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राजस्थान पुलिस का बड़ा ऐक्शन, बाल यौन शोषण कंटेंट को लेकर 1 5 हजार से ज्यादा फोन नंबर किए बंद

राजस्थान पुलिस का बड़ा ऐक्शन, बाल यौन शोषण कंटेंट को लेकर 1 5 हजार से ज्यादा फोन नंबर किए बंद अधिकारी ने बताया कि पुलिस को ऐसी गतिविधियों से संबंधित करीब 25,000 सूचनाएं मिली हैं और इनकी जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है।…

livehindustan.com के अनुसार28 सितंबर 2026 को 05:04 pm बजे
राजस्थान पुलिस का बड़ा ऐक्शन, बाल यौन शोषण कंटेंट को लेकर 1 5 हजार से ज्यादा फोन नंबर किए बंद

सौजन्य से:- livehindustan.com

राजस्थान पुलिस का बड़ा ऐक्शन, बाल यौन शोषण कंटेंट को लेकर 1 5 हजार से ज्यादा फोन नंबर किए बंद

अधिकारी ने बताया कि पुलिस को ऐसी गतिविधियों से संबंधित करीब 25,000 सूचनाएं मिली हैं और इनकी जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है।

राजस्थान पुलिस ने बाल यौन शोषण सामग्री (सीएसईएएम) के कथित ऑनलाइन प्रसार से जुड़े करीब 15,326 फोन नंबर, लगभग 7,800 यूआरएल और प्रोफाइल और 100 टूल को बंद कराया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के. सिंह ने कहा कि पुलिस को ऐसी गतिविधियों से संबंधित करीब 25,000 सूचनाएं मिली हैं और इनकी जांच के बाद कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने पुलिस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि लापता और शोषित बच्चों के राष्ट्रीय केन्द्र (एनसीएमईसी) से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ के पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए हैं। सिंह ने कहा, सीएमईसी की गुप्त रिपोर्ट के आधार पर बार-बार अपराध में संलिप्त लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

कैसे फैलाए जाते थे ऐसे कंटेंट

उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे ऐप पर गुप्त और सशुल्क समूहों या चैनलों का इस्तेमाल सीएसईएएम के प्रसार के लिए कर रहे हैं।पुलिस अधिकारी ने कहा, यूजर्स फर्जी पहचान के जरिए ऐसे समूहों में शामिल होते हैं और डायरेक्ट मैसेज के जरिए से कंटेंट शेयर करते हैं। कुछ मामलों में सामग्री गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टॉरेज सेवाओं पर अपलोड कर केवल उसके लिंक साझा किए जाते हैं। सिंह ने लोगों से अपील की कि ऐसी सामग्री को डाउनलोड, संग्रहित या साझा करने के बजाय इसकी सूचना पुलिस को दें।

उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण सामग्री अपने पास रखने या उसका प्रसार करने पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य लागू कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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