होमक्राइमपत्नी का साथ रहने से इनकार और पति पर झूठा केस करना क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट
क्राइम

पत्नी का साथ रहने से इनकार और पति पर झूठा केस करना क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट

पत्नी का साथ रहने से इनकार और पति पर झूठा केस करना क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट Praveen Mishra 9 Sept 2026 4:40 PM IST राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के साथ सहवास से इनकार करना और उसके खिलाफ झूठा आपराधिक म…

Live Law Hindi के अनुसार10 सितंबर 2026 को 08:04 am बजे
पत्नी का साथ रहने से इनकार और पति पर झूठा केस करना क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट

सौजन्य से:- Live Law Hindi

पत्नी का साथ रहने से इनकार और पति पर झूठा केस करना क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट

Praveen Mishra

9 Sept 2026 4:40 PM IST

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा पति के साथ सहवास से इनकार करना और उसके खिलाफ झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराना वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने इसी आधार पर पति को तलाक की डिक्री देते हुए विवाह समाप्त कर दिया।

जस्टिस इंदरजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ फैमिली कोर्ट द्वारा पति की तलाक याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।

क्या है मामला?

पति के अनुसार, दोनों की शादी 2004 में हुई थी, लेकिन शादी की शुरुआत से ही पत्नी का व्यवहार उसके और परिवार के प्रति क्रूर था। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी आत्महत्या करने की धमकी देती थी और बाद में झूठा आपराधिक मामला दर्ज कराने की धमकी भी देती थी।

पति ने यह भी कहा कि पत्नी ने 2005 से उसके साथ सहवास करने से इनकार कर दिया था। बाद में पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज मांगने से जुड़ी धारा 498-A IPC के तहत मामला दर्ज कराया, जिसमें पति को अंततः बरी कर दिया गया।

दोनों 2010 से अलग रह रहे थे और पति के अनुसार अब साथ आने की कोई संभावना नहीं थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने शादी के एक साल बाद से सहवास न होने और पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में उसके बरी होने समेत परिस्थितियों को ध्यान में रखा।

Rakesh Raman v. Kavita और Narasimha Sastry v. Suneela Rani जैसे सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी द्वारा सहवास से इनकार और पति के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराना क्रूरता है।

कोर्ट ने कहा—

“पति और पत्नी दोनों 2010 से अलग रह रहे हैं और इस समय उनके दोबारा साथ आने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में दोनों को साथ रहने के लिए कहना, दोनों के साथ क्रूरता के समान होगा।”

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को विकृत (perverse) मानते हुए रद्द कर दिया और पति के पक्ष में तलाक की डिक्री मंजूर करते हुए विवाह को समाप्त कर दिया।

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें