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विष्णु गुप्ता की ओर से कोर्ट में संशोधित परिवाद पेश, ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के भारत आने के दावे पर सवाल

अजमेर दरगाह विवाद के मामले में विष्णु गुप्ता की ओर से कोर्ट में नए संशोधित परिवाद पेश किए गए हैं। ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के कभी भारत नहीं आने के दावे के लिए नये साक्ष्य पेश किए गए हैं। कोर्ट में 19 सितंबर को अगली सुनवाई है।

ETV Bharat के अनुसार22 जुलाई 2026 को 01:02 pm बजे
विष्णु गुप्ता की ओर से कोर्ट में संशोधित परिवाद पेश, ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के भारत आने के दावे पर सवाल

सौजन्य से:- ETV Bharat

अजमेर दरगाह विवाद : विष्णु गुप्ता की ओर से कोर्ट में संशोधित परिवाद पेश, दिए साक्ष्य, जानिए नया मामला

ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के कभी भारत नहीं आने के दावे के दिए साक्ष्य. 'दलील उल आरफीन' की पेश. कोर्ट में क्या हुआ ? जानिए...

Published : July 22, 2026 at 5:34 PM IST

अजमेर: राजस्थान के अजमेर दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे के मामले में बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. परिवादी विष्णु गुप्ता की ओर से प्रकरण में नए तथ्य और साक्ष्य भी प्रस्तुत कर दावा किया है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती कभी भारत आए ही नहीं. ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के मुरीद ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की लिखी पुस्तक को भी कोर्ट में साक्ष्य के रूप में पेश किया.

इसके अलावा गुप्ता ने 1842 में कमिश्नर की ओर से बनाई गई समिति में शामिल लोगों के नाम भी कोर्ट को साक्ष्य के रूप में सौंपे हैं, जिनमें हिन्दू सदस्यों के नाम हैं और वे यहां व्यवस्था देखा करते थे. कोर्ट ने मामले की सुनवाई 19 सितंबर को रखी है. हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने बताया कि कोर्ट में नए संशोधित दावे के साथ साक्ष्य भी पेश किए गए. इसमें सबूत के तौर पर 1120 ईस्वी की किताब दलील उल आरफीनदलील उल आरफीन की प्रति पेश की गई. यह किताब ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती मुरीद (शिष्य) कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी ने 1120 में लिखी थी.

गुप्ता ने कहा कि किताब के मुताबिक स्पष्ट होता है कि ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती कभी भारत नहीं आए. किताब में ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी लिखते हैं कि 1120 ईस्वी में वे बगदाद की मस्जिद इमाम अबू लैस समरकंदी में शेख मोइनुद्दीन के हुजरे (निवास) में हाजिर हुआ था. गुप्ता ने कहा कि जब ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती बगदाद में थे तो वे 1142 ईस्वी में पैदा कैसे हो सकते हैं.

परिवादी विष्णु गुप्ता के वकील संदीप कुमार ने बताया कि कोर्ट ने दरगाह दीवान और खादिमों की संस्था को पक्ष कर बनने की मंजूरी पूर्व में दी है. उसी को दृष्टिगत रखते हुए संशोधित परिवाद पेश किया गया है. अगली सुनवाई में पक्षकारों को इस पर जवाब पेश करना होगा. उन्होंने बताया कि किसी अन्य वकील के साथ मामूली तनातनी हुई थी, यह हमारे आपस में बार का मामला है.

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हमें कानून पर पूरा भरोसा : महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने बताया कि संवैधानिक तौर पर लड़ाई लड़ी जा रही है, अगली तारीख 19 सितंबर को है. उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में भारतीय पुरातत्व विभाग की ओर से दरगाह में सर्वे होगा और हकीकत दुनिया के सामने आ जाएगी और शिव मंदिर के दर्शन होंगे. परमार ने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भगवान श्री राम का मंदिर बना है, उसी प्रकार से अजमेर में भी भगवान शिव का भव्य मंदिर बनेगा. हमें कानून पर पूरा भरोसा है. यह धर्म युद्ध है और इसकी लड़ाई निरंतर जारी रहेगी.

महाराणा प्रताप सेना के अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार की ओर से कोर्ट में पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील एपी सिंह ने कहा कि प्रकरण को लेकर कोर्ट में सुनवाई हुई है. पक्षकार बनने के लिए जिन लोगों ने पूर्व में अर्जियां लगाई थीं और जिन 9 जनों की अर्जियां कोर्ट ने खारिज कर दी थी, उन्होंने जुर्माना कोर्ट में जमा नहीं करवाया है. वकील सिंह ने कहा कि वकीलों में आपस में सामंजस्यता रहे और स्नेह रहे, कोर्ट में वकीलों के बीच जो हुआ वह अशोभनीय है. प्रकरण में हमें पूरी उम्मीद है कि अजमेर दरगाह नहीं यह शिव मंदिर है के मुद्दे से जल्द पर्दा उठेगा और वहां भव्य शिव मंदिर बनेगा.

कोर्ट में भारी पुलिस जाब्ता तैनात रहा : कोर्ट से सुनवाई के बाद जब परिवादी पक्ष बाहर आ रहे थे तब पुलिस का भारी जाब्ता उन्हें घेरे रखा. उन्हें तत्काल वाहनों में बिठाकर रवाना किया गया. यह मामला संवेदनशील है और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि हर सुनवाई पर पुलिस का भारी जाब्ता तैनात रहता है.

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कोर्ट में वकीलों के बीच हुई तनातनी : कोर्ट में परिवादी के वकील संदीप कुमार और एक स्थानीय वकील के बीच आपसे में कहासुनी हो गई. इससे कुछ देर के लिए माहौल गरमा गया. वहीं, स्थानीय वकील ने मामले की शिकायत स्थानीय बार को दी है.

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