राम मंदिर के बाद अब राजस्थान के बुटाटी धाम में महाघोटाला! 22 करोड़ के गबन पर SDM की रिपोर्ट ने उड़ाए सबके होश
बुटाटी धाम समिति पर 22 करोड़ के गबन का आरोप राजस्थान के नागौर जिले में चतुरदास जी महाराज का प्रसिद्ध धाम है। यह धाम बुटाटी में है। मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए समिति बनी हुई है। समिति के पदाधिकारियों पर अब करोड़ों रुप…

सौजन्य से:- Navbharat Times
बुटाटी धाम समिति पर 22 करोड़ के गबन का आरोप
राजस्थान के नागौर जिले में चतुरदास जी महाराज का प्रसिद्ध धाम है। यह धाम बुटाटी में है। मंदिर के विकास और रखरखाव के लिए समिति बनी हुई है। समिति के पदाधिकारियों पर अब करोड़ों रुपए के गबन के आरोप लगे हैं। ना केवल आरोप बल्कि उपखंड अधिकारी की जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह बुटाटी और अन्य सदस्यों ने मिलकर करीब 22 करोड़ रुपए का गबन किया है। समिति पर पिछले एक साल से गंभीर आरोप लग रहे थे। इसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर अरुण पुरोहित ने डेगाना एसडीएम मोहन चौधरी के नेतृत्व में जांच कमेटी का गठन किया। जांच कमेटी ने जिला कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट सौंपी है जिसमें करीब 22 करोड़ रुपए के गबन के प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं।समिति ने कैसे कर दिया गबन?
श्री चतुरदास जी मंदिर बुटाटी की समिति ने पिछले ढाई तीन साल से चढ़ावे और खर्च का लेखा जोखा पेश करना बंद कर दिया। हालांकि समिति के पदाधिकारी कहते हैं कि उनके पास पूरा लेखा जोखा है लेकिन एसडीएम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर समिति ने भारी वित्तीय गड़बड़ियां की है। चढ़ावे में आए रुपयों का पूरा हिसाब नहीं रखा गया। सोने चांदी के आभूषण जो कि दान किए गए थे। उनका कोई हिसाब नहीं रखा गया। बड़े-बड़े भामाशाहों ने लाखों रुपए दान करके जो विकास कार्य अपने पैसों से कराए, उसे समिति ने अपना खर्चा बताते हुए बड़ा गबन कर दिया।जानिए कैसे-कैसे कारनामे किए समिति ने
- एसडीएम की जांच रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर की नई समिति ने सोने चांदी के चढ़ावे का बड़ा गबन किया। पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी और 250 ग्राम सोना था। नई समिति ने कार्यभार ग्रहण करते समय 35.5 किलो चांदी और 280 ग्राम सोना बताया। वर्तमान में मंदिर समिति के अधीन कुल 2.60 करोड़ मूल्य की संपत्ति है, लेकिन इसका कोई लेखा जोखा दर्ज नहीं है।
- समिति ने ग्राम विकास कार्यों में भारी फर्जीवाड़ा किया। बुटाटी गांव के विकास के लिए 31 लाख 37 हजार रुपए खर्च करना बताया लेकिन किन ठेकेदारों से कार्य करवाया। इसका रिकॉर्ड नहीं दिया। खर्च के जो बिल समिति की ओर से पेश किए गए, उनकी सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है क्योंकि ठेकेदारों और मजदूरों का कोई भौतिक प्रमाण नहीं है।
- मंदिर की दान पेटियों और बैंक खातों में भारी अनियमितताएं मिली है। दोनों में लाखों रुपए का अंतर पाया गया है। ग्राम सेवा सहकारी बैंक के खाते में करीब साढ़े तीन लाख रुपए और ग्रामीण बैंक खाते में करीब पौने दो लाख रुपए का अंतर पाया गया। जिससे यह साबित होता है कि चढ़ावे में लाखों रुपए का गबन किया गया है।
- मंदिर समिति ने भोजनशाला निर्माण के नाम पर भी 49.49 लाख रुपए का गबन कर दिया। भोजनशाला का निर्माण एक भामाशाह के द्वारा कराया गया था लेकिन समिति ने अपना खर्च बताते हुए फर्जी बिल पेश करके मंदिर समिति के रुपए निकाल लिए।
- समिति ने सीसीटीवी लगाने के नाम भी लाखों रुपए डकार लिए। सीसीटीवी लगाने के लिए कोई टेंडर जारी नहीं किया। एम जंक्शन सर्विसेज के नाम से 58.14 लाख रुपए का भुगतान होना दर्ज किया गया। वाउचर रानाबाई ट्रेडर्स के नाम से मिले। जांच कमेटी ने इसे भी बड़ा घोटाला होना माना है।
- गोशाला के रखरखाव और सुलभ कॉम्पलेक्स से प्राप्त किराए की राशि में भी लाखों रुपए का गबन किया गया। मंदिर समिति ने गौशाला के रखरखाव के नाम पर 17.87 लाख रुपए का खर्च दिखाया और सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर भी 31.33 लाख रुपए का खर्च बताया जबकि खर्च के कोई प्रमाण सामने नहीं आए।
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