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250 खातों में घुमाए पैसे, 'बॉस' बनकर कंपनी से 6.80 करोड़ की ठगी, जयपुर साइबर पुलिस ने एक हफ्ते में खोला राज

जयपुर में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने कंपनी के सीईओ और बॉस बनकर 6.80 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह के 4 आरोपियों को एक सप्ताह में गिरफ्तार कर लिया। ठगों ने अकाउंटेंट के कंप्यूटर में व्हाट्सएप प्रोफाइल बदलकर खातों में फर्जी…

Navbharat Times के अनुसार3 सितंबर 2026 को 10:33 am बजे
250 खातों में घुमाए पैसे, 'बॉस' बनकर कंपनी से 6.80 करोड़ की ठगी, जयपुर साइबर पुलिस ने एक हफ्ते में खोला राज

सौजन्य से:- Navbharat Times

जयपुर में स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने कंपनी के सीईओ और बॉस बनकर 6.80 करोड़ रुपये ठगने वाले गिरोह के 4 आरोपियों को एक सप्ताह में गिरफ्तार कर लिया। ठगों ने अकाउंटेंट के कंप्यूटर में व्हाट्सएप प्रोफाइल बदलकर खातों में फर्जी निर्देश भेजे थे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए 3.50 करोड़ रुपये होल्ड कराए।

जयपुर: साइबर ठग आए दिन ठगी के नए नए तरीके निकालते हैं। बीते कुछ दिनों से बॉस बनकर ठगी की वारदातें की जा रही है। पिछले दिनों जयपुर में ऐसी ही वारदात हुई थी। एक बड़ी कंपनी सीईओ की ओर से स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि किसी व्यक्ति ने खुद को कंपनी का बॉस बता कर अकाउंटेंट से चेटिंग की और 6.80 करोड़ रुपये अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर ठगी कर ली। स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने महज एक सप्ताह में इस ठगी का खुलासा करते हुए चार बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।

बॉस बनकर अकाउंटेंट को किया मैसेज

एडीजी वीके सिंह ने बताया कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के अकाउंटेंट के कंप्यूटर को निशाना बनाकर व्हाट्सएप की संपर्क सूची में वास्तविक निदेशक के नंबर को हटाकर अपने नंबर को उसी नाम और प्रोफाइल फोटो के साथ जोड़ दिया। इसके बाद निदेशक और अकाउंटेंट के बीच पहले हुई बातचीत की नकल तैयार कर दी गई। इससे अकाउंटेंट को लगा कि वह कंपनी के निदेशक से ही बातचीत कर रहा है। साइबर ठगों के निर्देश पर कंपनी के खाते से कुल 6 करोड़ 80 लाख रुपये तीन बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए गए।

पुलिस की तत्परता से बचे 3.50 करोड़ रुपये

घटना की जानकारी मिलते ही केंद्रीय साइबर अपराध पुलिस और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की टीम ने बैंकिंग लेन-देन पर तत्काल कार्रवाई शुरू की। पुलिस के संयुक्त प्रयासों से ठगी की कुल रकम में से करीब 3.50 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में रुकवाए गए। इनके वापस दिलाने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में रखने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करता था। ऐसे खातों को उपलब्ध कराने वाले लोगों को कमीशन दिया जाता था। ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद उसे चेक, एटीएम, यूपीआई, नकद जमा मशीन, डिजिटल पर्स और अन्य बैंक खातों के माध्यम से कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता था।

टेलीग्राम ग्रुप के जरिए होता था पूरा लेनदेन

आरोपियों द्वारा टेलीग्राम के अलग अलग चैनल के माध्यम से बैंक खाते, एटीएम, सिम और पासबुक की व्यवस्था की जाती थी। जांच में सामने आया कि एक बैंक खाते की किट के लिए करीब 10 से 15 हजार रुपये तक दिए जाते थे। इन खातों में ठगी की रकम मंगवाने के बाद तत्काल दूसरे खातों या डिजिटल माध्यमों से आगे भेज दी जाती थी। लाभार्थी तीन बैंक खातों से रकम आगे करीब 250 बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे। इस प्रकार रकम को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया।

ये चार आरोपी गिरफ्तार

स्टेट साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें मयंक कसौटिया, बृजमोहन द्रोण उर्फ लक्की, समानाराम और मोहित यादव उर्फ मोती शामिल है। मयंक और बृजमोहन जयपुर के रहने वाले हैं जबकि समानाराम कुचामन डीडवाना और मोहित यादव सीकर का रहने वाला है।

सिंगापुर और हांगकांग में बैठे मास्टरमाइंड तक जुड़े तार

जांच में साइबर ठगी के इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आए हैं। बैंक से प्राप्त लेन-देन संबंधी इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) पतों के विश्लेषण में पाया गया कि ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों में पहुंचने के बाद सिंगापुर और हांगकांग में बैठे गिरोह के मास्टरमाइंड द्वारा इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इसके बाद रकम को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों, क्यूआर कोड और डिजिटल माध्यमों से घुमाया गया।

लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।

राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।

विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।

पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत

पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें

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