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6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में एक और गिरफ्तारी, बाड़मेर से खाताधारक को लाई जयपुर पुलिस

6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में एक और गिरफ्तारी, बाड़मेर से खाताधारक को लाई जयपुर पुलिस आरोपी के खाते में आए थे 2.50 लाख रुपए, बाइनेंस और टेलीग्राम क्यूआर से मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी रकम Published : September 10, 2026 at 8:…

ETV Bharat के अनुसार10 सितंबर 2026 को 04:05 pm बजे
6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में एक और गिरफ्तारी, बाड़मेर से खाताधारक को लाई जयपुर पुलिस

सौजन्य से:- ETV Bharat

6.80 करोड़ के बॉस स्कैम में एक और गिरफ्तारी, बाड़मेर से खाताधारक को लाई जयपुर पुलिस

आरोपी के खाते में आए थे 2.50 लाख रुपए, बाइनेंस और टेलीग्राम क्यूआर से मास्टरमाइंड तक पहुंचती थी रकम

Published : September 10, 2026 at 8:30 PM IST

जयपुर: राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने 6.80 करोड़ रुपए के बॉस स्कैम में ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए कमीशन पर खाता मुहैया करवाने वाले आरोपी को बाड़मेर से गिरफ्तार किया है. इस मामले में अब तक आठ आरोपी पकड़े जा चुके हैं. डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में जुटी है. राजस्थान पुलिस के केंद्रीय साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 6.80 करोड़ रुपए के बॉस स्कैम मामले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है.

प्लानिंग के साथ ट्रांसफर की जाती थी ठगी की रकम: एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया- मामले में बाड़मेर निवासी तगाराम की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया है. अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि साइबर ठगी की रकम हासिल करने, छिपाने और अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित करने के लिए गिरोह म्यूल बैंक खातों, एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी का पूरी प्लानिंग के साथ इस्तेमाल करता था.

यह गिरोह सोशल मीडिया ग्रुप के माध्यम से फर्जी, म्यूल बैंक खातों, एटीएम, सिम और पासबुक की किट उपलब्ध कराता था. साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में आने के बाद उसे तत्काल एटीएम या चेक से नकद निकाला जाता था, इसके अलावा यूपीआई, क्यूआर कोड, सीडीएम और दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था.

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कई चरण में होती थी लेयरिंग: एडीजी साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह के अनुसार, ठगी की रकम को एक से दूसरे खाते में स्थानांतरित कर लेयरिंग की जाती थी. इसके बाद रकम को यूएसडीटी या अन्य क्रिप्टो करेंसी में परिवर्तित कर आगे भेजा जाता था. इसके लिए क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर उपलब्ध क्यूआर कोड का उपयोग किया जाता था. इस तरह कई चरण की लेयरिंग के बाद रकम को नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था.

ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम: एडीजी साइबर क्राइम के अनुसार, गिरोह से जुड़े साइबर ठग फर्जी पहचान या वॉट्सएप के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करते हैं. ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में प्राप्त करने के बाद एटीएम, चेक, यूपीआई, सीडीएम और क्यूआर कोड के जरिए रकम को तत्काल स्थानांतरित किया जाता था या कैश निकाला जाता था. इसके साथ ही विभिन्न बैंक खातों में लेयरिंग करके अंत में क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से रकम को मास्टरमाइंड तक पहुंचाया जाता था.

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आरोपी के खाते में आए 2.50 लाख रुपए: बैंक रिकॉर्ड और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर तगाराम की भूमिका सामने आई. आरोपी तगाराम ने अपना बैंक खाता दूसरे व्यक्ति हरेन्द्र उर्फ हनी को उपलब्ध कराया था. इसी खाते में 24 अगस्त 2026 को 2.50 लाख रुपए ट्रांसफर हुए थे. इसके बाद तगाराम, हरेंद्र के साथ बैंक गया और खाते से रकम निकालने का प्रयास किया. पुलिस टीम द्वारा मामले में वॉट्सएप रिकॉर्ड, सीडीआर, सीएएफ आईडी, आईपीडीआर और बैंकिंग ट्रांजेक्शन का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है.

अनुसंधान में जुटी पुलिस की टीम: ठगी की रकम आगे किन-किन खातों में पहुंची और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत अनुसंधान जारी है. यह कार्रवाई डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह के निर्देशन में केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, राजस्थान, जयपुर के थानाधिकारी (आरपीएस) गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की. इस टीम में सीआई नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार, हेड कांस्टेबल बृजलाल और कांस्टेबल सच्चिदानंद शामिल रहे.

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