WORLD TOURISM DAY 2026 : किले-महल देखने से आगे बढ़ा राजस्थान का पर्यटन, विदेशी सैलानी अब देसी परिवारों के साथ जी रहे यहां की जिंदगी
WORLD TOURISM DAY 2026 : किले-महल देखने से आगे बढ़ा राजस्थान का पर्यटन, विदेशी सैलानी अब देसी परिवारों के साथ जी रहे यहां की जिंदगी वर्ल्ड टूरिज्म डे पर राजस्थान में एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म के बढ़ते ट्रेंड पर ईटीवी भारत क…

सौजन्य से:- ETV Bharat
WORLD TOURISM DAY 2026 : किले-महल देखने से आगे बढ़ा राजस्थान का पर्यटन, विदेशी सैलानी अब देसी परिवारों के साथ जी रहे यहां की जिंदगी
वर्ल्ड टूरिज्म डे पर राजस्थान में एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म के बढ़ते ट्रेंड पर ईटीवी भारत के ब्यूरो चीफ अश्वनी पारीक की खास रिपोर्ट.
Published : September 27, 2026 at 11:17 AM IST
जयपुर : राजस्थान घूमने आने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए अब सिर्फ किले, महल और ऐतिहासिक स्मारक देखना ही काफी नहीं है. वे अब राजस्थान को देखने के साथ उसे जीना चाहते हैं. किसी स्थानीय परिवार की रसोई में खाना बनाना, उनके साथ बैठकर डिनर करना, पारंपरिक कपड़े पहनना, घर के रहन-सहन को समझना और लोक संस्कृति का हिस्सा बनना विदेशी पर्यटकों की यात्रा का नया अनुभव बन रहा है. पर्यटन के इसी बदलते ट्रेंड को एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म यानी अनुभव आधारित पर्यटन के रूप में देखा जा रहा है.
विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर ईटीवी भारत ने जयपुर में अमेरिका से आए आठ महिला पर्यटकों के एक दल के साथ इस नए पर्यटन अनुभव को करीब से समझा. यह दल जयपुर के एक पारंपरिक राजपूत परिवार के घर डिनर के लिए पहुंचा था, लेकिन यहां मकसद सिर्फ खाना खाना नहीं था. विदेशी मेहमानों ने भारतीय रसोई में जाकर पापड़ और जीरा आलू की सब्जी बनाना सीखा. तवा रोटी बनाने की कोशिश की और परिवार के साथ बैठकर भारतीय खान-पान और जीवनशैली को समझा.
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पर्यटक नहीं, कुछ घंटों के लिए परिवार का हिस्सा : एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म की खासियत यही है कि इसमें पर्यटक सिर्फ किसी जगह को बाहर से नहीं देखते, बल्कि वहां के जीवन का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं. जयपुर में अमेरिकी पर्यटकों के इस दल के साथ भी यही देखने को मिला. रसोई में पहुंचीं विदेशी महिलाओं ने भारतीय मसालों, खाना बनाने के तरीकों और रोटी बनाने की प्रक्रिया को समझा. इसके बाद परिवार के साथ बैठकर डिनर किया. उनके लिए पापड़ सेंकना और सब्जी बनाना, जीरा आलू बनाना या चपाती बेलना महज कुकिंग एक्टिविटी नहीं थी, बल्कि भारतीय परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखने का माध्यम था.
शिकागो से आई कॉनी ने बताया कि उन्होंने जयपुर में राजस्थानी खाना बनाने की प्रक्रिया को देखा और खुद भी उसमें हिस्सा लिया. उनके मुताबिक, भारतीय खाना बनाना आसान नहीं है, लेकिन उन्हें यह अनुभव काफी पसंद आया. कॉनी ने बताया कि भारत आने से पहले उनके मन में देश को लेकर कई तरह की शंकाएं थीं, लेकिन यहां आने के बाद उनका नजरिया बदला और भारत उनकी उम्मीदों से बेहतर अनुभव रहा. अमेरिका से आई बानी ने पहली बार अपने हाथों से चपाती बनाई. उन्होंने भारतीय व्यंजनों को स्वादिष्ट बताया और कहा कि यह अनुभव उनके लिए लंबे समय तक याद रहने वाला है.
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बाहर से सुनना और परिवार के बीच समझना अलग : विदेशी पर्यटकों के लिए स्थानीय परिवार के साथ समय बिताना भारत को समझने का एक अलग तरीका बन रहा है. राधिका, जो अमेरिका में रहती हैं, पहली बार जयपुर आई हैं. करीब 9 साल पहले वह दक्षिण भारत आ चुकी हैं. राधिका के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर भारत का अनुभव अलग है, लेकिन पूरे भारत में मेहमाननवाजी की भावना दिखाई देती है. उनके अमेरिका स्थित घर में भी भारतीय खाना बनता है और वह बेलन, चकला और भारतीय कड़ाही जैसी चीजों से परिचित हैं. इसके बावजूद राजस्थान के एक परिवार की रसोई में उसी माहौल में खाना बनाना उनके लिए नया और यादगार अनुभव रहा.
अमेरिका में बनाएंगी भारतीय खाना : शिकागो से आई लिंडा के लिए जयपुर की यह शाम सिर्फ एक डिनर भर नहीं रही. उन्हें डिनर में परोसा गया सूप पसंद आया और भारतीय रसोई में रोटी बेलने का अनुभव भी उन्हें काफी मजेदार लगा. लिंडा ने बताया कि वह जिस इलाके में रहती हैं, वहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, इसलिए वह अमेरिका लौटने के बाद भारतीय ग्रॉसरी स्टोर से जरूरी सामान खरीदेंगी और यहां सीखी रेसिपी को अपने घर में बनाएंगी. उन्होंने बताया कि अब तक उनके घर में इटेलियन खाना ज्यादा बनाया जाता था. फ्लोरिडा से आई डॉन ने भी भारत की संस्कृति और खान-पान को पसंद किया. उनके मुताबिक, यहां के लोग काफी मिलनसार लगे और स्थानीय संस्कृति को करीब से जानना अच्छा अनुभव रहा.
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'लोकल एक्सपीरियंस' अहम : पर्यटकों के इस दल को लीड कर रहे शीश मूंड का कहना था कि यही वह अंतर है, जो एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म को सामान्य पर्यटन से अलग करता है. किसी स्मारक को देखने में पर्यटक इतिहास जानता है, लेकिन किसी परिवार के घर में बैठने पर वह उस समाज के वर्तमान जीवन को समझने की कोशिश करता है. विदेशी पर्यटकों की पसंद में बदलाव दिखाई दे रहा है. अब वे स्थानीय लोगों के साथ समय बिताना और रोजमर्रा की जिंदगी को समझना चाहते हैं. उनके मौजूदा दल में आठ महिलाएं हैं. जयपुर में भारतीय परिवार के साथ डिनर और कुकिंग अनुभव के बाद उनका कार्यक्रम पुष्कर की लोक संस्कृति और मारवाड़ के रहन-सहन को समझने का है. योग, संगीत, नृत्य, कला और संस्कृति भी उनके यात्रा अनुभव का हिस्सा हैं.
संस्कृति को महसूस करने की कोशिश : इस दल की एक अन्य महिला पर्यटक भारतीय कुर्ती और सलवार पहनकर डिनर में शामिल हुईं. उन्होंने बताया कि उनके इलाके में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं और वह उनके शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में शामिल होती रही हैं. उनके पास पहले से कई भारतीय परिधान हैं और भारतीय रंग उन्हें पसंद हैं. जयपुर का आमेर दुर्ग भी उन्हें काफी पसंद आया, लेकिन इस यात्रा में उनके लिए पारंपरिक कपड़े पहनना और भारतीय परिवार के बीच समय बिताना भी उतना ही महत्वपूर्ण अनुभव रहा. यह एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म की एक और खासियत है, जहां स्थानीय संस्कृति सिर्फ देखने की चीज नहीं रहती, बल्कि पर्यटक उसे पहनावे, भोजन और रोजमर्रा की गतिविधियों के जरिए अनुभव करते हैं.
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15 साल की उम्र से भारत आने का सपना : एक अमेरिकी पर्यटक ने बताया कि वह 15 साल की उम्र से भारत आना चाहती थीं. करीब दो सप्ताह पहले भारत पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ समय अकेले यात्रा की और बाद में इस ग्रुप से जुड़ीं. उन्होंने बताया कि वह भारत से ढेरों तस्वीरें लेकर लौटना चाहती हैं. उनके पिता लेबनानी हैं और वह पांच दशक से ज्यादा समय से अमेरिका में रह रही हैं. उनके मुताबिक, भारत में करीब एक महीने बिताने का मौका उनके लिए बेहद खास है. उनके लिए भारत सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं रहा, बल्कि लोगों से मिलने और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखने का अनुभव बन गया.
भारतीय परिवार में महिलाओं की भूमिका ने भी खींचा ध्यान : एक अमेरिकी पर्यटक ने भारतीय परिवार में महिलाओं की भूमिका और परिवार के सदस्यों के बीच सहयोग को भी खास तौर पर महसूस किया. उन्होंने बताया कि मेजबान महिला एक साथ कुकिंग क्लास, बच्चे की देखभाल और घर की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं. उनके पति भी उनकी मदद कर रहे थे. उन्होंने भारतीय परिवार में कई पीढ़ियों के साथ रहने और परिवार के लिए मिलकर काम करने की भावना को खास बताया. उनके मुताबिक, यह अनुभव उन्हें भारतीय परिवारों की संरचना को करीब से समझने में मदद करता है.
सिर्फ डिनर नहीं, संस्कृति साझा करने का जरिया : मेजबान भुवनेश्वरी सिंह के मुताबिक, विदेशी मेहमान जब किसी भारतीय घर में आते हैं तो उन्हें भारत को समझने का अलग नजरिया मिलता है. घर कैसे होते हैं? परिवार कैसे साथ रहता है? क्या खाना बनाया जाता है? मेहमानों का स्वागत किस तरह किया जाता है, इन छोटी-छोटी चीजों के जरिए उन्हें भारत का वास्तविक सामाजिक जीवन देखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि पिछले साल नीदरलैंड से एक पिता और पुत्र भारत आए थे. भारत से लौटने के बाद उन्होंने यहां सीखी रेसिपी बनाकर उसकी तस्वीरें भी साझा की थी. भुवनेश्वरी के मुताबिक, ऐसे कई विदेशी मेहमानों से आज भी उनका संपर्क बना हुआ है. इस तरह की मेजबानी यात्रा खत्म होने के बाद भी एक सांस्कृतिक जुड़ाव बनाए रखती है.
विदेशी मेहमानों को घर बुलाकर संस्कृति से जोड़ रहे : मेजबान शक्ति सिंह ने बताया कि विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने की शुरुआत उनकी मां ने की थी. बाद में उन्होंने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाया. शक्ति सिंह के मुताबिक, डिनर या लंच के साथ कुकिंग का अनुभव देने का यह सिलसिला 2017 से जारी है. विदेशी मेहमानों के लिए यह एक तरह की कुकिंग क्लास जरूर है, लेकिन इसका दायरा उससे कहीं बड़ा है. इसमें भारतीय खाना, परिवार, मेहमाननवाजी और जीवनशैली एक साथ अनुभव का हिस्सा बनते हैं.
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भारत को लेकर बनी धारणाओं से अलग अनुभव : एक अन्य अमेरिकी पर्यटक ने बताया कि जब उन्हें पहली बार पता चला कि वह किसी भारतीय परिवार के घर डिनर के लिए जाने वाली हैं, तो उन्हें हैरानी हुई थी. लेकिन परिवार की मेहमाननवाजी ने उनका अनुभव बदल दिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारत को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं. भारतीय परिवार के साथ सीधे समय बिताने से उन्हें देश का एक अलग पक्ष देखने का मौका मिला. लोगों का स्वागत करने का तरीका, परिवार के सदस्यों का आपसी जुड़ाव और रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखना उनके लिए इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा.
'देखने' से 'अनुभव करने' तक का सफर : जयपुर का यह अनुभव राजस्थान में पर्यटन की बदलती तस्वीर को दिखाता है. किले और महल अब भी विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन उनके साथ स्थानीय जीवन का अनुभव भी यात्रा कार्यक्रम में जगह बना रहा है. पारंपरिक घर में खाना बनाना, परिवार के साथ बैठना, स्थानीय रेसिपी सीखना, भारतीय पहनावा पहनना, पुष्कर की लोक संस्कृति देखना, मारवाड़ के रहन-सहन को समझना और योग-संगीत-कला से जुड़ना इसी व्यापक अनुभव का हिस्सा है.
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टूरिज्म एक्सपर्ट संजय कौशिक कहते हैं कि यही एक्सपीरिएंशियल टूरिज्म का मूल स्वरूप है, जब पर्यटक किसी जगह को सिर्फ देखकर नहीं लौटता, बल्कि वहां के लोगों, खान-पान, परंपराओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी अपनी एक व्यक्तिगत कहानी लेकर लौटता है. राजस्थान में विदेशी सैलानियों के बीच बढ़ता यह रुझान पर्यटन को स्मारकों से निकालकर स्थानीय परिवारों और संस्कृति तक ले जा रहा है.
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