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नगर निकाय चुनाव में जीत का जश्न पड़ेगा भारी; जयपुर में 13 सितंबर से विजय जुलूस पर रोक

नगर निकाय चुनाव में जीत का जश्न पड़ेगा भारी; जयपुर में 13 सितंबर से विजय जुलूस पर रोक 14 सितंबर को मतगणना के बाद अगर किसी प्रत्याशी की जीत होती है, तो समर्थकों के साथ सड़क पर जुलूस निकालकर जीत का जश्न मनाने की अनुमति नही…

Hindustan के अनुसार9 सितंबर 2026 को 01:04 pm बजे
नगर निकाय चुनाव में जीत का जश्न पड़ेगा भारी; जयपुर में 13 सितंबर से विजय जुलूस पर रोक

सौजन्य से:- Hindustan

नगर निकाय चुनाव में जीत का जश्न पड़ेगा भारी; जयपुर में 13 सितंबर से विजय जुलूस पर रोक

14 सितंबर को मतगणना के बाद अगर किसी प्रत्याशी की जीत होती है, तो समर्थकों के साथ सड़क पर जुलूस निकालकर जीत का जश्न मनाने की अनुमति नहीं होगी। यही रोक बाद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद भी लागू रहेगी।

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में किसके सिर जीत का ताज सजेगा, इसका फैसला 14 सितंबर को मतगणना के साथ हो जाएगा। नतीजे सामने आते ही कहीं ढोल-नगाड़े बजेंगे, कहीं समर्थक नारे लगाएंगे और जीत का जश्न मनाने की तैयारी होगी। लेकिन जयपुर में चुनाव जीतने के बाद सड़कों पर निकलकर शक्ति प्रदर्शन करना आसान नहीं होगा। पुलिस प्रशासन ने विजय जुलूस पर रोक लगा दी है।

जयपुर पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में नगर निकाय चुनाव के मद्देनजर 13 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक किसी भी तरह का विजय जुलूस निकालने पर प्रतिबंध रहेगा। एडिशनल कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. राजीव पचार ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। आदेश सीधे तौर पर उन प्रत्याशियों और समर्थकों पर असर डालेगा, जो चुनावी जीत के बाद जुलूस निकालकर अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में रहते हैं।

जीतने वाला पार्षद हो या अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, जुलूस की अनुमति नहीं

आदेश में साफ किया गया है कि जयपुर पुलिस आयुक्तालय के तहत आने वाले नगरीय निकाय चुनाव में निर्वाचित सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष किसी भी प्रकार का विजय जुलूस नहीं निकाल सकेंगे।

यानी 14 सितंबर को मतगणना के बाद अगर किसी प्रत्याशी की जीत होती है, तो समर्थकों के साथ सड़क पर जुलूस निकालकर जीत का जश्न मनाने की अनुमति नहीं होगी। यही रोक बाद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद भी लागू रहेगी।

प्रशासन ने यह कदम कानून-व्यवस्था, लोक शांति और जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया है। चुनाव के दौरान अलग-अलग राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के समर्थक आमने-सामने रहते हैं। ऐसे में जीत के बाद निकलने वाले जुलूस को लेकर किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो, इसके लिए पहले ही प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

14 सितंबर को आएगा रिजल्ट, तभी शुरू होगा असली सस्पेंस

नगर निकाय चुनाव के पहले चरण में 9 सितंबर और दूसरे चरण में 11 सितंबर को मतदान होना है। इसके बाद 14 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। यानी 14 सितंबर को यह साफ हो जाएगा कि शहर की सरकार किसके हाथ में जा रही है।

लेकिन चुनावी तस्वीर पूरी तरह 14 सितंबर को ही साफ नहीं होगी। 21 सितंबर को अध्यक्ष पद और 22 सितंबर को उपाध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन होना है। यही वजह है कि विजय जुलूस पर रोक की अवधि 25 सितंबर तक रखी गई है।

इस दौरान चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार और उनके समर्थक जश्न तो मना सकेंगे, लेकिन सार्वजनिक सड़कों पर विजय जुलूस निकालकर शक्ति प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे।

उल्लंघन किया तो सीधे कानूनी कार्रवाई

प्रशासन ने आदेश की पालना सुनिश्चित करने के लिए इसे व्यापक स्तर पर प्रचारित करने के निर्देश दिए हैं। आदेश को पुलिस थानों, प्रमुख सार्वजनिक स्थानों, जिला निर्वाचन अधिकारी और जिला कलेक्टर कार्यालयों के सूचना पट्टों पर प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही समाचार पत्रों के जरिए भी लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाएगी।

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे में नगर निकाय चुनाव का परिणाम चाहे किसी भी दल या प्रत्याशी के पक्ष में आए, जीत के बाद जयपुर की सड़कों पर निकलने वाला पारंपरिक विजय जुलूस इस बार नजर नहीं आएगा। चुनावी जीत का जोश रहेगा, समर्थकों में उत्साह भी होगा, लेकिन सार्वजनिक तौर पर जश्न मनाने की सीमा प्रशासन ने पहले ही तय कर दी है।

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