पहलगाम में बादल फटा, सड़क बही: उत्तराखंड में हाइड्रो प्रोजेक्ट के पास लैंडस्लाइड; प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम तैयार, इनसे तेज बारिश की उम्मीद
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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पहाड़ी राज्यों में बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। शनिवार रात जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद बाढ़ आई। कई खेत बर्बाद हो गए, सड़क बह गई।
उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास लैंडस्लाइड हुआ । कई गाड़ियां और मशीनें मलबे में दब गईं।
देश के लगभग 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब हो गए हैं। राजस्थान, दिल्ली-NCR, पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र में अगले 5 दिन तक बारिश की संभावना भी कम है।
बारिश रुकने से मध्य प्रदेश, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के राज्यों में तापमान बढ़ गया। राजस्थान के श्रीगंगानगर में तापमान 42°C दर्ज किया गया।
इस बीच एक अच्छी खबर आई है कि प्रशांत महासागर में 3 मौसमी सिस्टम बन रहे हैं। अगर ये बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो 18-25 जुलाई तक बारिश का एक और दौर शुरू हो सकता है।
प्रशांत महासागर में बने 3 नए वैदर सिस्टम की तस्वीर…
मानसून को सक्रिय रखने वाले सिस्टम कमजोर पड़ा
मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, देश के 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब होने के पीछे सबसे बड़ी वजह मानसून को सक्रिय रखने वाले सिस्टम का कमजोर पड़ना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी।
इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसकी वजह से मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बादल और बारिश की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं।
फिलहाल बारिश मुख्य रूप से उत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर तक सीमित है। IMD का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के फिर से एक्टिव होने की संभावना कम है।
देशभर से मौसम की तस्वीरें…
मौसम से जुड़े भास्कर के 3 कार्टून…
देशभर के मौसम के बारे में जानने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
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ऑल इंडिया वैदर के मुताबिक, 12 जुलाई के बाद भारत में मानसून कुछ दिनों के लिए कमजोर (Dry Spell) पड़ सकता है, क्योंकि इस समय तीन बड़े वैश्विक मौसमी सिस्टम एक साथ मानसून के खिलाफ काम कर रहे हैं।
इसका मतलब है कि जुलाई के पहले 10 दिन में ENSO (एल नीनो/ला नीना से जुड़ा सिस्टम) का असर मानसून के लिए बहुत अच्छा नहीं था। लेकिन MJO (मैडन-जूलियन ऑस्सिलेशन) और कुछ छोटे मौसमी सिस्टम सक्रिय थे, इसलिए भारत के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो गई।
12 जुलाई के बाद तीनों बड़े सिस्टम एक साथ मानसून के खिलाफ हो जाएंगे। यानी हिंद महासागर और प्रशांत महासागर से मानसून को ज्यादा ताकत नहीं मिल रही।
भूमध्यरेखीय रॉस्बी वेव्स भी प्रतिकूल हो गई हैं, इससे नमी और ऊर्जा भारत की ओर आने के बजाय दूसरी दिशा में जा सकती है।
MJO भी कमजोर फेज में पहुंच गया है। MJO यानी वह मौसमी लहर है जो जहां सक्रिय होती है, वहां बादल और बारिश बढ़ाती है। अभी यह भारत के लिए अनुकूल नहीं है।
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- अगले 2–3 दिनों में नॉर्थईस्ट इंडिया, वेस्ट बंगाल और बिहार में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
- अगले 4–5 दिनों में ईस्ट उत्तर प्रदेश में भी कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।
- आज मेघालय में बहुत ज्यादा बारिश होने की संभावना है।
- लोगों को सलाह दी जाती है कि वे IMD के लेटेस्ट अनुमानों से अपडेटेड रहें और लोकल अधिकारियों की जारी की गई सलाह को फॉलो करें।
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जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की सबसे बड़ी वजह हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाएं हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी हवाएं इन पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं। ऊपर जाते ही हवा ठंडी हो जाती है और उसमें मौजूद नमी तेजी से बादलों में जमा होने लगती है। इसके अलावा, संकरी घाटियां और ऊंची चोटियां बादलों को एक जगह रोक देती हैं। इससे कम क्षेत्र में बहुत ज्यादा नमी इकट्ठी हो जाती है। जब बादल इतना पानी संभाल नहीं पाते, तो अचानक बेहद तेज बारिश होती है। यही वजह है कि डोडा, किश्तवाड़, रामबन, पुंछ, राजौरी, सोनमर्ग और कश्मीर घाटी के ऊंचे इलाकों में बादल फटने की घटनाएं मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा होती हैं।
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बादल फटना का मतलब यह नहीं है कि बादल सचमुच फट जाता है। यह एक मौसम संबंधी घटना है, जिसमें बहुत छोटे इलाके में बहुत कम समय में बेहद तेज बारिश होती है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगर 20-30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में एक घंटे या उससे कम समय में 100 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो जाए, तो उसे बादल फटना कहा जाता है। ऐसा तब होता है, जब हवा में मौजूद नमी एक जगह इकट्ठी हो जाती है। खासकर पहाड़ी इलाकों में पहाड़ नमी से भरी हवाओं को आगे बढ़ने नहीं देते। नमी लगातार जमा होती रहती है और अचानक बहुत तेज बारिश के रूप में बरस जाती है।
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उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में लैंडस्लाइड हो गई। कई वाहन और मशीनें मलबे में दब गईं।
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जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के चितरगुल इलाके में नाला छोटीहाल में बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई।
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया है। नदी का पानी बढ़ने से घाट डूब गए हैं।
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जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी का वॉटर लेवल बढ़ गया। जिसके बाद सलाल डैम के कई गेट खोल दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि बांध में पानी ज्यादा होने के कारण जलस्तर नियंत्रित रखने और सुरक्षा के लिए गेट खोलकर धीरे-धीरे पानी छोड़ा जा रहा है।
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ से सड़क का एक हिस्सा बह गया।
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उत्तराखंड के ऋषिकेश में पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के बाद गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गंगा का पानी डेंजर मार्क से सिर्फ 1.10 मीटर नीचे बह रहा है, जिससे परमार्थ निकेतन का गंगा आरती स्थल डूब गया है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों से नदी से दूर रहने और घाटों पर स्नान न करने की अपील की है।
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राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ने के बाद भी शनिवार को कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहा। वहीं, आज 15 जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश सादुलपुर (चूरू) में हुई। यहां 2 इंच से ज्यादा पानी बरसा। राज्स में गर्मी-उमस बढ़ गई है। पूरी खबर पढ़ें...
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यूपी में 8 जुलाई से हो रही अच्छी बारिश के बाद अब मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत हैं। मौसम विभाग ने आज यानी रविवार को प्रदेश के 51 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। जबकि पश्चिमी यूपी में गंगा और उसकी सहायक मालन नदी उफान पर है। पूरी खबर पढ़ें...
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बिहार में 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। अगले पांच दिनों तक राज्य में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। 1 जून से 11 जुलाई तक बिहार में कुल 155.9mm बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश 288.5mm होनी चाहिए थी। इस तरह राज्य में 46% कम बारिश दर्ज की गई। पूरी खबर पढ़ें...
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उत्तराखंड के सभी जिलों में कल से रुक-रुककर बारिश जारी है। देहरादून, बागेश्वर, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल में यलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के चलते पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में लैंडस्लाइड हुई। 120 सड़कें बंद हैं। पूरी खबर पढ़ें...
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पहाड़ों में लगातार बारिश के कारण हरियाणा में नदियां उफान पर हैं, जिससे मैदानी इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल की पहाड़ियों से आ रहे पानी के चलते यमुना और मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिसकी वजह से गांवों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। पूरी खबर पढ़ें...
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पंजाब और चंडीगढ़ के 16 जिलों में आज बारिश के आसार हैं। जिसमें पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर में भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने का यलो अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि 13 से 17 जुलाई तक बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, जिससे उमस बढ़ेगी। पूरी खबर पढ़ें…
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बारिश की वापसी के लिए नए सिस्टम का इंतजारमौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून ब्रेक पूरी तरह सामान्य और अस्थायी स्थिति है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या अन्य क्षेत्रों में नया मानसूनी सिस्टम सक्रिय होगा, बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं। फिलहाल अगले कई दिनों तक लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस से राहत मिलने की संभावना कम है।
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12 जुलाई
राजस्थान, पश्चिमी मध्यप्रदेश, पाकिस्तान बॉर्डर से लगे गुजरात और आंध्र प्रदेश में हीटवेव का अलर्ट है।
बिहार, सिक्किम, असम, मेघालय और हिमालय की तराई में बसे बंगाल में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।
जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों में बारिश का यलो अलर्ट है।
13 जुलाई
छत्तीसगढ़, बिहार, ओडिशा, झारखंड, सिक्किम, बंगाल, असम, मेघालय, उत्तराखंड, मध्यप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और हिमाचल में भारी बारिश यलो अलर्ट है।
राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, पश्चिमी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में कोई चेतावनी नहीं है।
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