Rajasthan में जल्द बजेगा पंचायत-निकाय चुनाव का बिगुल, 6 चरणों में कराने की तैयारी
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को तेज करते हुए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

सौजन्य से:- Hindustan
राजस्थान में जल्द बजेगा पंचायत-निकाय चुनाव का बिगुल; 6 चरणों में कराने की तैयारी
चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश से मशीनें मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकारी मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को तेज करते हुए विभिन्न स्तरों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। चुनाव कार्यक्रम तय करने से लेकर ओबीसी सर्वे पूरा कराने और ईवीएम की व्यवस्था तक कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव चार चरणों में और निकाय चुनाव दो चरणों में कराने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है तो राज्य में कुल छह चरणों में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं।
करीब 8.40 लाख कर्मचारियों की होगी जरूरत
निर्वाचन आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनावी स्टाफ और सुरक्षा बलों की उपलब्धता है। पंचायत चुनाव के लिए करीब छह लाख कार्मिकों की आवश्यकता होगी। इनमें लगभग 3.20 लाख चुनाव कर्मी और 2.80 लाख सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। वहीं निकाय चुनाव के लिए भी करीब 2.40 लाख कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी।
एक साथ इतने कर्मचारियों और सुरक्षा बलों की उपलब्धता मुश्किल होने के कारण आयोग चरणबद्ध चुनाव कराने की रणनीति पर काम कर रहा है। इससे प्रशासनिक व्यवस्था संभालने और सुरक्षा प्रबंधन में भी आसानी होगी।
मध्यप्रदेश से मंगाई जाएंगी ईवीएम
चुनाव की तैयारियों के तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश से मशीनें मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों के बीच पत्राचार किया जा चुका है।
25 लाख OBC परिवारों का सर्वे पूरा, लेकिन तकनीकी दिक्कतें बनी चुनौती
चुनाव से पहले ओबीसी आरक्षण का निर्धारण सबसे अहम प्रक्रिया मानी जा रही है। इसी क्रम में ओबीसी (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की ओर से राज्यभर में सर्वे कराया जा रहा है। शुक्रवार तक करीब 25 लाख ओबीसी परिवारों का सर्वे पूरा होने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि सर्वे कार्य अभी भी कई जिलों में तकनीकी समस्याओं से प्रभावित है। अधिकारियों के मुताबिक राजधरा ऐप बार-बार तकनीकी दिक्कत कर रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट नेटवर्क कमजोर होने के कारण सर्वे की गति भी प्रभावित हो रही है।
तबादलों से भी प्रभावित हुआ सर्वे अभियान
राज्य सरकार की ओर से हाल ही में बड़े पैमाने पर किए गए प्रशासनिक तबादलों का असर भी सर्वे कार्य पर पड़ा है। जानकारी के अनुसार सर्वे में लगे करीब 15 हजार कर्मचारी स्थानांतरण के बाद रिलीव हो चुके हैं। अब उनकी जगह नए कर्मचारियों की तैनाती की जा रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों में सर्वे की रफ्तार धीमी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर अभियान को और तेज किया गया तो सर्वे जल्द पूरा किया जा सकता है।
निर्वाचन आयोग ने सरकार को बताया देरी का जिम्मेदार
राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह पहले ही हाईकोर्ट में स्पष्ट कर चुके हैं कि एससी, एसटी, ओबीसी और महिला आरक्षण का अंतिम आंकड़ा उपलब्ध हुए बिना चुनाव कार्यक्रम घोषित करना संभव नहीं है। उन्होंने अदालत को बताया कि आरक्षण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना और आरक्षण की लॉटरी निकालना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग को इस संबंध में छह बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन ओबीसी सर्वे पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जैसे ही आरक्षण संबंधी पूरी जानकारी मिलेगी, वह दो दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम जारी करने और 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने के लिए तैयार है।
अफसरों की बैठक, हाईकोर्ट के आदेश की पालना पर मंथन
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद शुक्रवार को पंचायती राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और ओबीसी आयोग के अधिकारियों ने बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। बताया जा रहा है कि जल्द ही उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर अदालती आदेश की पालना और चुनावी प्रक्रिया की समयबद्ध रूपरेखा तय की जाएगी।
सर्वे ऐप में नहीं दिख रहीं सभी जातियां
इस बीच ओबीसी आयोग ने जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि सर्वे ऐप में ओबीसी की सभी जातियों के विकल्प उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आयोग द्वारा भेजी गई सूची के अनुसार संबंधित जातियों का क्रमवार उल्लेख कर सर्वे पूरा कराया जाए।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में ओबीसी सर्वे पूरा होने और आरक्षण संबंधी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की औपचारिक घोषणा होने की संभावना बढ़ गई है।
लेखक के बारे में
Sachin Sharmaसचिन शर्मा | वरिष्ठ पत्रकार (राजस्थान)
सचिन शर्मा राजस्थान के एक अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में राजस्थान सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डिजिटल जर्नलिज्म तक, सचिन ने समाचारों की सटीकता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को हमेशा प्राथमिकता दी है।
सचिन शर्मा का पत्रकारिता करियर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से शुरू हुआ, जहां उन्होंने जी राजस्थान में लगभग 3 वर्षों तक मेडिकल और एजुकेशन बीट पर रिपोर्टर के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग की। इसके बाद प्रिंट और डिजिटल मीडिया में सक्रिय रहते हुए उन्होंने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सरोकार और जन आंदोलन जैसे विषयों पर भी व्यापक कवरेज किया।
शैक्षणिक रूप से, सचिन शर्मा ने राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया है, जिससे उन्हें फाइनेंस और आर्थिक मामलों की मजबूत समझ मिली। इसके बाद उन्होंने मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन कर पत्रकारिता की सैद्धांतिक और व्यावहारिक दक्षता हासिल की। सचिन शर्मा तथ्य-आधारित रिपोर्टिंग, स्रोतों की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं।
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