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अजमेर जेएलएन अस्पताल ने रचा इतिहास, पित्त की नली में चोट का पहली बार लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन

अजमेर जेएलएन अस्पताल ने रचा इतिहास, पित्त की नली में चोट का पहली बार लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन डाक्टर ने बताया कि बार-बार सर्जरी होने से पेट के अंदर अंग आपस में चिपक जाते हैं. इससे अगला ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण हो जाता है. Publis…

ETV Bharat के अनुसार24 सितंबर 2026 को 12:05 pm बजे
अजमेर जेएलएन अस्पताल ने रचा इतिहास, पित्त की नली में चोट का पहली बार लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन

सौजन्य से:- ETV Bharat

अजमेर जेएलएन अस्पताल ने रचा इतिहास, पित्त की नली में चोट का पहली बार लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन

डाक्टर ने बताया कि बार-बार सर्जरी होने से पेट के अंदर अंग आपस में चिपक जाते हैं. इससे अगला ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

Published : September 24, 2026 at 4:22 PM IST

अजमेर: संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू (जेएलएन) अस्पताल ने पित्त की नली में चोट का पहली बार लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन करके इतिहास रच दिया है. राजस्थान के किसी भी मेडिकल कॉलेज में इस तरह की लेप्रोस्कोपी सर्जरी पहले कभी नहीं हुई है. इससे पहले ओपन सर्जरी से ही रोगी का इलाज किया जाता रहा है. अब इससे ओपन सर्जरी की जटिलताएं और रिस्क के साथ देरी से मरीज के ठीक होने की स्थिति से राहत मिलेगी.

पूर्व सर्जरी में फंसी क्लिप को भी निकाला: जेएनएल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनिल सामरिया ने बताया कि सर्जरी विभाग में प्रोफेसर डॉ अनिल के शर्मा और उनकी टीम ने तीन जटिल ऑपरेशन किए हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बाइल डक्ट इंजरी का लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन रहा है. दूसरी सर्जरी भी अत्यधिक चुनौतीपूर्ण थी जिसमें मरीज के पेट की पूर्व में सर्जरी होने के बाद अंग आपस में बुरी तरह से चिपक गए थे, जिन्हें लेप्रोस्कोपी सर्जरी के माध्यम से छुड़वाया गया. दूसरी सर्जरी में टाइप ई बाइल डक्ट (पित्त की नली कटने) को रिपेयर किया गया. साथ ही पूर्व सर्जरी में फंसी क्लिप को भी निकाला गया.

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प्राइवेट में खर्च 10 लाख, मां योजना में हुआ फ्री: अस्पताल अधीक्षक डॉ अरविंद खरे ने बताया कि लेप्रोस्कोपी से अनेक प्रकार के ऑपरेशन किए जाने लगे हैं. इससे पहले ओपन सर्जरी हुआ करती थी. मरीज को इसमें लंबा स्टे (अस्पताल में रुकना) करना पड़ता था. हाल ही में सर्जरी विभाग ने जटिल सर्जरी की है जिसमें रोगी को पीलिया हो गया था और पित्त नली में रुकावट आ रही थी. सामान्यतः इस तरह की सर्जरी ओपन होती है. ऐसा राजस्थान में पहली बार हुआ है जब लेप्रोस्कोपी से महिला मरीज की सर्जरी की गई है. डॉ खरे ने बताया कि इस तरह की सर्जरी का किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में 10 लाख रुपए का खर्चा आता है. यह तीनों सर्जरी मुख्यमंत्री आयुष योजना के तहत निशुल्क की गई. चारों ही मरीज स्वस्थ हैं. इनमें से दो मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है. जबकि दो मरीज अस्पताल में उपचारत हैं.

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बार बार ऑपरेशन से हुई जटिलता : केस 1: प्रोफेसर डॉ शर्मा ने बताया कि किशनगढ़ क्षेत्र में रहने वाली 39 वर्षीय महिला का गॉलब्लैडर का पहले कहीं ऑपरेशन हुआ था. महिला रोगी के सूजन अधिक होने और अंग आपस में चिपकने के कारण पित्त की नली को गंभीर चोट आई थी. जिससे सर्जरी को बीच में ही पेट खोलकर करना पड़ा. स्थिति जटिल होने पर मरीज रेफर करके उनके पास लाया गया. उन्होंने बताया कि मरीज का आपातकालीन ऑपरेशन कर पित्त निकला गया. साथ ही ड्रेन पाइप भी सर्जरी के दौरान लगाया गया. इसके अलावा ऊतकों (टिशु) की खराब स्थिति के कारण तुरंत रिपेयर भी संभव नहीं था. लिहाजा कुछ महीनों के बाद, चिपकने के कारण पित्त का बहाव फिर रुक गया.

दूरबीन से किया मरीज का ऑपरेशन: डॉ शर्मा ने बताया कि मरीज को लगातार पीलिया, आंखों में पीलापन, 3 महीने से तेज खुजली की शिकायत थी. पित्त निकालने के लिए जयपुर के एक अस्पताल में पेट के रास्ते विशेष नाली भी लगाई गई थी. मरीज को वापस जेएलएन अस्पताल रेफर करके लाया गया. जहां दूरबीन से मरीज का ऑपरेशन किया गया. उन्होंने बताया कि पुराने ऑपरेशन होने के कारण लिवर, पेट की दीवार, छोटी–बड़ी आंत और झिल्ली आपस में चिपक गए थे. सर्जरी से पित्त की नली और हाथ के बीच बने असामान्य जोड़ को हटाकर एक नया रास्ता बनाया गया. लेप्रोस्कोपी से की गई सर्जरी से मरीज को तकलीफ कम हुई और रिकवरी भी काफी जल्दी और अच्छी रही.

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पित्त की नली पूरी तरह से कटी: केस 2. : भीलवाड़ा की 55 वर्षीय महिला मरीज की ओपन गॉलब्लैडर सर्जरी हुई थी. इसके बाद पित्त की नली पूरी तरह से कट गई. हाथ और पित्त की नली के बीच एक असामान्य रास्ता बन गया. मरीज को चार से पांच दिनों से लगातार पेट दर्द, भारीपन, जी मिचलाना, उल्टी और ड्रेन पाइप में हरा पीला पदार्थ आने की शिकायत हो रही थी. भीलवाड़ा से उन्हें विशेषज्ञ सर्जन की सलाह पर अजमेर जेएलएन अस्पताल के लिए रेफर किया गया था. मरीज की एमआरआई करवाई गई. साथ ही उन्हें पोषण देकर उनकी स्थिति को स्थिर किया गया. 29 नवंबर, 2025 को दूरबीन से हुए उनके ऑपरेशन के बाद अंगों के चिपकाव को हटाया गया. साथ ही असामान्य रास्ते को बंद कर दिया गया एवं हाथ के एक हिस्से को पित्त की नली से जोड़कर नया रास्ता बनाया गया. प्रोफेसर डॉ अनिल के शर्मा बताते हैं कि ई2 और ई3 इंजरी अत्यधिक जटिल होती है और अमूमन पेट खोलकर इसकी सर्जरी की जाती है.

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गॉलब्लैडर के पूर्व ऑपरेशन में मरीज के भीतर रह गई थी क्लिप: केस 3-4. : उन्होंने बताया कि अजमेर निवासी 23 वर्षीय महिला और किशनगढ़ के पास रुपनगर की 40 वर्षीय महिला मरीज के पूर्व में हुए गॉलब्लैडर ऑपरेशन के दौरान टाइप ई बाइल इक्ट (पित्त की नली) पूरी तरह कटी हुई थी. इस कारण मरीज के आंखों और शरीर में पीलापन, गहरे रंग का पेशाब आने, पेट के दाहिने हिस्से में दर्द और लगातार परेशानी हो रही थी. दोनों ही मरीजों का ऑपरेशन लेप्रोस्कोपी से किया गया. अजमेर निवासी 23 वर्षीय महिला की पूर्व में हुई सर्जरी में लगाई गई एक सर्जिकल क्लिप भी पित्त की नली में फंसी रह गई थी, जो समस्या का मुख्य कारण थी. डॉ शर्मा ने बताया कि उत्तकों और पित्त की नली को सुरक्षित रखते हुऎ क्लिप को बाहर निकाला गया और ड्रेनएज की व्यवस्था की गई. लेप्रोस्कोपी सर्जरी के बाद दोनों ही मरीजों में सुधार है और वह अभी अस्पताल में उपचाररत हैं.

एक्सपर्ट व्यू : बातचीत में डॉ अनिल के शर्मा ने बताया कि बार-बार सर्जरी होने से पेट के अंदर अंग आपस में चिपक जाते हैं. इससे अगला ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. उन्होंने बताया कि यदि गॉलब्लैडर के ऑपरेशन के बाद मरीज को आंखों या शरीर में पीलापन, पेशाब का रंग गहरा आने लगे या फिर लगातार पेट में दर्द, उल्टी, बुखार या लंबे समय तक खुजली जैसी समस्या महसूस होने लगे, तो इसको हल्के में नहीं ले समय पर विशेषज्ञ से उपचार ले.

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