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400 साल पुरानी तोप की चोरी: राजस्थान पुलिस कर रही तलाश

मध्य प्रदेश के सिंधिया रियासत काल की 400 साल पुरानी चोरी हुई तोप की तलाश राजस्थान के करौली जिले में शुरू हो गई है।

Dainik Bhaskar के अनुसार23 जुलाई 2026 को 05:57 am बजे
400 साल पुरानी तोप की चोरी: राजस्थान पुलिस कर रही तलाश

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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MP से 400 साल पुरानी तोप चोरी, राजस्थान में तलाशी:पुलिस ने जेसीबी से खुदाई कराई; नरवर किले में रखी थी, 5 करोड़ है कीमत

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मध्य प्रदेश के सिंधिया रियासत काल की 400 साल पुरानी चोरी हुई तोप की तलाश राजस्थान के करौली जिले तक पहुंच गई है। यह तोप 15 जुलाई की रात को मध्य प्रदेश में शिवपुरी के नरवर किले से चोरी हुई थी।

मध्य प्रदेश पुलिस को सूचना मिली है कि इस 3500 किलो वजनी ऐतिहासिक तोप को चोर लोडिंग गाड़ी से हिंडौन (राजस्थान) लेकर गए हैं। उन्होंने इसे हिंडौन के गांवड़ा मीणा गांव में कहीं छुपा रखा है।

हिंडौन सदर थाना प्रभारी गिर्राज प्रसाद ने बताया- मध्यप्रदेश की शिवपुरी पुलिस ने हमें जानकारी दी है कि उनके पास चोरी हुई तोप के इनपुट हैं। हिंडौन पुलिस टीम ने पूरे गांवड़ा मीणा गांव में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

पुलिस और प्रशासन की टीमें जेसीबी मशीनों की मदद से कई स्थानों पर खुदाई कर रही हैं। इस अभियान में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हैं। पूरे गांव में सुरक्षा के लिहाज से पुलिस की तैनाती गई है।

पुलिस अभी आरोपियों का पता लगाने में भी जुटी है। एमपी और राजस्थान पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है। ये भी जांच का विषय है कि उस तोप को गांवड़ी गांव कब और कैसे लाया गया?

पहले देखिए सर्च की PHOTOS…

भरतपुर से पहुंची मेटल डिटेक्टर टीम

तोप की तलाश में भरतपुर से मेटल डिटेक्टर टीम भी मौके पर पहुंची। बुधवार सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक पुलिस ने संदिग्ध स्थानों पर नगर परिषद की जेसीबी मशीन से खुदाई कर तोप की तलाश की। हालांकि, तोप का कोई सुराग नहीं मिला।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3-5 करोड़ रुपए है कीमत

दरअसल, 15 जुलाई की रात को बदमाश नरवर किले की ओपन कचहरी से 16वीं शताब्दी की ऐतिहासिक तोप चुराकर ले गए। इंटरनेशनल एंटीक ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत 3-5 करोड़ रुपए हो सकती है।

चोरों ने वारदात को पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिया। तोप को पहले गद्दों में लपेटा। फिर बैरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा। इसके बाद लोडिंग गाड़ी में लादकर फरार हो गए।

नरवर किले में सुरक्षाकर्मी ड्यूटी पर तैनात नहीं थे। चोरों ने इसी का फायदा उठाया। शक है कि वारदात को इंटरनेशनल एंटीक ब्लैक मार्केट से जुड़े लोगों ने अंजाम दिया है। किले के बाहर हैवी गाड़ियों के टायर के निशान मिले हैं।

अब किले में बचीं सिर्फ 13 ऐतिहासिक तोपें

नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया राजवंश काल की कुल 14 दुर्लभ ऐतिहासिक तोपें रखी थीं। चोरी के बाद अब वहां 13 तोपें ही बची हैं। कचहरी महल का निर्माण 16वीं शताब्दी में कछवाह राजाओं ने कराया था।

इसके बाद 1925 में तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया के आदेश पर इसका जीर्णोद्धार कराया गया। यहां रखी गई सभी तोपें पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसी मिश्रित धातुओं से बनी हैं। इन पर फारसी और देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित हैं।

घटनास्थल से मिले कई अहम सुराग

मध्य प्रदेश के राज्य पुरातत्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया। जांच के दौरान घटनास्थल से गद्दे, रजाई, लोहे के पाइप और तोप को घसीटकर ले जाने के निशान मिले हैं। इसके अलावा किले के पिछले दुर्गम रास्ते पर वाहन के टायरों के निशान भी मिले हैं।

एमपी पुलिस की पूछताछ में किले के सुरक्षा गार्ड बालकिशन बाल्मीक ने बताया था- किले पर रात में रुकने की कोई व्यवस्था नहीं है। वहां न टॉर्च उपलब्ध है और न ही अन्य सुरक्षा संसाधन, इसलिए वह रात में अपने घर चला गया था।

दूसरे गार्ड शरणलाल जाटव ने भी स्वीकार किया कि घटना के समय वह ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। उसने यह भी माना कि हथियारबंद बदमाशों द्वारा लूट की जो कहानी पुलिस को बताई गई थी, वह झूठी थी।

6 गार्ड तैनात, फिर भी हो गई चोरी

नरवर किले की सुरक्षा के लिए कुल छह गार्ड तैनात हैं। इनमें चार गार्ड दिन और दो रात की ड्यूटी करते हैं। घटना वाली रात दोनों गार्ड ड्यूटी छोड़कर घर चले गए थे। इसी वजह से चोरों को ऐतिहासिक तोप चोरी करने का मौका मिल गया।

पुलिस और पुरातत्व विभाग की जांच जारी

राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने बताया कि ऐतिहासिक तोप चोरी होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। पुलिस के साथ संयुक्त जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामला बेहद गंभीर है। सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया जाएगा।

वहीं नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि जांच में सुरक्षा गार्डों की लापरवाही सामने आई है। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। साथ ही चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन और आरोपियों तक पहुंचने के लिए घटनास्थल से मिले सबूता की जांच की जा रही है।

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