राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर WHO की नजर, नकली इंजेक्शन के शक में केंद्र ने राज्य सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट - Vibes Of India
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दखल के बाद राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और तबीयत बिगड़ने का मामला अब गरमा गया है। इन घटनाओं में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए WHO ने भारत सर…

सौजन्य से:- Vibes Of India
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दखल के बाद राजस्थान में सिजेरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की मौत और तबीयत बिगड़ने का मामला अब गरमा गया है। इन घटनाओं में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के इस्तेमाल की आशंका जताते हुए WHO ने भारत सरकार से जानकारी मांगी थी। इसके बाद हरकत में आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राजस्थान सरकार से इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल आमतौर पर प्रसव पीड़ा शुरू करने और डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है। लेकिन राजस्थान के कई सरकारी अस्पतालों में सी-सेक्शन सर्जरी के बाद महिलाओं में भारी रक्तस्राव और गंभीर जटिलताएं देखी गईं। कुछ मामलों में प्रसूताओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है।
इस सिलसिले में सबसे ताजा मामला 20 जून का है। जोधपुर के पावटा स्थित जिला सरकारी अस्पताल में सी-सेक्शन के बाद आठ महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इनमें से दो गंभीर मरीजों को एम्स जोधपुर रेफर किया गया, हालांकि अब सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। इससे पहले बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सर्जरी के बाद छह महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी, जिनमें से दो की मौत हो गई।
सबसे भयानक वाकया मई में कोटा के न्यू मेडिकल गवर्नमेंट अस्पताल में सामने आया था, जहां पांच महिलाओं ने दम तोड़ दिया। वहां 40 से अधिक दिन बीत जाने के बाद भी पांच अन्य महिलाएं अस्पताल में भर्ती हैं और किडनी फेल होने के कारण उन्हें लगातार डायलिसिस से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि, राज्य के अधिकारियों ने इन मौतों के बीच किसी भी तरह के सीधे संबंध से फिलहाल इनकार किया है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए देश के शीर्ष औषधि नियामक (CDSCO) और राज्य सरकारों ने कड़ी कार्रवाई की है। जून के पहले सप्ताह में पंजाब और हिमाचल प्रदेश स्थित जैक्सन लेबोरेटरीज की निर्माण इकाइयों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। यही कंपनी उस ऑक्सीटोसिन दवा की निर्माता है जिस पर राजस्थान में सवाल उठ रहे हैं। निरीक्षण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद इन इकाइयों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं।
जांच दल को पता चला कि जैक्सन लेबोरेटरीज ने राज्य नियामकों के 2023 के उस आदेश का भी उल्लंघन किया था, जिसमें अस्वच्छ परिस्थितियों के कारण कई दवाओं का उत्पादन रोकने को कहा गया था। अब कंपनी को उन सभी दवाओं को बाजार से वापस मंगाने का आदेश दिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, राजस्थान भेजी गई ऑक्सीटोसिन की खेप में टेस्टिंग डेटा से छेड़छाड़ के भी कई सबूत मिले हैं। कंपनी दवा की शुद्धता से जुड़े प्रमुख परीक्षणों का कच्चा डेटा भी पेश नहीं कर सकी। इसके अलावा, जिस ऑक्सीटोसिन को 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाना चाहिए था, उसे 27 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया गया था।
दूसरी ओर, राजस्थान के औषधि नियंत्रण विभाग ने मंगलवार को कोटा स्थित थोक वितरक ‘राजस्थान मेडिकल हॉल’ का लाइसेंस रद्द कर दिया है। 19 मई को औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी देवेन्द्र कुमार गर्ग के नेतृत्व में हुए निरीक्षण में पाया गया कि फर्म के पास न तो अनिवार्य रजिस्टर था और न ही मौके पर कोई योग्य फार्मासिस्ट मौजूद था।
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि फर्म ने जैक्सन लेबोरेटरीज से ‘टोसिन 1 एमएल’ इंजेक्शन की केवल 9,300 इकाइयां खरीदी थीं, लेकिन उसी बैच के 10,050 इंजेक्शन बेच दिए। जब नोटिस देकर फालतू बेचे गए इंजेक्शनों का हिसाब मांगा गया, तो वितरक ने जैक्सन लेबोरेटरीज का एक पत्र दिखाते हुए दावा किया कि 750 अतिरिक्त इंजेक्शन बस के जरिए अलग से भेजे गए थे। औषधि नियंत्रण विभाग ने इस स्पष्टीकरण को पूरी तरह से असंतोषजनक मानकर खारिज कर दिया है।
बाद में जब राजस्थान की ड्रग टेस्टिंग लैब ने इस बैच की जांच की, तो यह दवा पूरी तरह से नकली साबित हुई क्योंकि इसमें ऑक्सीटोसिन का कोई अंश ही मौजूद नहीं था। मामले में WHO द्वारा संपर्क किए जाने पर एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह वैश्विक निगरानी तंत्र का एक नियमित हिस्सा है।
संगठन केवल यह जानना चाहता है कि क्या यह समस्या किसी एक स्थान तक सीमित है या अन्य जगहों पर भी इसका कोई संभावित जोखिम हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि मामले की आगे की जांच जारी है और प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर जल्द ही कुछ अन्य सख्त कदम भी उठाए जाएंगे।
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