बीएचयू: जुटेंगे देश-विदेश के इतिहासकार, राजस्थान की पुरातनता से आधुनिक परिवर्तन तक होगा मंथन; संस्कृति पर बात
बीएचयू: जुटेंगे देश-विदेश के इतिहासकार, राजस्थान की पुरातनता से आधुनिक परिवर्तन तक होगा मंथन; संस्कृति पर बात राजस्थान की पुरातनता, इतिहास, पुरातत्व, कला-संस्कृति और सामाजिक बदलाव पर 25-26 सितंबर को बीएचयू के वैदिक विज्ञ…

सौजन्य से:- Amar Ujala
बीएचयू: जुटेंगे देश-विदेश के इतिहासकार, राजस्थान की पुरातनता से आधुनिक परिवर्तन तक होगा मंथन; संस्कृति पर बात
राजस्थान की पुरातनता, इतिहास, पुरातत्व, कला-संस्कृति और सामाजिक बदलाव पर 25-26 सितंबर को बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होगी। उद्घाटन में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि होंगे। देश-विदेश के इतिहासकार, पुरातत्वविद् और विशेषज्ञ राजस्थान की ऐतिहासिक परंपरा व बदलती सांस्कृतिक यात्रा पर शोधपरक मंथन करेंगे।
विस्तार
राजस्थान के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व, कला-संस्कृति, सामाजिक संरचना और विरासत से लेकर समय के साथ हुए बदलावों पर देश-विदेश के इतिहासकार और विशेषज्ञ मंथन करेंगे। वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री की ओर से भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग एवं वित्तपोषण से ‘राजस्थान : पुरातनता और परिवर्तन’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 25 और 26 सितंबर को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित वैदिक विज्ञान केंद्र में होगा।
संगोष्ठी का उद्घाटन 25 सितंबर को सुबह 10:30 से दोपहर 12:30 बजे तक होगा। उद्घाटन समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि होंगे। प्रसिद्ध पुरातत्वविद् एवं इतिहासकार डॉ. रीमा हूजा और इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू मुख्य वक्ता के रूप में विचार रखेंगे। बेल्जियम के प्रसिद्ध भारतविद् डॉ. कोएनराड एल्स्ट और प्रसिद्ध भूगोलविद् प्रो. राणा पी.वी. सिंह विशेष आमंत्रित वक्ता के रूप में संबोधित करेंगे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के निदेशक डॉ. अभिजीत दीक्षित अध्यक्षीय उद्बोधन देंगे।
संगोष्ठी के दूसरे दिन 26 सितंबर को दोपहर एक से दो बजे तक राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर के अध्यक्ष कर्नल केसरी सिंह राठौड़ विशेष व्याख्यान देंगे। इसके बाद शाम तीन से पांच बजे तक समापन सत्र होगा। इसमें भारत सरकार के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह राणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
संगोष्ठी में राजस्थान के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व, कला-संस्कृति, सामाजिक संरचना, परंपराओं, विरासत और विभिन्न कालखंडों में हुए सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों पर शोधपरक चर्चा होगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य राजस्थान की समृद्ध ऐतिहासिक परंपरा और निरंतर बदलती सांस्कृतिक यात्रा को नए शोध एवं अकादमिक दृष्टिकोण से समझना है।
इस संबंध में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. कुलदीप कुमार मिश्र, कार्यक्रम संयोजक एमेरिटस प्रो. अरुणा सिन्हा, डॉ. जय लक्ष्मी कौल और डॉ. दरक्शा सिद्दीकी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित इतिहासकार, पुरातत्वविद्, भूगोलविद् और अन्य विषयों के विशेषज्ञ अपने शोध एवं विचार साझा करेंगे।
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