गहलोत बोले- निकाय चुनाव में हुआ पुलिस का इस्तेमाल, राजस्थान में दिखा 'बंगाल पैटर्न'
गहलोत बोले- निकाय चुनाव में हुआ पुलिस का इस्तेमाल, राजस्थान में दिखा 'बंगाल पैटर्न' गहलोत का सीएम भजनलाल पर पलटवार. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- अफसरों पर दबाव डालकर कराए गए काम. DGP की छुट्टी पर भी उठाए सवाल. Published : S…

सौजन्य से:- ETV Bharat
गहलोत बोले- निकाय चुनाव में हुआ पुलिस का इस्तेमाल, राजस्थान में दिखा 'बंगाल पैटर्न'
गहलोत का सीएम भजनलाल पर पलटवार. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा- अफसरों पर दबाव डालकर कराए गए काम. DGP की छुट्टी पर भी उठाए सवाल.
Published : September 24, 2026 at 8:37 PM IST
जयपुर: प्रदेश के निकाय चुनावों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस बयान पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस के इस्तेमाल से इनकार किया था. गहलोत ने मुख्यमंत्री के बयान को सीधे तौर पर खारिज करते हुए कहा कि इससे बड़ा 'सफेद झूठ' कोई नहीं हो सकता. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में जहां-जहां पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप की शिकायतें सामने आईं, वहां की जनता सब कुछ देख रही है.
गहलोत ने गुरुवार रात मीडिया से बातचीत में कहा कि निकाय चुनाव के दौरान राजस्थान में जो कुछ हुआ, वो अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा हुई है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में 'बंगाल पैटर्न' जैसी स्थिति देखने को मिली और कई जगह लोगों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल किया गया.
सवाल: मुख्यमंत्री ने कहा है कि निकाय चुनाव में सरकार ने पुलिस का इस्तेमाल नहीं किया?
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) September 24, 2026
जवाब: इससे बड़ा सफेद झूठ कोई हो नहीं सकता। अगर मुख्यमंत्री भजनलाल जी यह बात बोलते हैं कि पुलिस का इस्तेमाल हुआ ही नहीं है, तो मैं समझता हूँ पूरे प्रदेश के अंदर जहाँ-जहाँ पुलिस का इस्तेमाल हुआ… pic.twitter.com/9F4eM2OhN7
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान लोगों को तरह-तरह की धमकियां दी गईं. कुछ लोगों को मकान गिराने तक की धमकी दिए जाने की बातें सामने आईं. गहलोत ने कहा कि इसके बावजूद यदि मुख्यमंत्री यह कहते हैं कि पुलिस का इस्तेमाल नहीं हुआ, तो यह बात प्रदेश की जनता के सामने सरकार की स्थिति पर सवाल खड़े करती है. उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों पर भी दबाव डाला गया और कुछ अधिकारियों ने दबाव में आकर काम किया. गहलोत के मुताबिक, ऐसे समय में अधिकारियों को अपने कर्तव्य और निष्पक्षता को याद रखना चाहिए था.
बड़े अधिकारी आदेश देंगे तो नीचे के अधिकारी काम करेंगे : गहलोत ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर दूसरे अधिकारियों को कार्रवाई करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि जब कोई अधिकारी यह कहता है कि हमारे बड़े अधिकारी आदेश देंगे तो हमें काम करना पड़ेगा तो यह पूरी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रशासन और पुलिस की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए. यदि अधिकारियों पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव रहता है तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं.
DGP की चार दिन की छुट्टी पर उठाए सवाल : अशोक गहलोत ने पुलिस महानिदेशक के चार दिन की छुट्टी पर जाने को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस महानिदेशक छुट्टी पर गए हैं तो इसकी वजह भी सामने आनी चाहिए. गहलोत ने कहा कि संभव है कि उन्हें यह मालूम रहा हो कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार शिकायतें आ रही हैं और विपक्षी नेता पुलिस की कार्रवाई को लेकर जवाब मांगेंगे. उन्होंने कहा कि इसका मतलब ये है कि पूरे प्रदेश और जिलों में क्या स्थिति रही है, अगर लोग मुझसे बार-बार पूछेंगे तो मैं किस-किस का जवाब देता फिरूंगा.
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मुख्यमंत्री खुद हो गए एक्सपोज : गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री को पुलिस के इस्तेमाल से इनकार करने के बजाय यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने चुनाव के दौरान किसी कलेक्टर या एसपी को बुलाकर चुनाव के संबंध में कोई चर्चा नहीं की थी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यदि यह कहते कि मैंने किसी कलेक्टर और एसपी को चुनाव को लेकर नहीं बुलाया और कोई चर्चा नहीं की तो बात स्पष्ट होती, लेकिन केवल यह कहना कि पुलिस का इस्तेमाल नहीं हुआ, उन आरोपों का जवाब नहीं है जो अलग-अलग स्थानों से सामने आए हैं.
गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में एक बार फिर एक्सपोज हो गए हैं.
निर्दलीय पार्षदों को धमकाकर समर्थन बदलवाया : पूर्व मुख्यमंत्री ने बोर्ड गठन को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतकर आए और कांग्रेस के समर्थन से बोर्ड बनने की स्थिति बनी. कुछ निर्दलीय पार्षदों ने दबाव के चलते अपना नाम वापस ले लिया और इसके बाद भाजपा के लिए बोर्ड बनाने का रास्ता साफ हो गया.
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव परिणाम जनता के जनादेश के आधार पर आए हैं तो फिर निर्वाचित निर्दलीय पार्षदों को डराने-धमकाने की स्थिति क्यों पैदा हुई. खुद मुख्यमंत्री के गृह जिले में भरतपुर में 65 में से भाजपा के बीस सीटें आई थीं. वहां निर्दलीयों के जरिए कांग्रेस का बोर्ड बना था, लेकिन निर्दलीय पार्षदों को डराया धमकाया गया. उन्होंने अपने नाम वापस ले लिया और भाजपा का बोर्ड बन गया.
हम सत्ता में होते तो भाजपा सड़क पर तमाशा करती : गहलोत ने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं कांग्रेस सरकार के समय हुई होतीं तो भाजपा इसे लेकर पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन खड़ा करती. भाजपा जगह-जगह प्रदर्शन करती और राजस्थान बंद का आह्वान तक कर करती. उन्होंने कहा कि सत्ता में रहने वाले दल की जिम्मेदारी होती है कि वो लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखे. पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल कर चुनाव जीतने की कोशिश की गई तो इसका असर लंबे समय तक रहेगा.
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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस मुद्दे को बार-बार इसलिए उठा रहे हैं, क्योंकि यदि पुलिस और प्रशासन के हस्तक्षेप की घटनाओं की निंदा नहीं हुई तो भविष्य में इसके और गंभीर परिणाम हो सकते हैं. सभी राजनीतिक दलों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मिलकर ऐसी प्रवृत्ति का मुकाबला करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो आने वाले चुनावों में सत्ता पक्ष के हौसले और बढ़ सकते हैं. यहां भी वही होगा जो बंगाल में हो रहा है.
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