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जयपुर: जिसे खरीदार समझा, वही निकला पुलिस का मुखबिर डील पक्की होते ही पलटा खेल, CID ने दबोचा

जयपुर: जिसे खरीदार समझा, वही निकला पुलिस का मुखबिर डील पक्की होते ही पलटा खेल, CID ने दबोचा जयपुर में CID-CB ने बोगस ग्राहक बनकर 3.10 लाख में अष्टधातु की मूर्ति बेचने पहुंचे आरोपी अब्दुल कादिर को पकड़ा। आरोपी इसे प्राचीन…

amarujala.com के अनुसार10 सितंबर 2026 को 03:04 am बजे
जयपुर: जिसे खरीदार समझा, वही निकला पुलिस का मुखबिर डील पक्की होते ही पलटा खेल, CID ने दबोचा

सौजन्य से:- amarujala.com

जयपुर: जिसे खरीदार समझा, वही निकला पुलिस का मुखबिर डील पक्की होते ही पलटा खेल, CID ने दबोचा

जयपुर में CID-CB ने बोगस ग्राहक बनकर 3.10 लाख में अष्टधातु की मूर्ति बेचने पहुंचे आरोपी अब्दुल कादिर को पकड़ा। आरोपी इसे प्राचीन सोने की मूर्ति बता रहा था।

विस्तार

जयपुर में प्राचीन सोने की मूर्ति के नाम पर ठगी का एक दिलचस्प मामला सामने आया है। आरोपी ने अष्टधातु की मूर्ति को सोने का बताकर 10 लाख रुपये में बेचने का झांसा दिया और मोलभाव के बाद 3.10 लाख रुपये में सौदा तय किया। उसे शायद अंदाजा नहीं था कि सामने ग्राहक नहीं, बल्कि पुलिस के जवान हैं। सीआईडी (सीबी) की टीम ने बोगस ग्राहक बनकर जाल बिछाया और आरोपी को मूर्ति की डिलीवरी करते समय रंगे हाथों पकड़ लिया।

कार्रवाई गलतागेट थाना क्षेत्र में ‘ऑपरेशन भगवान विष्णु’ के तहत की गई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से करीब 21 इंच लंबा अष्टधातु का विग्रह बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की ठगी से दो समुदायों के बीच सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका थी, जिसे समय रहते कार्रवाई कर टाल दिया गया।

10 लाख से शुरू हुआ सौदा, 3.10 लाख पर हुआ फाइनल

सीआईडी-सीबी की स्पेशल टीम के एएसआई दुष्यन्त सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली को सूचना मिली थी कि शहजाद नाम का व्यक्ति एक पुरानी सोने की मूर्ति बेचने की कोशिश कर रहा है। टीम ने सूचना को विकसित किया और आरोपी से संपर्क करने के लिए बोगस ग्राहक तैयार किया।

आरोपी ने शुरुआत में मूर्ति की कीमत 10 लाख रुपये बताई। काफी मोलभाव के बाद सौदा 3 लाख 10 हजार रुपये नकद में तय हुआ। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को डिलीवरी के लिए गलतागेट थाना क्षेत्र में बुलाया।

ऊपर-नीचे असली, बीच में मनोरंजन बैंक के नोट

पुलिस ने आरोपी को रकम देने का पूरा इंतजाम भी किया। 3.10 लाख रुपये में ऊपर और नीचे के नोट असली रखे गए, जबकि बीच के नोट भारतीय मनोरंजन बैंक के थे। रकम सौंपने के बाद पुलिस टीम ने मूर्ति को देखा तो उसके सोने की होने पर संदेह हुआ।

इसके बाद टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया। गलतागेट थाना पुलिस के सहयोग से सूरजपोल अनाज मंडी के सामने अब्दुल कादिर निवासी सलेमपुर, करौली को गिरफ्तार किया गया।

मूर्ति पहुंचाने के बदले मिलने थे 10 हजार

पूछताछ में अब्दुल कादिर ने पुलिस को बताया कि उसे मूर्ति की डिलीवरी देने के लिए अब्दुल समद के कहने पर जयपुर भेजा गया था। सौदा तय होने के बाद मंगलवार रात 8 सितंबर को उसे मूर्ति लेकर जयपुर भेजा गया था। इस काम के बदले उसे 10 हजार रुपये मिलने थे। अब पुलिस शहजाद, अब्दुल समद समेत इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

पुरातत्व विशेषज्ञ बताएंगे मूर्ति कितनी पुरानी

पुलिस अब बरामद मूर्ति की जांच पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों से करवाएगी। इससे पता चलेगा कि मूर्ति वास्तव में कितनी पुरानी है, किस धातु से बनी है और उसका कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं।

इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि मूर्ति आरोपी तक कहां से पहुंची और क्या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है। मूर्ति की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

सीआईडी-सीबी और गलतागेट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

कार्रवाई अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) बिपिन कुमार पाण्डेय के निर्देशन, आईजी के.बी. वंदना और डीआईजी राशि डोगरा डूडी के मार्गदर्शन में हुई। एएसपी अदिति कांवट के सुपरविजन में उपनिरीक्षक शैलेन्द्र शर्मा ने टीम का नेतृत्व किया।

कार्रवाई में एएसआई दुष्यन्त सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली की अहम भूमिका रही। हेड कांस्टेबल बृजेश कुमार, कृष्ण गोपाल और कुलदीप सिंह के साथ गलतागेट थाना पुलिस के थानाधिकारी धर्मेन्द्र कुमार शर्मा, एएसआई बलबीर सिंह, हेड कांस्टेबल प्रदीप और कांस्टेबल विजय व राजू सिंह ने भी सहयोग किया।

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