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गहलोत ने भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, कहा-संवैधानिक संस्थाओं को बना रही पंगु

अशोक गहलोत ने कहा- प्रदेश सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर माननीय हाईकोर्ट को यहां तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे.' X के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग ने छह चिट्ठियां लिखने के बावजूद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं दी गई.

ETV Bharat के अनुसार17 जुलाई 2026 को 10:15 am बजे
गहलोत ने भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, कहा-संवैधानिक संस्थाओं को बना रही पंगु

सौजन्य से:- ETV Bharat

गहलोत बोले- सरकार की चुनाव करवाने की मंशा ही नहीं, संवैधानिक संस्थाओं को बना रही पंगु

पंचायत और निकाय चुनावों में देरी पर गरमाई सियासत. पूर्व मुख्यमंत्री ने साधा निशाना.

Published : July 17, 2026 at 2:26 PM IST

जयपुर: पंचायती राज संस्थान और स्थानीय निकायों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर अब सियासी बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायती राज संस्थान और स्थानीय निकाय चुनाव में देरी को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की चुनाव करवाने की मंशा नहीं है. सरकार संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक बयान में सरकार को कटघरे में खड़ा किया. वे बोले- प्रदेश सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर माननीय हाईकोर्ट को यहां तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे.' यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है.

प्रदेश सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर माननीय हाईकोर्ट को यहाँ तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे।' यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) July 17, 2026

राज्य निर्वाचन आयोग…

छह चिट्ठियां लिखी, विभाग ने नहीं दी जानकारी : अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का यह कथन बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को 6 चिट्ठियां लिखने के बावजूद अनुसूचित जाती, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिला आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं दी गई. यह स्पष्ट दर्शाता है कि सरकार के दबाव में पंचायतीराज विभाग ने ऐसा किया और सरकार की मंशा ही चुनाव करवाने की नहीं है और वह संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है.

सरकार को सत्ता में बने रहने का अधिकार नहीं : अशोक गहलोत ने आगे कहा कि माननीय न्यायालय के आदेशों की बार-बार अवहेलना करना संविधान और न्यायपालिका का सीधा अपमान है. जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान न कर सके और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोके, उसे एक पल भी सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है. लोकतंत्र के लिए यह स्थिति बेहद घातक है.

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