कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस का भव्य समापन, सर्वसम्मति से अपनाया गया 'जयपुर घोषणा पत्र–2026'
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस का भव्य समापन, सर्वसम्मति से अपनाया गया 'जयपुर घोषणा पत्र–2026' सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि शांति उच्च विश्वास वाले समाज की आधारशिला है. Published : August 2, 2…

सौजन्य से:- ETV Bharat
कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस का भव्य समापन, सर्वसम्मति से अपनाया गया 'जयपुर घोषणा पत्र–2026'
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि शांति उच्च विश्वास वाले समाज की आधारशिला है.
Published : August 2, 2026 at 9:25 PM IST
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में तीन दिन तक चले 'कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस-2026' का रविवार को भव्य समापन हुआ. होटल द ललित में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत समेत कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया. सम्मेलन में शांति, मध्यस्थता, न्याय तक आसान पहुंच और विधि के शासन को मजबूत करने के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक मंथन हुआ.
समापन समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् के गायन से हुई. राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया. उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में किए जा रहे तकनीकी नवाचारों और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से न्याय को आमजन तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी.
सर्वसम्मति से अपनाया गया 'जयपुर घोषणा-पत्र 2026': सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 'जयपुर डिक्लेरेशन ऑन पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ' रहा. सम्मेलन में 'जयपुर घोषणा-पत्र 2026' को सर्वसम्मति से अपनाया गया. घोषणा-पत्र में मध्यस्थता को अधिक सुलभ, प्रभावी, मानवीय और भरोसेमंद न्याय विकल्प बनाने पर जोर दिया गया है. घोषणा-पत्र के जरिए सीमा-पार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने और कॉमनवेल्थ देशों के बीच मध्यस्थता के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई. साथ ही न्यायालयों में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए मध्यस्थता को प्रभावी माध्यम के तौर पर विकसित करने पर भी जोर दिया गया.
I attended the Valedictory Session of the Three-Day International Conference on “Commonwealth Peace Mediation and the Rule of Law”, jointly organised by the Rajasthan State Legal Services Authority under the aegis of the Rajasthan High Court, in Jaipur. It is an honour that our… pic.twitter.com/ef7pisFjsF
— Diya Kumari (@KumariDiya) August 2, 2026
सम्मेलन में शिरकत करने आए न्याय जगत के विशेषज्ञों ने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी विवादों को सुलझाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सामाजिक विश्वास, संवाद और स्थायी शांति स्थापित करने का प्रभावी माध्यम भी बन सकती है. आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से मध्यस्थता की प्रक्रिया को और अधिक तेज, पारदर्शी और सुलभ बनाने पर भी चर्चा हुई.
मध्यस्थों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर जोर: सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने मध्यस्थों के प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया. वक्ताओं ने कहा कि प्रभावी मध्यस्थता व्यवस्था के लिए प्रशिक्षित और सक्षम मध्यस्थों का नेटवर्क तैयार करना जरूरी है. इसके साथ ही मध्यस्थता के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर शोध, नई तकनीकों के इस्तेमाल और विभिन्न देशों के बीच अनुभव साझा करने की जरूरत भी रेखांकित की गई. सम्मेलन में यह विचार सामने आया कि मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था के वैकल्पिक माध्यम के साथ-साथ सामाजिक संवाद और सौहार्द का महत्वपूर्ण साधन बनाया जाना चाहिए.
जस्टिस विक्रम नाथ बोले-'शांति उच्च विश्वास वाले समाज की आधारशिला': समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने मुख्य संबोधन दिया. उन्होंने कहा कि शांति उच्च विश्वास वाले समाज की आधारशिला है और मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए विश्वास आधारित समाज जरूरी है. जस्टिस विक्रम नाथ ने मध्यस्थता को केवल विवाद समाधान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि मध्यस्थता जीवन जीने का तरीका बने और समाज में संवाद, विश्वास तथा आपसी समझ को मजबूत करे. उन्होंने सामाजिक सौहार्द और विश्वास के जरिए विवादों के समाधान की आवश्यकता पर भी जोर दिया.
‘न्याययान’ सॉफ्टवेयर लॉन्च: समापन समारोह में जस्टिस विक्रम नाथ ने 'न्याययान-द डिजिटल वे ऑफ जस्टिस' सॉफ्टवेयर लॉन्च किया. इसे राजस्थान की न्यायपालिका में डिजिटल न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. 'न्याययान' के माध्यम से न्यायालयों में पेपरलेस व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है. इसके तहत 1,495 न्यायालयों और 1,517 न्यायिक अधिकारियों को पेपरलेस प्रणाली से जोड़ा जाएगा. इस डिजिटल पहल में 36 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स न्यायालय और 12 वाणिज्यिक न्यायालय भी शामिल हैं. तकनीक आधारित इस पहल का मकसद न्यायिक प्रक्रिया में कागजी कामकाज को कम करना, दस्तावेजों के डिजिटल प्रबंधन को बढ़ावा देना और न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाना है.
पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट: शांतिपूर्ण प्रदर्शन एक अधिकार,बल प्रयोग का कारण नहीं
जस्टिस वशीस्ट कोकाराम-'जयपुर को मिलेगी शांति के शहर की नई पहचान': बहामास कोर्ट ऑफ अपील के जस्टिस वशीस्ट कोकाराम ने सम्मेलन में जयपुर घोषणा-पत्र की महत्ता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि 'जयपुर घोषणा-पत्र' के माध्यम से जयपुर को शांति और संवाद के शहर के रूप में नई पहचान मिल सकती है. उन्होंने वैश्विक स्तर पर शांतिपूर्ण विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच विभिन्न देशों के बीच न्यायिक और कानूनी सहयोग को मजबूत करने में मदद करते हैं.
दीया कुमारी बोलीं-'जयपुर अंतरराष्ट्रीय शांति संवाद के लिए आदर्श स्थल': उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने सम्मेलन के समापन सत्र में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि राजस्थान के लिए यह गौरव की बात है कि राज्य में कॉमनवेल्थ के प्रतिष्ठित न्यायविदों और विधि विशेषज्ञों की मौजूदगी में ऐसा महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ. उन्होंने कहा कि सम्मेलन ने भारत और कॉमनवेल्थ देशों के न्यायिक और कानूनी क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों को एक मंच पर लाकर शांति, मध्यस्थता और न्याय तक पहुंच को मजबूत करने के विषय पर विचार-विमर्श का अवसर दिया. उन्होंने जयपुर की संवाद और सौहार्द की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जयपुर अंतरराष्ट्रीय शांति संवाद के लिए आदर्श स्थल है. उन्होंने उम्मीद जताई कि 'जयपुर घोषणा-पत्र' कॉमनवेल्थ देशों में मध्यस्थता व्यवस्था को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के वैश्विक संवाद साझा प्रतिबद्धताओं को मजबूत करते हैं. विधि का शासन, प्रभावी मध्यस्थता और सभी के लिए सुलभ न्याय सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण समाज की बुनियाद है.
जाम्बिया और श्रीलंका के न्यायाधीशों ने भी रखे विचार: जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आभा नायर पटेल ने संवाद को शांति की नींव बताया. उन्होंने शांतिपूर्ण समाज के निर्माण में आपसी बातचीत और समझ की भूमिका को रेखांकित किया. श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएचएमडी नवाज ने भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया. उन्होंने शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मध्यस्थता की आधारशिला बताते हुए कहा कि विवादों को टकराव के बजाय संवाद और समझ के जरिए हल करने की दिशा में मध्यस्थता प्रभावी भूमिका निभा सकती है.
वैश्विक शांति और न्याय के लिए नई दिशा देगा जयपुर घोषणा-पत्र: तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न सत्रों में मध्यस्थता, विधि का शासन, सीमा-पार विवादों का समाधान, न्याय तक पहुंच, डिजिटल न्याय व्यवस्था और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई. सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों का मानना रहा कि ‘जयपुर घोषणा-पत्र 2026’ मध्यस्थता और शांतिपूर्ण विवाद समाधान के वैश्विक प्रयासों को नई दिशा दे सकता है. घोषणा-पत्र के जरिए कॉमनवेल्थ देशों के बीच सहयोग, न्यायिक अनुभवों के आदान-प्रदान और मध्यस्थता की संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है. विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई कि जयपुर घोषणा-पत्र आने वाले समय में मध्यस्थता को अधिक प्रभावी, मानवीय और जनसुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा.
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