Bisalpur Good News: कम बारिश में भी जयपुर में जल संकट से मिलेगी राहत, बीसलपुर से बिछेगी 2,228 करोड़ की ये नई पाइपलाइन
Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर में बढ़ती आबादी ,पेयजल की बढ़ती मांग और बार-बार गहराते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार बीसलपुर बांध से जयपुर तक पानी पहुंचाने के लिए सूरजपुरा से…

सौजन्य से:- Navbharat Times
Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर में बढ़ती आबादी ,पेयजल की बढ़ती मांग और बार-बार गहराते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार बीसलपुर बांध से जयपुर तक पानी पहुंचाने के लिए सूरजपुरा से बालावाला के बीच 106 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछेगी।
जयपुर: राजस्थान में पिछले साल के मुकाबले बारिश कम हुई है। लेकिन इसी बीच ऐसी खुशखबरी सामने आई है, जो गुलाबी शहर के विकास के साथ लोगों को राहतत देने वाली है। दरअसल, जयपुर शहर में पेयजल की बढ़ती मांग और बार-बार गहराते जल संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार बीसलपुर बांध से जयपुर तक पानी पहुंचाने के लिए सूरजपुरा से बालावाला के बीच 106 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाने जा रही है। मिली जानकारी के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 2,228 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली गई है, जिसे उच्च अधिकारियों को स्वीकृति के लिए भेज दिया गया है।
जयपुर में यहां क्यों पड़ी नई पाइपलाइन की जरूरत?
सूरजपुरा से बालावाला के बीच बिछी मौजूदा 2,300 एमएम की पाइपलाइन करीब 17 साल पुरानी हो चुकी है। शहर में पानी की मांग बढ़ने से इस लाइन पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे आए दिन लीकेज की आशंका बनी रहती है, लिहाजा इस दिशा में काम कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
वर्तमान में जयपुर शहर की पेयजल स्थिति
45% हिस्सा प्रभावित: शहर की करीब 45 फीसदी आबादी लो-प्रेशर (कम दबाव) सप्लाई से परेशान है।
टैंकरों पर निर्भरता: लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए महंगे सरकारी व निजी टैंकर मंगाने को मजबूर हैं।
3 दिन में एक बार सप्लाई: पृथ्वीराज नगर फेज-द्वितीय के झोटवाड़ा, कालवाड़ रोड और निवारू रोड जैसे नए जुड़े इलाकों में लोगों को हर तीसरे दिन पानी मिल पा रहा है।
प्रोजेक्ट की मुख्य बातें और डेडलाइन भी जानें
बीसलपुर प्रोजेक्ट विंग के अनुसार, नई पाइपलाइन अगले 30 वर्षों (2058 तक) की आबादी और पानी की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है।
पाइपलाइन का साइज ( व्यास): नई लाइन 2,100 एमएम की होगी। अधिकारियों का तर्क है कि आगामी 30 वर्षों में शहर की आबादी का पीक आएगा, जिसके बाद वृद्धि दर सामान्य रहेगी।
दोहरी सप्लाई व्यवस्था: नई पाइपलाइन शुरू होने के बाद भी पुरानी लाइन से जलापूर्ति जारी रखी जाएगी, जिससे शहर को निर्बाध पानी मिल सके।
प्रोजेक्ट टाइमलाइन: वित्तीय, प्रशासनिक व तकनीकी स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। 2028 में लाइन बिछाने का काम शुरू होगा और इसे 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
2028 में शुरू होगा लाइनें बिछाने का काम
उच्च अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार सूरजपुरा से बालावाला तक नई पाइपलाइन की डीपीआर तैयार करके उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। 2028 से नई लाइन बिछाने का काम शुरू होगा, जिससे शहरवासियों के जल संकट की समस्या आने वाले दिनों में लगभग खत्म हो जाएगी।
लेखक के बारे मेंखुशेंद्र तिवारीखुशेंद्र तिवारी नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर कंटेट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में राजस्थान के लिए कवर करते हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों की राजनीति की खबरें कवर करते हैं। खुशेंद्र तिवारी पत्रकारिता की शुरुआत समाचार पत्र से की। बीते 6 सालों से डिजिटल मीडिया के लिए काम कर रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 15 सालों का अनुभव है। समाचार पत्र में पहले रिपोर्टिंग और बाद में डेस्क पर काम किया। साल 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में कार्यरत । राजस्थान की राजनीति, सामाजिक और अपराध की खबरें कवर करता हैं । डेस्क के साथ-साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है । अभी तक राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर, शिक्षा और कला जैसे विषयों पर काम किया है। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय की है। प्रिंट में काम करने के बाद पिछले छह साल से डिजिटल में नए एक्सपीरियंस के साथ लर्निंग जारी है।
विशेषता: ब्यूरोक्रेसी, पॉलिटिक्ल, आर्ट एंड कल्चर, एजुकेशन और अपराध की खबरों में विशेष दिलचस्पी है। बड़े घटनाक्रमों पर अलग-अलग एंगलों से खबरें लिखना। ओपिनियन लिखना।
पत्रकारिता का अनुभव: पत्रकारिता में कुल 15 सालों का अनुभव है। पत्रकारिता में दिलचस्पी और शुरुआत अखबारों में छोटे- छोटे लेख भेजकर की। इसके बाद इसी क्षेत्र में पोस्ट ग्रेजुएशन कर विधिवत रूप से राजस्थान पत्रिका में फील्ड रिपोर्टिंग की। सबसे पहले आर्ट एंड कल्चर, इसके बाद एजुकेशन की फील्ड में काम किया। \ रिपोर्टिंग के बाद डेस्क के अनुभव को भी समझा।... और पढ़ें
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