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​जेईई मेन में 99.06 परसेंटाइल और नीट में AIR 16: कोटा के कार्तिक चौधरी ने दो बड़ी परीक्षाओं में गाड़े सफलता के झंडे

जेईई मेन में 99.06 परसेंटाइल और नीट में AIR 16: कोटा के कार्तिक चौधरी ने दो बड़ी परीक्षाओं में गाड़े सफलता के झंडे कार्तिक ने नीट यूजी में AIR 16 हासिल की है. खुद को परखने के लिए उन्होंने जेईई मेन की भी परीक्षा दी थी. Pu…

ETV Bharat के अनुसार18 जुलाई 2026 को 05:13 am बजे
​जेईई मेन में 99.06 परसेंटाइल और नीट में AIR 16: कोटा के कार्तिक चौधरी ने दो बड़ी परीक्षाओं में गाड़े सफलता के झंडे

सौजन्य से:- ETV Bharat

जेईई मेन में 99.06 परसेंटाइल और नीट में AIR 16: कोटा के कार्तिक चौधरी ने दो बड़ी परीक्षाओं में गाड़े सफलता के झंडे

कार्तिक ने नीट यूजी में AIR 16 हासिल की है. खुद को परखने के लिए उन्होंने जेईई मेन की भी परीक्षा दी थी.

Published : July 18, 2026 at 7:36 AM IST

कोटा : देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट यूजी' में कोटा के छात्र कार्तिक चौधरी ने अपनी मेधा का परचम लहराया है. कार्तिक ने परीक्षा में 705 अंक हासिल करते हुए ऑल इंडिया 16वीं रैंक (AIR 16) प्राप्त की है. मूल रूप से सांगोद के पास गोपालपुरा गांव के रहने वाले कार्तिक वर्तमान में अपने परिवार के साथ कोटा के तलवंडी इलाके में रहते हैं. कार्तिक की इस शानदार सफलता ने न सिर्फ उनके परिवार को गौरवान्वित किया है, बल्कि कोटा कोचिंग नगरी के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ दी है.

मैथ्स में रुचि होने के बावजूद चुना बायो : कार्तिक के घर में बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई का बेहतरीन माहौल रहा है. दसवीं कक्षा तक कार्तिक की रुचि मैथमेटिक्स (गणित) में बहुत ज्यादा थी, लेकिन एक खास वजह ने उनका रुख मेडिकल फील्ड की तरफ मोड़ दिया. कार्तिक बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौर में उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों और डॉक्टरों के कड़े संघर्ष को बहुत करीब से देखा. डॉक्टरों की निस्वार्थ सेवा भावना से प्रेरित होकर उन्होंने तय किया कि वे बड़े होकर चिकित्सा क्षेत्र में ही अपना करियर बनाएंगे. यही वजह रही कि 10वीं के बाद उन्होंने बायोलॉजी को चुना.

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खुद को परखने के लिए दी जेईई मेन की परीक्षा : उन्होंने नीट यूजी की परीक्षा तो पास की ही है, इसके पहले जेईई मेन की परीक्षा को भी रजिस्ट्रेशन करा कर दिया, ताकि वहां होने वाले कंपटीशन से वह रूबरू हो सके और नीट की परीक्षा में भी उसका फायदा मिले. कार्तिक ने बताया कि उन्होंने जेईई मेन की परीक्षा में भी अच्छा रिजल्ट रहा था, 99.06 परसेंटाइल स्कोर किया था. इसके साथ ही उनकी ऑल इंडिया रैंक भी 15008 रही थी. कार्तिक का कहना है कि शुरुआत से ही में टारगेट बनाकर पढ़ाई करते थे. हर सब्जेक्ट को बराबर समय देते थे. टॉपिक के अनुसार बेहतर तरीके से कवर करते थे, ताकि कुछ छूट नहीं जाए. पढ़ाई करने के इस तरीके से फायदा मिला है.

परिवार में पहले से है इंजीनियरिंग और शिक्षा का माहौल : कार्तिक के पिता सुरेंद्र सिंह राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड में सहायक अभियंता है. जबकि उनकी मां प्रियंका चौधरी विनोबा भावे सरकारी स्कूल में प्रिंसिपल है. उनकी बड़ी बहन मृगांशी चौधरी बीएससी बीएड कर रही है. मां प्रियंका चौधरी का कहना है कि कार्तिक मैथमेटिक्स में काफी अच्छा था, लेकिन क्लास 10 के बाद जब हमने उससे पूछा कि क्या करना है? तब उसने कहा कि मुझे एमबीबीएस करनी है, इसीलिए बायोलॉजी से पढ़ाई उन्होंने शुरू कर दी. उनके मैथमेटिक्स भी रही है, इसीलिए उन्होंने जेईई मेन की परीक्षा भी दी थी. इसमें खुद को यह देखना चाह रहे थे कि नेशनल लेवल की परीक्षा में वह किस स्तर पर हैं और सेल्फ एनालिसिस भी करना चाहते हैं.

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कार्तिक चौधरी का कहना है कि जेईई मेन की परीक्षा में जिस तरह से फिजिक्स और केमिस्ट्री होती है, उससे उन्हें नीट की परीक्षा में भी फायदा मिलता. इसीलिए भी उन्होंने परीक्षा दी थी. ताकि वहां पर किस तरह के क्वेश्चन है और उनको समझने में भी काफी मदद मिलती है. काफी कुछ टॉपिक दोनों परीक्षाओं में फिजिक्स और केमिस्ट्री के एक जैसे ही हैं. कार्तिक का कहना है कि उन्होंने अपना रूटीन शेड्यूल काफी स्ट्रिक्टली फॉलो किया है. उन्होंने 6 से 7 घंटे करीब सेल्फ स्टडी की है. वह रोज अपना रिवीजन करके थे. इसके अलावा टेस्ट का समय निकल एनलिसिस भी समय पर देते थे, उसके बाद डाउट भी फैकल्टी से क्लियर करते थे.

कार्तिक के पिता सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और परिवार के सहयोग से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. वे खुद भी कोटा कोचिंग संस्थान में पढ़े हैं. उन्होंने 1997 में आरपीईटी की परीक्षा दी थी. जिसके बाद उन्होंने बीटेक किया और सरकारी इंजीनियर बन गए हैं. वह वर्तमान में मोदक में पोस्टेड हैं. इसके साथ ही उनकी बहन ज्योति ने भी 1999 में आरपीईटी की तैयारी की और वह पॉलीटिकल कॉलेज अलवर में लेक्चर है.

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