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कोटा में बीसी के नाम पर करोड़ों की रकम जुटाने का आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

कोटा में बीसी के नाम पर करोड़ों की रकम जुटाने का आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR कोटा शहर के आरकेपुरम थाना क्षेत्र में बीसी के नाम पर लोगों से रकम जमा करवाने और अवधि पूरी होने के बाद पैसा वापस नहीं लौटाने का मामला सामने आने स…

ABP News के अनुसार18 सितंबर 2026 को 02:04 pm बजे
कोटा में बीसी के नाम पर करोड़ों की रकम जुटाने का आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

सौजन्य से:- ABP News

कोटा में बीसी के नाम पर करोड़ों की रकम जुटाने का आरोप, पुलिस ने दर्ज की FIR

कोटा शहर के आरकेपुरम थाना क्षेत्र में बीसी के नाम पर लोगों से रकम जमा करवाने और अवधि पूरी होने के बाद पैसा वापस नहीं लौटाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है.

राजस्थान में कोटा शहर के आरकेपुरम थाना क्षेत्र में बीसी के नाम पर लोगों से रकम जमा करवाने और अवधि पूरी होने के बाद पैसा वापस नहीं लौटाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है. केशवपुरा निवासी जितेंद्र पालीवाल की शिकायत पर आरकेपुरम थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

शिकायत में दावा किया गया है कि अलग-अलग बीसी के जरिए करीब 500 से 1000 लोगों से 8 से 10 करोड़ रुपए तक की रकम जमा करवाई गई हो सकती है. हालांकि यह आंकड़ा फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। वास्तविक रकम और प्रभावित लोगों की संख्या पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी.

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हर माह 2 से 5 हजार रुपए जमा करवाने का आरोप

शिकायत के मुताबिक आरकेपुरम मुक्तिधाम के पीछे रहने वाले कृष्ण मुरारी माहेश्वरी अलग-अलग बीसी संचालित करते थे. बीसी में शामिल लोगों से उनकी आर्थिक क्षमता के अनुसार हर महीने करीब दो हजार से पांच हजार रुपए तक जमा करवाए जाते थे. लोगों को बीसी की अवधि पूरी होने पर जमा रकम वापस मिलने की उम्मीद थी.

आरोप है कि बीसी की अवधि पूरी होने के बाद कई लोगों को उनकी जमा रकम वापस नहीं मिली. रकम लौटाने को लेकर जब संबंधित लोगों ने संपर्क किया तो कथित तौर पर उन्हें लगातार टालमटोल किया गया.

पहले आश्वासन, फिर फोन उठाना भी बंद करने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमा रकम वापस मांगने पर शुरुआत में अलग-अलग तरह के आश्वासन दिए गए. लेकिन समय गुजरने के साथ भुगतान नहीं किया गया. बाद में फोन कॉल का जवाब देना भी बंद कर दिया गया. इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई.

करोड़ों की रकम का सच दस्तावेजों से आएगा सामने

मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वास्तव में कितने लोगों ने बीसी में पैसा जमा किया और कुल कितनी रकम एकत्र हुई. शिकायतकर्ता ने पुलिस से संबंधित बैंक खातों के लेन-देन, बीसी की रसीदें, डायरी, हिसाब-किताब और अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है.

यदि पुलिस जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो मामले में प्रभावित लोगों की संख्या और रकम का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है. वहीं दस्तावेजों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की जांच से यह भी स्पष्ट होगा कि कितनी रकम जमा हुई, किस-किस खाते में गई और उसका आगे क्या लेन-देन हुआ.

पुलिस जांच पर टिकी लोगों की निगाहें

एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. पुलिस द्वारा बीसी से जुड़े लोगों के बयान लेने के साथ बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज खंगाले जाने की संभावना है. जांच पूरी होने के बाद ही शिकायत में बताए गए 8 से 10 करोड़ रुपए और 500 से 1000 लोगों के दावे की वास्तविकता सामने आएगी. फिलहाल मामला जांच के अधीन है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है.

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