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राजस्थान: अब बिना 'लैब क्लीयरेंस' सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नहीं दी जाएगी स्थानीय दवाएं, जानें वजह

कोटा और बीकानेर में सिजेरियन के बाद प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। अब सरकारी अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाएं बिना लैब क्लीयरेंस के मरीजों को नहीं दी जाएंगी। जयपुर: कोटा और बीकानेर…

Navbharat Times के अनुसार27 जून 2026 को 06:24 am बजे
राजस्थान: अब बिना 'लैब क्लीयरेंस' सरकारी अस्पतालों में मरीजों को नहीं दी जाएगी स्थानीय दवाएं, जानें वजह

सौजन्य से:- Navbharat Times

कोटा और बीकानेर में सिजेरियन के बाद प्रसूताओं की मौत पर स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। अब सरकारी अस्पतालों में स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाएं बिना लैब क्लीयरेंस के मरीजों को नहीं दी जाएंगी।

जयपुर: कोटा और बीकानेर में सिजेरियन के बाद लगातार हुई प्रसूताओं की मौत और जोधपुर में सामने आए गंभीर मामलों ने राजस्थान के चिकित्सा महकमे को हिलाकर रख दिया है। इस गंभीर लापरवाही और बिना टेस्टिंग वाली दवाओं के इस्तेमाल पर किए गए खुलासे के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के सभी सरकारी चिकित्सा संस्थानों द्वारा स्थानीय स्तर पर खरीदी जाने वाली दवाओं के इस्तेमाल पर तब तक पूरी तरह से रोक लगा दी है, जब तक उन्हें लैबोरेट्री से 'क्लीयरेंस' नहीं मिल जाता।

'क्वारंटाइन' होंगी दवाएं, सीधे मरीजों पर इस्तेमाल बैन

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं की हर नई खेप को सबसे पहले 'क्वारंटाइन' किया जाएगा। यानी इन दवाओं को तब तक अलग सुरक्षित रखा जाएगा, जब तक कि वे मानक गुणवत्ता के पैमानों पर खरी नहीं उतर जातीं।

इन दवाओं के रैंडम सैंपल तुरंत 'राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला' या किसी मान्यता प्राप्त NABL लैब में फास्ट-ट्रैक टेस्टिंग के लिए भेजे जाएंगे।

इस पूरी टेस्टिंग प्रक्रिया और खर्चों के लिए वेंडर को किए जाने वाले भुगतान राशि का 1% से 1.5% हिस्सा आवंटित किया जाएगा।

घटिया दवा दी तो वेंडर बैन, गड़बड़ी हुई तो अधिकारी खुद भुगतेंगे

सरकार ने इस बार केवल नियमों का कागज नहीं भरा है, बल्कि जवाबदेही भी तय कर दी है। यदि टेस्टिंग के दौरान कोई भी दवा 'घटिया या अमानक' पाई जाती है, तो वेंडर का भुगतान तुरंत रोक दिया जाएगा। यही नहीं, राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता नियम, 2013 के तहत उस वेंडर को ब्लैकलिस्ट (प्रतिबंधित) भी किया जा सकता है।

सबसे बड़ा हंटर अधिकारियों पर चला है। दवा खरीद या बजट प्रबंधन में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाई गई, तो आहरण एवं वितरण अधिकारी और खरीद समिति के सदस्य व्यक्तिगत रूप से इसके जिम्मेदार होंगे और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ड्रग कंट्रोलर की हर महीने होगी सरप्राइज एंट्री

सिस्टम को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए अब स्टेट ड्रग कंट्रोलर हर महीने सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का औचक निरीक्षण करेंगे। वे न केवल स्थानीय स्तर पर खरीदी गई दवाओं के स्टॉक और रखरखाव की जांच करेंगे, बल्कि टेस्टिंग के लिए खुद रेगुलेटरी सैंपल भी कलेक्ट करेंगे।

गौरतलब है कि राज्य सरकार की मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत आवश्यक दवा सूची की सभी दवाएं मुफ्त मिलती हैं, जिनकी खरीद RMSCL करती है। लेकिन, स्टॉक न होने पर अस्पतालों को बजट का 10% स्थानीय स्तर पर खरीदने की छूट थी, जिसका दुरुपयोग मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा था। अब इस नए 'लैब क्लीयरेंस' एंगल से उम्मीद है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मिल रहा 'खतरा' टल सकेगा।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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