गहलोत बोले, 'निकाय चुनाव में भाजपा की ओर से सरकारी मशीनरी और धनबल का खेल', बेढम ने किया पलटवार
गहलोत बोले, 'निकाय चुनाव में भाजपा की ओर से सरकारी मशीनरी और धनबल का खेल', बेढम ने किया पलटवार गहलोत ने राजस्थान निकाय चुनाव परिणामों के बाद भजनलाल सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग, परिसीमन में हेरफेर और पार्षदों की खरीद-फरोख्…

सौजन्य से:- ETV Bharat
गहलोत बोले, 'निकाय चुनाव में भाजपा की ओर से सरकारी मशीनरी और धनबल का खेल', बेढम ने किया पलटवार
गहलोत ने राजस्थान निकाय चुनाव परिणामों के बाद भजनलाल सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग, परिसीमन में हेरफेर और पार्षदों की खरीद-फरोख्त के गंभीर आरोप लगाए.
Published : September 17, 2026 at 8:07 PM IST
जयपुर: प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के परिणामों के बाद अब सभापति और उपसभापति के लिए चल रही जोर-आजमाइश के बीच पुलिस और प्रशासन के कथित दुरुपयोग के मामले को लेकर राजस्थान की सियासत गर्म है. विपक्ष लगातार इस मामले में सरकार पर हमलावर है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भजनलाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. वहीं गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि कांग्रेस ने सरकार बचाने के लिए विधायकों को खरीदा. अब लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं.
गहलोत ने कहा कि निकाय चुनाव में भाजपा ने पुलिस और सरकारी मशीनरी की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद कई बड़े निकायों में बहुमत से दूर है. गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राजस्थान के निकाय चुनाव परिणाम पर बधाई दिए जाने पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर राजस्थान में भाजपा ने ऐसा कौन सा बड़ा गढ़ जीत लिया, जिसे इतनी बड़ी जीत के रूप में पेश किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम की जमीनी तस्वीर इससे अलग है.
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चाल, चरित्र और चेहरा उजागर: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से उजागर हो चुका है. भाजपा सरकार के दौर में भ्रष्टाचार व्याप्त है और बिना पैसे के काम नहीं हो रहे हैं. गहलोत ने कहा कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कुछ पुराने लोग भी मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें ऐसी उम्मीद नहीं थी कि आगे चलकर ऐसा भी दौर देखने को मिलेगा, जब आरएसएस और भाजपा भ्रष्टाचार में सारी हदें पार कर देंगे.
दूसरे प्रदेशों के नेता भी राजस्थान भेजे गए: गहलोत ने कहा कि निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं, लेकिन भाजपा हाईकमान ने ही इस पूरे चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. प्रदेश प्रभारी से लेकर दूसरे राज्यों के मंत्री तक राजस्थान आए और रोड शो किए. उन्हें भाजपा के प्रचार और रोड शो से कोई शिकायत नहीं है क्योंकि हर पार्टी का अपना स्टैंड होता है, लेकिन इतना कुछ करने के बावजूद कई बड़े निकायों में भाजपा बहुमत से बहुत दूर है.
निर्दलीयों ने दिया बड़ा संदेश, 28 फ़ीसदी वोट अहम: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बार बड़ी संख्या में जीत कर आए निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर कहा कि बड़ी तादाद में निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीत कर आए हैं. उन्होंने 28% वोट हासिल किया है, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए एक सबक है. गहलोत ने कहा कि स्थानीय निकायों में मतदाता केवल पार्टी के नाम पर निर्भर नहीं रहा, बल्कि स्थानीय समीकरणों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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बाड़ाबंदी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं: गहलोत ने कहा कि निकाय चुनाव के बाद सब जगह पार्षदों की बाड़ाबंदी हो रही है. कांग्रेस ने भी बाड़ाबंदी की है और भाजपा ने भी बाड़ाबंदी की है. गहलोत ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पुलिस बाड़ाबंदी में घुसकर पार्षदों को उठाकर ले गई. चुनाव के बाद चुने गए पार्षदों को स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय लेने दिया जाना चाहिए. गहलोत ने कहा कि बाड़ाबंदी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है, चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र होने चाहिए. सबको अपनी मर्जी से चुनाव करने का अधिकार है.
रुपए खर्च कर सभापति बनाने की क्या जरूरत: पूर्व मुख्यमंत्री ने निकायों में सभापति और मेयर बनने को लेकर चल रही खरीद-फरोख्त की चर्चाओं पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि यदि निर्दलीय पार्षदों को धन का लालच देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था में चिंताजनक है. भाजपा सरकार के पास अभी 2 साल का कार्यकाल बाकी है, ऐसे में मेयर और सभापति बनाने के लिए दो-दो करोड़ रुपए खर्च करने की क्या जरूरत है? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जब निर्दलीय पार्षदों को करोड़ों रुपए बांटे जा रहे हैं, तो फिर सिंबल पर चुनकर आए पार्षदों के मन में भी आता है कि उन्हें पैसा क्यों नहीं दिया जा रहा है, वो भी तो पैसा खर्च करके ही चुनाव जीत कर आए हैं.
भाजपा के पास धनबल की कोई कमी नहीं: गहलोत ने कहा कि भाजपा के पास धनबल की कोई कमी नहीं है. पूरा देश जानता है कि किस प्रकार से इन्होंने देश को लूटा है और अब उस पैसे का इस्तेमाल ये लोग सरकारें गिराने तथा विधायक-सांसदों को खरीदने में कर रहे हैं. मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में चुनी हुई सरकारों को गिराया गया, वो तो राजस्थान की सरकार बच गई. इन्होंने तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसद खरीद लिए, साथ ही शिवसेना और आम आदमी पार्टी के सांसदों को भी खरीदा. जो खेल भाजपा विधायक और सांसद खरीदने में करती थी, अब उसी खेल को स्थानीय निकाय चुनाव में भी दोहरा रही है.
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जयपुर और जोधपुर में कांग्रेस को ज्यादा वोट: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा चुनाव जीतने का गुणगान कर रही है, लेकिन जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े नगर निगमों में ही कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा वोट मिले हैं. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के क्षेत्र झालावाड़ में कांग्रेस का बोर्ड बना है, मदन राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली में भाजपा बहुमत से दूर है, और अजमेर तथा बीकानेर में भी भाजपा बहुमत से दूर है.
परिसीमन को बताया सबसे बड़ा खेल: गहलोत ने निकाय चुनाव में किए गए परिसीमन को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के वोट प्रतिशत में एक प्रतिशत से भी कम का अंतर है, उसके बावजूद भी भाजपा के वार्ड ज्यादा जीत कर आए हैं. उसकी वजह यह है कि इन्होंने मनमाने तरीके से वार्डों का परिसीमन किया है. तीन-तीन वार्डों को मिलाकर एक वार्ड बना दिया, जिससे कि कांग्रेस पार्टी के पार्षद कम चुनकर आ सकें. जो परिसीमन इन्होंने असम में किया था, वही परिसीमन राजस्थान के निकायों में भी किया है. गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने परिसीमन बिल पास नहीं होने दिया था. भाजपा महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन बिल लेकर आना चाह रही थी, जबकि कांग्रेस का कहना था कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण बिल को तुरंत लागू किया जाए.
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बेढ़म ने गहलोत के आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है और इसी वजह से कांग्रेस के नेता परेशान हैं. बेढ़म ने कहा कि गहलोत को अपनी सरकार के समय की घटनाओं को भी याद करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनकी सरकार संकट में थी, तब बीटीपी के विधायकों को अपने पक्ष में करके सरकार बचाई गई. बेढ़म ने कहा कि उस समय विधायकों की बाड़ेबंदी की गई और अब वही कांग्रेस लोकतंत्र की दुहाई दे रही है.
'भ्रष्टाचार पर कार्रवाई से गहलोत तिलमिलाए': गृह राज्य मंत्री ने जल जीवन मिशन का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि गहलोत सरकार के दौरान इस योजना में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं. उन्होंने दावा किया कि मामले में तत्कालीन मंत्री और अधिकारी जांच व कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. जल जीवन मिशन के राजस्थान में क्रियान्वयन पर CAG ने भी अगस्त 2026 में प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अगस्त 2019 से मार्च 2024 तक की अवधि की समीक्षा शामिल है. बेढ़म ने कहा कि पेपर लीक के मामलों में भी भजनलाल सरकार ने कार्रवाई की है. उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में आरोपी जेल में हैं. बेढ़म ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति देने और कार्रवाई करने में सख्त रुख अपनाया है.
ट्रांसफर में पैसे लेने का मुद्दा उठाया: बेढ़म ने पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत के कार्यकाल में शिक्षकों के तबादलों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के कार्यकाल में ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर पैसे के लेन-देन की शिकायतें सामने आती थीं. बेढ़म ने गहलोत के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि शिक्षकों से पूछे जाने पर उन्होंने भी तबादलों में पैसे लिए जाने की बात कही थी. निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन को लेकर बेढ़म ने कहा कि कई स्थानों पर निर्दलीय पार्षद भाजपा को समर्थन दे रहे हैं और भाजपा के बोर्ड बन रहे हैं. उन्होंने इसे पार्षदों का स्वैच्छिक फैसला बताया. बेढ़म ने कांग्रेस पर आपसी गुटबाजी और अंतर्कलह का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई अब जनता के सामने आ गई है.
'2-2 करोड़ की खरीद-फरोख्त का आरोप पूरी तरह गलत': बेढम ने कहा कि लोकतंत्र की लूट की बात वो कर रहे हैं, जिनकी पूरी राजनीति ही बाड़ाबंदी पर टिकी है. जनता जानती है कि 2020 में किस तरह पूरी कांग्रेस सरकार को जैसलमेर के होटल सूर्यगढ़ और जयपुर के फेयरमोंट में महीनों तक बाड़ाबंदी में रखा गया था. ये हॉर्स ट्रेडिंग नहीं तो क्या था? अपनी ही सरकार को अपने ही विधायकों से बचाने के लिए रिजॉर्ट पॉलिटिक्स करना कांग्रेस की संस्कृति रही है. भाजपा में ऐसा कभी नहीं होता. भाजपा बोर्ड जनता के जनादेश से बन रहे हैं, नोटों से नहीं. कांग्रेस अपनी बाड़ाबंदी और हॉर्स ट्रेडिंग की संस्कृति को भाजपा पर थोपना बंद करे.
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