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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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'बॉस स्कैम' को लेकर एडवाइजरी जारी:पुलिस ने साइबर ठगों से बचने के लिए लोगों को किया अलर्ट
धौलपुर46 मिनट पहले
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साइबर ठग अब कंपनियों के बॉस, वरिष्ठ अधिकारी या बिजनेस पार्टनर बनकर कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। वे व्हाट्सएप, ई-मेल और एसएमएस के जरिए तत्काल पैसे ट्रांसफर करने, गिफ्ट कार्ड खरीदने या गोपनीय डेटा साझा करने का दबाव डालते हैं। राजस्थान पुलिस की सा
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धौलपुर पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया कि साइबर अपराधी पहले कंपनी, उसके वरिष्ठ अधिकारियों, ई-मेल पैटर्न, संपर्क नंबर और सोशल मीडिया से जुड़ी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद वे वरिष्ठ अधिकारी की पहचान अपनाकर कर्मचारी से संपर्क करते हैं। विश्वास पैदा करने के लिए ठग वास्तविक नाम, पद और प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल करते हैं।
सावधानी के जरिए ठगी से बचा जा सकता है
- ठग कार्यालय के लैपटॉप या कंप्यूटर में ट्रोजन हॉर्स मालवेयर डालकर भी जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं। यदि कंप्यूटर व्हाट्सएप वेब से जुड़ा है, तो लिंक्ड डिवाइस या क्यूआर कोड के जरिए व्हाट्सएप तक पहुंच बनाकर कर्मचारी को बॉस के नाम से भुगतान के निर्देश भेजे जा सकते हैं। इसके बाद रकम म्यूल अकाउंट, क्रिप्टोकरेंसी या नकद निकासी के जरिए आगे भेजी जा सकती है।
- पुलिस के अनुसार, ऐसे स्कैम के प्रमुख संकेतों में ई-मेल एड्रेस में मामूली बदलाव, कार्यालय समय के बाद अचानक संपर्क, अत्यधिक अर्जेंसी और गोपनीय लेनदेन का दबाव शामिल हैं। नए बैंक खाते में तत्काल भुगतान का निर्देश देना और फोन या वीडियो कॉल से बचना भी इसके संकेत हैं। भाषा और व्याकरण में असामान्य गलतियां भी संदेह का कारण हो सकती हैं।
- राजस्थान पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी वित्तीय या डेटा संबंधी अनुरोध की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि अवश्य करें। केवल व्हाट्सएप या ई-मेल के आधार पर भुगतान नहीं करें। पूरा ई-मेल एड्रेस और डोमेन जांचें। कंपनियों को बड़े और असामान्य भुगतान के लिए मल्टीलेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करना चाहिए।
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