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राजस्थान में माताओं की मौत के बाद केंद्र का बड़ा एक्शन, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के लाइसेंस रद्द

राजस्थान में माताओं की मौत के बाद केंद्र का बड़ा एक्शन, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के लाइसेंस रद्द यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और संबंधित राज्य दवा नियामकों के संयुक्त निरीक्षण के बाद…

ETV Bharat के अनुसार27 जून 2026 को 05:25 am बजे
राजस्थान में माताओं की मौत के बाद केंद्र का बड़ा एक्शन, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के लाइसेंस रद्द

सौजन्य से:- ETV Bharat

राजस्थान में माताओं की मौत के बाद केंद्र का बड़ा एक्शन, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के लाइसेंस रद्द

यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और संबंधित राज्य दवा नियामकों के संयुक्त निरीक्षण के बाद की गई है. गौतम देबरॉय की रिपोर्ट.

Published : June 26, 2026 at 8:47 PM IST

नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने जैक्सन लैबोरेट्रीज (Jackson Laboratories) के पंजाब और हिमाचल प्रदेश में स्थित उसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लाइसेंस रद्द कर दिए हैं. यह कार्रवाई केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और संबंधित राज्य दवा नियामकों के संयुक्त निरीक्षण के बाद की गई है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को ईटीवी भारत को बताया कि यह कार्रवाई राजस्थान की उस घटना की जांच के बीच हुई है, जिसमें मीडिया रिपोर्टों ने कंपनी द्वारा बनाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन को माताओं की मौत से जोड़ा है. अधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने घटना से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए राजस्थान सरकार से भी एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के राज्य दवा नियामकों के साथ मिलकर 'गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज' के पालन का मूल्यांकन करने के लिए जैक्सन लैबोरेट्रीज की विनिर्माण इकाइयों का विस्तृत निरीक्षण किया. इस निरीक्षण के दौरान पाई गईं कमियों और संयुक्त निरीक्षण टीमों की सिफारिशों के आधार पर, संबंधित राज्य लाइसेंसिंग अधिकारियों ने इन इकाइयों के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं.

अधिकारियों ने कहा कि यह नियामक कार्रवाई दवा क्षेत्र में गुणवत्ता और विनिर्माण मानकों के उल्लंघन के खिलाफ सरकार के 'जीरो-टॉलरेंस' रुख को दर्शाती है. इस मामले की आगे की जांच जारी है, और चल रही जांच के निष्कर्षों तथा लागू नियामक प्रावधानों के अनुसार अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी.

इस बीच, राजस्थान की घटना के संबंध में जैक्सन लैबोरेट्रीज द्वारा बनाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का हवाला देने वाली मीडिया रिपोर्टों के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी भारत सरकार से अतिरिक्त जानकारी मांगी है. हालांकि, मंत्रालय के सूत्रों ने साफ किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह संपर्क वैश्विक फार्माकोविजिलेंस (दवा सुरक्षा निगरानी) और नियामक निगरानी प्रणाली का एक सामान्य हिस्सा है.

एक अधिकारी ने कहा, "यह संगठन नियमित रूप से राष्ट्रीय नियामक अधिकारियों से जानकारी मांगता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ऐसी घटनाएं किसी खास स्थान तक ही सीमित हैं या उन अन्य देशों पर भी इसका कोई असर हो सकता है जहां इस उत्पाद की सप्लाई की गई हो."

अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि डब्ल्यूएचओ के इस अनुरोध को उत्पाद या निर्माता के खिलाफ कोई निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि यह संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों के मूल्यांकन की एक मानक अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया का हिस्सा है. अधिकारी ने आगे कहा, "मंत्रालय फिलहाल राजस्थान सरकार की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जबकि नियामक अधिकारी इस मामले की जांच लगातार कर रहे हैं."

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