नीट रिजल्ट: कानपुर और लखनऊ के कोचिंग इलाके ने कोटा की धूम धाम छीन ली!
नीट रिज़ल्ट: कानपुर और लखनऊ के कोचिंग इलाके ने कोटा की धूम धाम छीन ली! कोटा में रहने और पढ़ाई पर खर्च होने वाली राशि 2.5 से 3 लाख रुपये है, जबकि कानपुर और लखनऊ में यह राशि 50,000 से 80,000 रुपये तक ही होती है। कोटा की बारीकी न होने के कारण छात्रों को अपनी तैयारी पूरी करने के लिए अधिक समय लगता है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
नीट रिजल्ट में यूपी का दबदबा, क्यों फीकी पड़ी कोटा की चमक?
विशेषज्ञ बोले- कोटा में छात्रों की भीड़, काकदेव में कोचिंग सेंटर्स का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : July 17, 2026 at 5:00 PM IST
|Updated : July 17, 2026 at 5:16 PM IST
कानपुर: हाल ही में नीट यूजी 2026 (री-एग्जाम) के परिणाम जारी हुए हैं. इस बार के परिणाम अप्रत्याशित रहे हैं. उत्तर प्रदेश से 1.7 लाख से अधिक अभ्यर्थी मेडिकल काउंसलिंग के लिए योग्य घोषित किए गए हैं. वैसे तो नीट रिजल्ट में कोटा का हमेशा से दबदबा रहा है, लेकिन यूपी के काकादेव ने धारणा बदल दी है. कानपुर में काकदेव हिंदी माध्यम और मध्यवर्गीय छात्रों का गढ़ बन चुका है. इसी तरह लखनऊ का कपूरथला और हजरतगंज कोचिंग चेन का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है. आइए जानते हैं, इस बदलाव के पीछे क्या रही मुख्य वजह और कैसे यूपी के ये इलाके परीक्षाओं की तैयारी के नए हब बनते जा रहे हैं. समीर दीक्षित की रिपोर्ट...
'काकादेव और कपूरथला'
कानपुर का 'काकादेव' हिंदी माध्यम और मध्यवर्गीय छात्रों का गढ़ बन चुका है. यह इलाका इसके पहले पिछले दो दशकों से आईआईटी-जेईई के लिए मशहूर था, लेकिन पिछले 5 वर्षों में यह शुद्ध रूप से नीट हब में तब्दील हो चुका है. काकादेव के कोचिंग संस्थान 'व्यक्तिगत ध्यान' (Personal Attention) और स्थानीय भोजपुरी/अवधी/हिंदी मिश्रित भाषा में जटिल मेडिकल कॉन्सेप्ट्स समझाने के लिए जाने जाते हैं. कोटा में रहने और पढ़ाई पर सालाना 2.5 से 3 लाख रुपये खर्च बैठता है, वहीं काकादेव में स्टूडेंट्स 50,000 से 80,000 रुपये के कुल खर्च में साल भर तैयारी कर लेते हैं. यहां के पीजी (PG) और मेस का खर्च भी बेहद किफायती है.
लखनऊ का 'कपूरथला और हजरतगंज
राजधानी लखनऊ का कपूरथला चौराहा अब कॉर्पोरेट और प्रीमियम कोचिंग चेन का मुख्य केंद्र बन चुका है. लखनऊ ने "हाइब्रिड मॉडल" को सबसे तेजी से अपनाया है. बड़े ब्रांड्स ने यहां अपने विशाल सेंटर खोले हैं. छात्र सुबह ऑफलाइन क्लास लेते हैं और रात में ऐप के जरिए डाउट क्लियर करते हैं. अकेले कपूरथला और हजरतगंज के सेंटर्स में इस समय 40,000 से अधिक नीट एस्पिरेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से पूर्वांचल (गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़) के छात्रों की संख्या सबसे अधिक है.
कोटा से क्यों बेहतर
काकदेव में एक नामचीन कोचिंग संस्थान के विशेषज्ञ आशीष सिंह ने इसकी वजह बताते हैं. कहते हैं, कोटा में छात्रों की संख्या बहुत अधिक है. वहां के क्लासरूम में छात्रों की संख्या 150 तक रहती है. किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के लिए एक दिन में सफलता नहीं मिल सकती. कम से कम दो सालों का समय छात्रों को चाहिए होता. जबकि वहां पर प्रेशर बहुत अधिक है. अगर छात्रों को तैयारी संबंधी जानकारी अपने शहर में मिले, छोटे क्लासरूम में मिले तो उसे पाठ्यक्रम जल्दी तैयार होगा. वह बेहतर प्रदर्शन भी कर सकेगा. कानपुर के काकादेव में अब जो संस्थाएं छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रही हैं, उनका इंफ्रास्ट्रक्चर इसी तरह से बना है, जो छात्रों को कई सहूलियतें देता है. नीट के परिणाम में हिंदी भाषा छात्रों की दर में कोई उछाल पर आशीष सिंह कहते हैं, सफलता के लिए भाषा की कोई भूमिका नहीं होती. यह पूरी तरह से निर्भर करता है, छात्रों पर. अभी तक जो परिणाम देखने को मिला, उसमें हिंदी भाषा वाले छात्रों का प्रदर्शन शानदार रहा. वहीं, इस साल हिंदी भाषा के छात्रों का प्रतिशत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा है, जिन्हें सफलता मिली.
लक्ष्य को मिली एआईआर 230: कानपुर में किदवई नगर निवासी लक्ष्य अग्रवाल ने नीट के री एग्जाम में कानपुर से 230वीं रैंक हासिल की है, जिसे सर्वश्रेष्ठ होने का दावा किया गया. ईटीवी भारत संवाददाता से बातचीत में लक्ष्य ने कहा, अगर नीट की परीक्षा में पहले प्रयास में सफलता हासिल करनी है तो उसके लिए कोचिंग जरूरी है. इससे आपको पेपर का पैटर्न समेत अन्य जानकारियां मिलती हैं. लक्ष्य ने बताया कि वे कॉर्डियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं. लक्ष्य ने कहा कि वह एम्स जोधपुर या दिल्ली के किसी कॉलेज से अपनी आगे की पढा़ई करेंगे. लक्ष्य के पिता डॉ. रोहित अग्रवाल व माता डॉ. तृप्ति मिश्रा कानपुर में अस्पताल का संचालन करते हैं.
नीट का हब बना काकादेव: कानपुर के काकादेव क्षेत्र में कई ऐसे कोचिंग संचालक हैं, जो छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराते हैं. कोचिंग संचालकों का कहना है कि काकादेव कई मायनों में छात्रों के लिए मददगार साबित हो रहा है. पिछले पांच सालों में इस क्षेत्र की तस्वीर देखें तो दो दशकों पहले तक जो काकादेव आईआईटी-जेईई के मशहूर था, वहां अब नीट के लिए हब विकसित हो चुका है. कानपुर के इस काकादेव में कानपुर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, जालौन, इटावा, औरैया, बांदा, चित्रकूट, उरई, झांसी फतेहपुर समेत अन्य आसपास के शहरों से छात्र पढ़ाई करने आते हैं. कोटा जैसे शहर में जहां छात्रों को अपनी तैयारी के दौरान सालाना ढाई से तीन लाख रुपयेे खर्च करने पड़ते हैं, वहीं कानपुर के काकादेव में छात्र 50 से 80 हजार रुपये सालाना खर्च में अपनी तैयारी कर सकते हैं.
रिजल्ट पर एक नजर
- पूरे भारत के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से सबसे ज्यादा सफल छात्र उत्तर प्रदेश से हैं.
- उत्तर प्रदेश से 1.7 लाख से अधिक अभ्यर्थी मेडिकल काउंसलिंग के लिए योग्य घोषित किए गए हैं.
- देश भर में कुल 11.21 लाख छात्र पास हुए हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश से आता है.
यूपी के टॉपर
आर्यन दुबे : इस वर्ष नीट परीक्षा में आर्यन दुबे ने 99.99965 परसेंटाइल और ऑल इंडिया रैंक (AIR) 7 के साथ उत्तर प्रदेश में पहला स्थान (State Rank 1) हासिल किया है.
शीर्ष 17 रैंक में जगह: देश के टॉप 17 रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों (जिन्होंने 705 से अधिक अंक प्राप्त किए) में उत्तर प्रदेश के छात्र भी शामिल हैं.
बता दें कि नौ मई को हुई परीक्षा को पेपर लीक के आरोपों के बीच एनटीए ने 12 मई को रद्द कर दिया था. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है. यह परीक्षा दोबारा 21 जून को आयोजित की गई.पिछले साल नतीजे 25 जून को घोषित किए गए थे.
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