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राजस्थान निकाय चुनाव: दूसरे चरण का मतदान कल, गहलोत-पायलट समेत कांग्रेस के 30 दिग्गजों की साख दांव पर

राजस्थान निकाय चुनाव: दूसरे चरण का मतदान कल, गहलोत-पायलट समेत कांग्रेस के 30 दिग्गजों की साख दांव पर प्रदेश में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में कुल 6 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगर पालिकाओं में मतदान होगा. Published : Se…

ETV Bharat के अनुसार10 सितंबर 2026 को 03:04 pm बजे
राजस्थान निकाय चुनाव: दूसरे चरण का मतदान कल, गहलोत-पायलट समेत कांग्रेस के 30 दिग्गजों की साख दांव पर

सौजन्य से:- ETV Bharat

राजस्थान निकाय चुनाव: दूसरे चरण का मतदान कल, गहलोत-पायलट समेत कांग्रेस के 30 दिग्गजों की साख दांव पर

प्रदेश में निकाय चुनाव के दूसरे चरण में कुल 6 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 121 नगर पालिकाओं में मतदान होगा.

Published : September 10, 2026 at 7:28 PM IST

जयपुर: प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के तहत कल दूसरे चरण के लिए मतदान होगा. जयपुर, अजमेर, कोटा, पाली, उदयपुर और जोधपुर नगर निगम सहित 20 नगर परिषद और 121 पालिकाओं के लिए मतदान होगा. दिलचस्प यह है कि दूसरे चरण में कांग्रेस के 30 से ज्यादा दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है. प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा सहित पार्टी के 22 विधायक, तीन सांसद और 7 पूर्व मंत्रियों की साख भी दांव पर है.

पार्टी ने इन नेताओं को फ्री हैंड दिया: दरसअल, यहां पार्टी को मिलने वाली जीत या हार ही प्रदेश में ढाई साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में जनता का मूड तय करेगी. वहीं, जहां तक पार्टी के दिग्गज नेताओं, विधायकों और सांसदों की साख का सवाल है, तो इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन और टिकट वितरण में विधायकों, सांसदों और पूर्व मंत्रियों की जमकर चली थी. पार्टी ने उन्हें फ्री हैंड दिया था. ऐसे में जहाँ पार्टी के जीते हुए विधायक और सांसद हैं, वहां उनकी मर्जी से ही प्रत्याशियों का चयन हुआ है. इसलिए प्रत्याशियों की हार-जीत की जिम्मेदारी भी विधायकों, सांसदों और पूर्व मंत्रियों की ही होगी.

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जोधपुर नगर निगम चुनाव: बड़े नेताओं की साख इसलिए दांव पर है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर नगर निगम का चुनाव भी दूसरे चरण में है. इसी तरह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र टोंक नगर परिषद का चुनाव भी दूसरे चरण में है. वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के गृह जिले सीकर नगर परिषद का चुनाव भी दूसरे चरण में है. सांसद कुलदीप इंदौरा के निर्वाचन क्षेत्र हनुमानगढ़, मुरारी लाल मीणा के निर्वाचन क्षेत्र दौसा नगर परिषद और सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के निर्वाचन क्षेत्र के तहत आने वाले बालोतरा नगर परिषद के चुनाव भी दूसरे ही चरण में हैं.

नगर निगम में इन नेताओं की साख दांव पर है:

- जोधपुर: अशोक गहलोत

- अजमेर: राजकुमार जयपाल, धर्मेंद्र राठौड़

- कोटा: शांति धारीवाल, प्रहलाद गुंजल

- जयपुर: प्रताप सिंह खाचरियावास, रफीक खान, आमिर कागजी

- पाली: भीमराज भाटी

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निकायों में इन विधायकों की साख दांव पर है:

- टोंक से सचिन पायलट

- सीकर से राजेंद्र पारीक व गोविंद सिंह डोटासरा

- अटरू से प्रमोद जैन भाया

- हिंडोली से अशोक चांदना

- तारानगर से नरेंद्र बुडानिया

- श्रीकरनपुर से रुपिंदर सिंह कुन्नर

- दौसा से मुरारी लाल मीणा व डीसी बैरवा

- गंगापुर सिटी से रामकेश मीणा

- पाली से भीमराज भाटी

- किशनगढ़ से विकास चौधरी

- हनुमानगढ़ से कुलदीप इंदौरा व अभिमन्यु पूनिया

- सूरजगढ़ से श्रवण कुमार

- मुंडावर से ललित यादव

- धोरीमन्ना से हरीश चौधरी

- कुशलगढ़ से रमिला खड़िया

- टोडाभीम से घनश्याम मेहर

- बसेड़ी से संजय जाटव

- बामनवास से इंदिरा मीणा

- नोखा से सुशीला डूडी

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निकायों में इन पूर्व मंत्रियों की साख भी दांव पर है:

- गुलाबपुरा से रामलाल जाट

- खाजूवाला से गोविंद राम मेघवाल

- पोकरण से सालेह मोहम्मद

- डीग से विश्वेंद्र सिंह

- सलूंबर से रघुवीर मीणा

- पुष्कर से नसीम अख्तर इंसाफ

- निंबाहेड़ा से उदयलाल आंजना

निकाय चुनाव नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय करेगा: इस मामले को लेकर राजनीतिक विश्लेषक योगेश शर्मा का कहना है कि प्रदेश में निकाय चुनाव कांग्रेस के नेताओं का भविष्य तय करेगा. इसकी वजह यह है कि पार्टी के पास इस बार निकाय चुनाव में बढ़त लेने का अच्छा मौका है, क्योंकि भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक माना जाने वाला सवर्ण वर्ग यूजीसी जैसे मुद्दों को लेकर नाराज है. कई जगहों पर भाजपा के नेताओं को यूजीसी के मुद्दे पर विरोध भी झेलना पड़ा है. वहीं, युवा वर्ग भी खासतौर पर पेपर लीक और अन्य मामलों को लेकर भाजपा और मोदी सरकार से नाराज है. ऐसे में कांग्रेस के सामने यह बेहतरीन मौका है.

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60 फीसदी टिकट युवा वर्ग को: कांग्रेस ने दावे भी किए हैं कि उन्होंने निकाय चुनाव में 60 फीसदी टिकट युवा वर्ग को दिए हैं. जहां तक नेताओं की साख का सवाल है, तो उसकी बड़ी वजह यह भी है कि प्रदेश नेतृत्व ने निकाय चुनाव के टिकट वितरण में विधायकों, सांसदों और पूर्व मंत्रियों को फ्री हैंड दिया था. उनकी मर्जी से ही उम्मीदवार तय हुए हैं. इसलिए हार-जीत का जो भी परिणाम होगा, उसका असर सीधे विधायकों और सांसदों पर पड़ेगा. अगर उन्होंने अपने-अपने निकायों में जीत दिलाई, तो इसका फायदा उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में मिलेगा और अगर हार हुई, तो उनके फैसलों पर सवाल खड़े होंगे. साथ ही, उनके आगे के राजनीतिक भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा. इसके अलावा, क्षेत्र में उनके विरोधी नेताओं को उन पर हमलावर होने का मौका मिल जाएगा.

सभी नेताओं ने एकजुटता के साथ लड़ा चुनाव: वहीं, प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी का कहना है कि निकाय चुनाव के दूसरे चरण में भी ज्यादातर निकायों में कांग्रेस के बोर्ड बनेंगे, क्योंकि कांग्रेस पार्टी के तमाम विधायकों, सांसदों और पार्टी के बड़े नेताओं ने ग्राउंड रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों का चयन किया है. केवल जिताऊ प्रत्याशियों को ही टिकट दिए गए हैं. ऐसे में हमारे प्रत्याशियों की बड़ी जीत होगी. तमाम जिलों में पार्टी के सभी नेताओं ने एकजुटता के साथ प्रत्याशियों के समर्थन में प्रचार किया है और उनके लिए जनता से वोट मांगे हैं. जनता में भजनलाल सरकार के शासन को लेकर भी नाराजगी है, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस पार्टी को मिलेगा.

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