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जयपुर के 80 वर्षीय गणपतलाल खुराना चला रहे बर्तन बैंक, एक साथ 10 हजार लोग कर सकते हैं भोजन

जयपुर के 80 वर्षीय गणपतलाल खुराना चला रहे बर्तन बैंक, एक साथ 10 हजार लोग कर सकते हैं भोजन रिटायरमेंट के बाद जयपुर के गणपतलाल अपना जीवन समाज और पर्यावरण को समर्पित कर रहे हैं. पढ़िए अश्वनी पारीक की रिपोर्ट... Published :…

ETV Bharat के अनुसार4 सितंबर 2026 को 08:33 am बजे
जयपुर के 80 वर्षीय गणपतलाल खुराना चला रहे बर्तन बैंक, एक साथ 10 हजार लोग कर सकते हैं भोजन

सौजन्य से:- ETV Bharat

जयपुर के 80 वर्षीय गणपतलाल खुराना चला रहे बर्तन बैंक, एक साथ 10 हजार लोग कर सकते हैं भोजन

रिटायरमेंट के बाद जयपुर के गणपतलाल अपना जीवन समाज और पर्यावरण को समर्पित कर रहे हैं. पढ़िए अश्वनी पारीक की रिपोर्ट...

Published : September 4, 2026 at 1:16 PM IST

जयपुर : शादी, भंडारे, धार्मिक आयोजनों और दूसरे सामाजिक कार्यक्रमों के बाद सड़कों पर बिखरे प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तन आम तस्वीर बन चुके हैं. प्लेट, ग्लास और चम्मचों के बढ़ते इस्तेमाल से पैदा होने वाले कचरे ने पर्यावरण के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इसी परेशानी का पुख्ता रास्ता तलाशने के लिए जयपुर के 80 वर्षीय गणपतलाल खुराना ने अनोखी पहल शुरू की है. उन्होंने अपने घर को ही बर्तन बैंक में बदल दिया है, जहां सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए स्टील के बर्तन निशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं.

विद्याधर नगर निवासी गणपतलाल खुराना राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना जीवन सामाजिक सेवा के लिए समर्पित कर दिया. पत्नी कांता खुराना की स्मृति में उन्होंने कांता फाउंडेशन ट्रस्ट बनाया. गणपतलाल खुद और अपनी दिवंगत पत्नी की फैमिली पेंशन का करीब 30 फीसदी हिस्सा सामाजिक कार्यों पर खर्च करते हैं. कभी सरकारी स्कूलों में जरूरत का सामान उपलब्ध करवाते हैं तो कभी किसी सामाजिक आयोजन में सहयोग करते हैं. इसी सेवा भाव के बीच करीब दो साल पहले उनके मन में बर्तन बैंक शुरू करने का विचार आया.

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घर बना बर्तन बैंक : गणपतलाल बताते हैं कि शादी या भंडारे के अगले दिन जब सड़कों पर बड़ी संख्या में डिस्पोजल प्लेट, ग्लास और चम्मच बिखरे दिखाई देते थे तो उन्हें चिंता होती थी कि इसका कोई बेहतर विकल्प होना चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने बार-बार इस्तेमाल किए जा सकने वाले स्टील के बर्तन उपलब्ध करवाने का फैसला लिया. शुरुआत में उन्होंने करीब 500 स्टील की थालियों से इस अभियान की शुरुआत की थी. धीरे-धीरे लोगों का सहयोग मिलता गया और आज उनके बर्तन बैंक में 10 हजार से ज्यादा स्टील के बर्तन उपलब्ध हैं. इनमें सेक्शन वाली प्लेट, कटोरी, ग्लास और चम्मच के अलावा भोजन परोसने के बड़े बर्तन, बड़े चम्मच, पानी के जग और रामझारे भी शामिल हैं.

अब वह चाय के लिए छोटे स्टील कप भी उपलब्ध करवाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि आयोजनों में डिस्पोजल कप का इस्तेमाल भी रोका जा सके. गणपतलाल खुराना का कहना है कि बर्तन बैंक शुरू करने का उनका मकसद केवल डिस्पोजल का विकल्प देना नहीं, बल्कि लोगों की आदत में बदलाव लाना है. वह चाहते हैं कि शादी, भंडारे, धार्मिक आयोजन और सामाजिक कार्यक्रम प्लास्टिक डिस्पोजल के बिना आयोजित हों. उनका सपना है कि जयपुर को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में समाज की भागीदारी बढ़े. उनका मानना है कि अगर हर सामाजिक और धार्मिक आयोजन में बार-बार इस्तेमाल होने वाले बर्तनों को अपनाया जाए तो प्लास्टिक कचरे में बड़ी कमी लाई जा सकती है.

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एक साथ 10 हजार लोग कर सकते हैं भोजन : बर्तन बैंक की सबसे खास बात इसकी क्षमता है. एक समय में करीब 10 हजार लोगों के लिए भोजन परोसने के लिए जरूरी बर्तन उपलब्ध करवाए जा सकते हैं. सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों में इन बर्तनों को पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है. बर्तन लेने वाले व्यक्ति से 2,100 रुपए सिक्योरिटी राशि जमा करवाई जाती है. बुकिंग कराने वाले व्यक्ति की आईडी और अन्य विवरण भी लिए जाते हैं. बर्तन सुरक्षित वापस लौटाने के बाद सिक्योरिटी राशि वापस कर दी जाती है. गणपतलाल खुराना ने इस बर्तन बैंक को शुरू करने में करीब 8 लाख रुपए खर्च किए. शुरुआत में उन्होंने अपने स्तर पर बर्तन खरीदे, लेकिन अब समाज के कई लोग भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं. आर्थिक और सामाजिक सहयोग देने के लिए करीब 35 स्वयंसेवक उनके साथ जुड़े हुए हैं.

गणपतलाल खुराना बताते हैं कि उनका बर्तन बैंक अब तक 300 से ज्यादा आयोजनों में अपनी सेवा दे चुका है. इनमें शादी समारोह, भंडारे, यज्ञ, सामूहिक विवाह और विभिन्न सामाजिक आयोजन शामिल हैं. जयपुर के अलावा सीकर, सवाई माधोपुर और डीडवाना सहित दूसरे जिलों से भी बर्तन बैंक के लिए बुकिंग आ चुकी है. कई आयोजनों में करीब एक सप्ताह तक इन बर्तनों का इस्तेमाल किया गया. बर्तन बैंक की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही इसके लिए बुकिंग भी तेजी से बढ़ रही है. बताया गया है कि 15 नवंबर तक की बुकिंग पूरी हो चुकी है. गणपतलाल का कहना है कि किसी भी आयोजन के लिए करीब 15 दिन पहले संपर्क किया जाए तो बर्तन उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाता है.

प्लास्टिक मुक्त आयोजन का संकल्प : गणपतलाल की पहल सिर्फ बर्तन उपलब्ध करवाने तक सीमित नहीं है. बर्तन लेने आने वाले परिवारों और संस्थाओं से यह संकल्प भी कराया जाता है कि वे अपने आयोजनों में प्लास्टिक और डिस्पोजल का इस्तेमाल नहीं करेंगे. उनका मकसद लोगों को यह समझाना है कि धार्मिक या सामाजिक आयोजन की पवित्रता के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी जुड़ी है. निर्जला एकादशी के अवसर पर उन्होंने स्टील के ग्लासों में शर्बत वितरित कर यह संदेश भी दिया कि बड़े सामाजिक आयोजन बिना प्लास्टिक डिस्पोजल के आसानी से किए जा सकते हैं.

गणपतलाल खुराना की सामाजिक सेवा का दायरा सिर्फ बर्तन बैंक तक सीमित नहीं है. वह सरकारी स्कूलों में भी जरूरत के अनुसार मदद करते हैं. उनकी दिवंगत पत्नी कांता खुराना सरकारी शिक्षिका थीं, इसीलिए शिक्षा के क्षेत्र से उनका जुड़ाव पहले से रहा है. साल 2016 में उन्होंने जयपुर के एक सरकारी स्कूल में अपने खर्च पर स्मार्ट क्लासरूम तैयार करवाया था. इसके बाद कई स्कूलों में प्रिंसिपल कक्ष की मरम्मत, फर्श की मरम्मत और अन्य जरूरी कामों में भी सहयोग किया. जरूरतमंद सरकारी स्कूलों को सामान उपलब्ध करवाने का काम भी वह कांता फाउंडेशन के माध्यम से करते हैं.

पंजाबी समाज को एकजुट करने की भी पहल : गणपतलाल खुराना ने अपने सामाजिक कार्यों के साथ पंजाबी समाज को एकजुट करने का भी प्रयास किया. उनका कहना है कि कुछ साल पहले समाज के लोग अलग-अलग समूहों में बंटे हुए थे. ऐसे में उन्होंने लोगों को एक मंच पर लाने के लिए संगठन बनाने की पहल की. अब वह इस संगठन में संस्थापक के तौर पर समाजसेवा कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने समाज के युवक-युवतियों के लिए मैचमेकर की भूमिका भी निभानी शुरू की है. उनके पास फिलहाल करीब 3 हजार अविवाहित युवक-युवतियों का डेटा है, जो जीवनसाथी की तलाश में हैं. परिवारों के संपर्क करने पर वह दोनों पक्षों को मिलाने में भी मदद करते हैं.

कांता फाउंडेशन ट्रस्ट के सचिव हरीश खत्री का कहना है कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के बाद बड़ी मात्रा में डिस्पोजल कचरा आसपास फैल जाता है, जो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है. ऐसे में स्टील के बर्तन सामाजिक और बड़े आयोजनों के लिए किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प हो सकते हैं. उनके मुताबिक, स्टील के बर्तनों के इस्तेमाल से प्लास्टिक कचरा कम होगा. वहीं, बर्तन धोने के काम में लगे लोगों को रोजगार भी मिल सकता है.

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