राजस्थान निकाय चुनाव के बीच पति- बच्चों सहित लापता हो गई BJP प्रत्याशी, 3 दिन से नहीं कोई खोज खबर
9 सितंबर को मतदान के दिन से लापता मामले की शुरुआत 9 सितंबर को मतदान के दिन हुई। परिजनों के अनुसार अंतिमा और उनके पति मतदान के लिए निकले थे। दोनों अंबेडकर भवन स्थित मतदान केंद्र के आसपास मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने जनसंपर…

सौजन्य से:- Navbharat Times
9 सितंबर को मतदान के दिन से लापता
मामले की शुरुआत 9 सितंबर को मतदान के दिन हुई। परिजनों के अनुसार अंतिमा और उनके पति मतदान के लिए निकले थे। दोनों अंबेडकर भवन स्थित मतदान केंद्र के आसपास मौजूद थे। इसके बाद उन्होंने जनसंपर्क भी किया। अंतिमा के रिश्ते में मामा लगने वाले राजेंद्र यादव के मुताबिक वह खुद बूथ पर पोलिंग एजेंट के रूप में मौजूद थे। उनके अनुसार शाम करीब 4 बजे तक अंतिमा बूथ पर दिखाई दी थीं। इसके बाद जब वह घर पहुंचे तो पता चला कि अंतिमा, संजय और बच्चा घर नहीं लौटे हैं।परिवार अपने स्तर पर तलाश रहा
परिवार ने अपने स्तर पर तलाश शुरू की। रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया गया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद अंतिमा की सास अंगूरी बाई और मां कृष्णा बाई कोतवाली थाने पहुंचीं। शिकायत में अज्ञात लोगों पर उन्हें जबरन अपने साथ ले जाने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।पुलिस भी आसपास के CCTV कैमरों को खंगाल रही
अब पुलिस की जांच का फोकस उस रास्ते पर है, जिस रास्ते से अंतिमा, उनके पति और बच्चा मतदान केंद्र से घर की ओर लौटे थे। पुलिस आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही मोबाइल फोन और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तीनों आखिरी बार कहां और किसके संपर्क में थे।मतदान के बाद BJP का भी संपर्क नहीं हुआ
मामला सामने आने के बाद भाजपा संगठन भी सक्रिय हुआ है। भाजपा नगर अध्यक्ष ओपी पारेता के मुताबिक मतदान के बाद पार्टी अपने सभी प्रत्याशियों से संपर्क करती है। जरूरत होने पर प्रत्याशियों को पार्टी कार्यालय भी बुलाया जाता है। लेकिन अंतिमा यादव से मतदान के बाद पार्टी का संपर्क नहीं हो पाया।परिवार से जानकारी लेने पर भी कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पारेता ने कहा कि अंतिमा भाजपा की प्रत्याशी हैं और पार्टी अपने स्तर पर भी उनसे संपर्क करने और उनकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने वार्ड-16 में भाजपा की स्थिति मजबूत होने और जीत की उम्मीद होने की बात भी कही।
बाड़ाबंदी के बीच गायब होने से उठे सवाल
इस मामले को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा चुनावी बाड़ाबंदी को लेकर हो रही है। नगर परिषद चुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद राजनीतिक दल अपने संभावित विजयी प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद में जुटते हैं। ऐसे समय में किसी प्रत्याशी का अचानक संपर्क से बाहर हो जाना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का कारण बन रहा है।हालांकि अभी तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे अंतिमा यादव के लापता होने को बाड़ाबंदी या किसी राजनीतिक घटनाक्रम से सीधे जोड़ा जा सके। परिवार की ओर से फिलहाल इसे गंभीर घटना बताते हुए अपहरण की आशंका जताई गई है। पुलिस भी इसी शिकायत के आधार पर जांच कर रही है।
यही वजह है कि इस मामले में दो तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं—एक तरफ परिवार अपने तीन सदस्यों की सुरक्षित वापसी की चिंता में है, तो दूसरी तरफ चुनावी गलियारों में प्रत्याशी के अचानक गायब होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
दूसरी बार चुनाव मैदान में थीं अंतिमा
एडवोकेट अंतिमा यादव भाजपा के टिकट पर लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में थीं। इससे पहले भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार वार्ड-16 से पार्टी ने उन्हें फिर मौका दिया।फिलहाल चुनावी जीत-हार से पहले पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतिमा यादव, उनके पति संजय यादव और बच्चे के साथ आखिर हुआ क्या? क्या वे वास्तव में किसी के द्वारा जबरन ले जाए गए या मामला कुछ और है? इन सवालों का जवाब CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और पुलिस की तकनीकी जांच से मिलने की उम्मीद है।
परिवार को तीनों के सकुशल लौटने का इंतजार है और पुलिस की टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं। अब इस पूरे मामले में अगला सुराग पुलिस की जांच से ही सामने आएगा।
Powered by Reporting Rajasthan Files
संबंधित ख़बरें

जोधपुर में आग बुझाने पहुंचे थे दमकलकर्मी, अचानक फटा केमिकल टैंक, कई झुलसे

सिद्धार्थनगर की नाबालिग के साथ जयपुर में सामूहिक दुष्कर्म, दिल्ली पुलिस ने किया वापस - molested of a minor in jaipur delhi police sent the case back

एम्स जोधपुर में डॉक्टर की मौत पर बवाल, शुरू होगा अनिश्चितकालीन हड़ताल


