आईआईटी जोधपुर के सहायक प्रोफेसर भाषाओं पर कर रहे शोध: भाषाओं में छिपे ज्ञान और व्याकरण को समझने का प्रयास, दुनिया में 7,164 बोलियां - Jodhpur News
- Hindi News - Local - Rajasthan - Jodhpur - IIT Jodhpur Research | Bhil Tribal Language Mundari Tamil Switzerland आईआईटी जोधपुर के सहायक प्रोफेसर भाषाओं पर कर रहे शोध:भाषाओं में छिपे ज्ञान और व्याकरण को समझने का प्रयास,…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Rajasthan
- Jodhpur
- IIT Jodhpur Research | Bhil Tribal Language Mundari Tamil Switzerland
आईआईटी जोधपुर के सहायक प्रोफेसर भाषाओं पर कर रहे शोध:भाषाओं में छिपे ज्ञान और व्याकरण को समझने का प्रयास, दुनिया में 7,164 बोलियां
- कॉपी लिंक
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समुदाय की परंपराओं, सामाजिक जीवन, स्थानीय ज्ञान और दुनिया को देखने के नजरिए को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजने का माध्यम भी है। इसी विषय को केंद्र में रखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) के स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स के सहायक प्रोफेसर डॉ. गुरूजेगन मुरुगेसन कम बोली जाने वाली और विरासत की भाषाओं पर शोध कर रहे हैं।
उनके शोध में मैदानी अध्ययन, भाषा का दस्तावेजीकरण, व्याकरण के अध्ययन के साथ भाषा के संरक्षण और पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शोध का उद्देश्य भाषाओं को दर्ज करने के साथ-साथ उनमें संरक्षित स्थानीय और सांस्कृतिक ज्ञान को समझना भी है।
दुनिया में करीब 7,164 भाषाएं
दुनिया में वर्तमान में करीब 7,164 भाषाएं बोली जाती हैं। इनमें लगभग 44 प्रतिशत भाषाओं को 1,000 से भी कम लोग बोलते हैं। ऐसे में इनके भविष्य में विलुप्त होने का खतरा बना हुआ है। डॉ. मुरुगेसन के अनुसार, किसी भाषा के संकट में आने का असर केवल भाषा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे जुड़ा सांस्कृतिक ज्ञान और जीवन जीने के पारंपरिक तरीके भी प्रभावित होते हैं।
ओसियां में भील समुदाय के स्थानीय ज्ञान का अध्ययन
आईआईटी जोधपुर की शोध टीम राजस्थान के ओसियां क्षेत्र में भील समुदाय के साथ मैदानी अध्ययन कर रही हैं। थार के कठिन रेगिस्तानी वातावरण में समुदाय द्वारा विकसित जीवनशैली और पारंपरिक ज्ञान को शोध का हिस्सा बनाया गया है।
घर बनाने, भोजन, पहनावे और सीमित जल संसाधनों के समझदारी से उपयोग जैसी पारंपरिक प्रथाओं का अध्ययन किया जा रहा है। शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि यह स्थानीय ज्ञान भाषा से किस तरह जुड़ा है और नई पीढ़ी में भाषा के कम होते इस्तेमाल का इस ज्ञान के हस्तांतरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
शोध टीम हर सेमेस्टर मैदानी दौरे कर भाषाई जानकारी और सांस्कृतिक ज्ञान को दर्ज करती है। इससे विद्यार्थियों को भी समुदाय की भाषा, संस्कृति और जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है।
मुंडारी की अनोखी संख्या प्रणाली बनी शोध का विषय
शोध का एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र मुंडारी भाषा है, जिसे झारखंड के मुंडा समुदायों द्वारा बोला जाता है। यह भाषा ऑस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार से संबंधित है।
शोध के दौरान जुटाए गए आंकड़ों के विश्लेषण में मुंडारी की एक विशिष्ट और दुर्लभ संख्या प्रणाली सामने आई है। इसके आधार पर शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि अलग-अलग भाषाओं में व्याकरणिक संरचनाएं किस प्रकार विकसित होती हैं और मुंडारी की यह व्यवस्था इतनी दुर्लभ क्यों है।
यह अध्ययन केवल मुंडारी की एक विशेषता को दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव भाषा की संरचना और विकास को समझने वाले सैद्धांतिक भाषाविज्ञान के लिए भी नए सवाल और संभावनाएं सामने ला रहा है।
स्विट्जरलैंड में दूसरी पीढ़ी के प्रवासियों की तमिल भाषा पर अध्ययन
डॉ. मुरुगेसन का शोध विरासत की भाषाओं (Heritage Languages) तक भी फैला हुआ है। इन भाषाओं को प्रवासी परिवार अपने घरों में इस्तेमाल करते हैं, जबकि उनके आसपास के सामाजिक वातावरण में दूसरी भाषाएं अधिक प्रचलित होती हैं।
एक सहयोगी शोध परियोजना के तहत स्विट्जरलैंड में दूसरी पीढ़ी के प्रवासी समुदाय के बीच तमिल भाषा का अध्ययन किया जा रहा है। यहां परिवारों में तमिल का इस्तेमाल होता है, जबकि व्यापक सामाजिक वातावरण में स्विस जर्मन और फ्रेंच का प्रयोग किया जाता है।
शोध में यह समझने की कोशिश की जा रही है कि बहुभाषी माहौल में पले-बढ़े बच्चों और युवाओं में विरासत की भाषा का विकास और इस्तेमाल किस तरह प्रभावित होता है। यह परियोजना स्विट्जरलैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ लॉज़ेन की प्रो. अनिता ऑयर के साथ सहयोग से की जा रही है। शोध को स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन और इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च का समर्थन प्राप्त है।
आईआईटी जोधपुर के इस शोध में मैदानी भाषाविज्ञान, सैद्धांतिक भाषाविज्ञान और समाजभाषाविज्ञान को एक साथ जोड़ा गया है। इसके जरिए भाषाओं के विकास, उनमें संरक्षित ज्ञान और समाज एवं संस्कृति के साथ उनके संबंधों को समझने की दिशा में अध्ययन किया जा रहा है।
- शहर के पर्यावरण को लेकर कोर्ट ने जताई चिंता: कोर्ट ने कहा- विकास के साथ पर्यावरण-हरियाली का संरक्षण जरूरी; जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
- जोधपुर- हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री में ब्लास्ट, 14 फायर ब्रिगेड कर्मचारी झुलसे: केमिकल से भरे ड्रम में पत्थर गिरने से धमाका; 4 की हालत गंभीर, अलग ICU बनाया
- पुष्कर में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में पार्षदों से मिले गहलोत: 6 घंटे साथ रहे, सब से वन-टू-वन संवाद किया; मेयर बनाने के लिए 7 पार्षदों की है कमी
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

यूपीएससी बोर्ड की बैठक: 9 साल बाद दिल्ली की बजाय जयपुर में हुई बैठक, आईएएस में पदोन्नति के 15 नाम लिफाफे में बंद - Jaipur News

जयपुर स्टेशन पर आयुर्वेद शिविर, 93 की जांच - Jaipur News

पंचायत चुनाव 2026: जयपुर जिला परिषद व पंचायत समिति आरक्षण लॉटरी जारी, देखें पूरी सूची


