रमुख रूप से गोविंददेवजी विराजमान हैं. उनके साथ मोतीडूंगरी गणेशजी भी जयपुर की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं. शंकराचार्य ने कहा कि जयपुर की गरिमा की रक्षा के लिए ये दोनों भगवान यहां विराजमान हैं. इनके प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. जब तक ठाकुरजी शयन नहीं करते, तब तक श्रद्धालु लगातार दर्शन को आते रहते हैं. उन्होंने दोनों देवस्थानों से जयपुर, राजस्थान, देश और विश्व के कल्याण की कामना की.

अयोध्या मामले में कर्मचारियों की गलती : अयोध्या के श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर पूछे सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि इस मामले में विशेष बहस की आवश्यकता नहीं है. कुछ कर्मचारियों की गलती थी. उन पर नियंत्रण किया जा चुका है. उनके खिलाफ मुकदमा चल रहा है. कुछ लोग जेल में भी हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लोगों का मंदिर से कोई संबंध नहीं रहेगा और अब भी उनका मंदिर से कोई संबंध नहीं है.

गाय सृष्टि मात्र की मां, सेवा करना हर मानव का कर्तव्य : गाय को राष्ट्रमाता घोषित किए जाने की मुहिम पर शंकराचार्य ने कहा, गाय सृष्टि मात्र की मां और विश्व माता है. गाय को राष्ट्रमाता घोषित किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वे इसके लिए न दबाव डालेंगे और न ही इसके पक्ष या विरोध में बोलेंगे. गाय की सेवा हर मानव का कर्तव्य है. केवल बातचीत या हल्ला मचाने के बजाय सभी को गौसेवा करनी चाहिए. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में गौहत्या को लेकर कानून बने हैं. इसके बावजूद हत्या की घटनाएं सामने आती हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में हत्या करने वालों पर नियंत्रण होना चाहिए, गौमाता पर नहीं.

दर्शन के दौरान गूंजे जयकारे : शंकराचार्य के मोतीडूंगरी गणेशजी मंदिर में पूजा के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष आराधना की गई और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की गई. इस अवसर पर मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने गुरु-शिष्य परंपरा के तहत शंकराचार्य के चरण वंदन कर आशीर्वाद लिया. फिर चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित करते हुए प्रसाद भेंट किया. इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा.

पढ़ें:जगद्गुरू शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने किए मोतीडूंगरी गणेशजी के दर्शन

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