होम›धर्म-आस्था›World Tourism Day : बाघ बने अलवर के आकर्षण का केंद्र, एक दशक में टाइगर के साथ टूरिस्ट भी हुए चार गुना
धर्म-आस्था

World Tourism Day : बाघ बने अलवर के आकर्षण का केंद्र, एक दशक में टाइगर के साथ टूरिस्ट भी हुए चार गुना

World Tourism Day : बाघ बने अलवर के आकर्षण का केंद्र, एक दशक में टाइगर के साथ टूरिस्ट भी हुए चार गुना विश्व पर्यटन दिवस पर जानिए अलवर कैसे पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है. पीयूष पाठक की रिपोर्ट... Pub…

etvbharat.com के अनुसार27 सितंबर 2026 को 11:05 am बजे
World Tourism Day : बाघ बने अलवर के आकर्षण का केंद्र, एक दशक में टाइगर के साथ टूरिस्ट भी हुए चार गुना

सौजन्य से:- etvbharat.com

World Tourism Day : बाघ बने अलवर के आकर्षण का केंद्र, एक दशक में टाइगर के साथ टूरिस्ट भी हुए चार गुना

विश्व पर्यटन दिवस पर जानिए अलवर कैसे पर्यटन की दृष्टि से पर्यटकों की पसंद बनता जा रहा है. पीयूष पाठक की रिपोर्ट...

Published : September 27, 2026 at 3:30 PM IST

अलवर: पर्यटकों के लिए अलवर में बाघ प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बन रहा है. यही कारण है कि एक दशक में जितनी मात्रा में बाघ बढ़े, उसी तुलना में पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई है. एक दशक पूर्व साल 2015 में अलवर में 13 टाइगर थे, तब अलवर घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 2 लाख थी. वहीं, 2026 में बाघों की संख्या चार गुना बढ़कर 56 तक पहुंच गई है.

इसी तरह अलवर पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या भी करीब साढ़े सात लाख तक पहुंच गए. एक दशक में अलवर पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या 49 लाख को पार कर गई है. यही कारण है कि पर्यटन अब अलवर जिले का मुख्य रोजगार एवं जीडीपी वृद्धि का आधार बनने लगा है. अलवर में पर्यटन को पंख लगने में हाईटेक रेल सुविधा एवं एक्सप्रेसवे व हाईवे से जुड़ाव का बड़ा योगदान रहा है.

पर्यटकों की संख्या में अलवर आगे : अलवर पर्यटकों के मामले में आसपास जिलों से अग्रणी पायदान पर है. महज पांच साल में अलवर में घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या 30 लाख तक पहुंच गई. इसकी तुलना में पड़ोसी जिले में दौसा में 21 लाख, झुंझुनू में 17 लाख ही पर्यटक घूमने पहुंचे, जबकि एक दशक में अलवर जिले में आने वाले पर्यटकों की संख्या 49 लाख 45 हजार से ज्यादा रही. पिछले कई सालों से अलवर घूमने आने वाले टूरिस्ट की संख्या 7 लाख के पार बनी है. हालांकि, कोरोना काल और इससे पूर्व अलवर आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 2 लाख थी, लेकिन कोरोना काल के बाद अलवर के पर्यटन को तेजी से पंख लगे. गत तीन सालों में पर्यटकों की संख्या प्रति वर्ष 7 लाख को पार कर गई है.

पर्यटन विभाग के अधिकारी संजय खन्ना ने बताया कि वर्ष 2015 में अलवर जिले के पर्यटन केंद्रों पर 2,07,424 पर्यटक पहुंचे थे. वर्ष 2019 में यह संख्या बढ़कर 4,90,469 हो गई. कोरोना काल में 2020 में पर्यटकों की संख्या घटकर 2,08,204 रह गई, लेकिन इसके बाद पर्यटन ने तेजी से वापसी की. अलवर जिले में वर्ष 2021 में 3,76,189, 2022 में करीब 6.63 लाख, 2023 में 8,25,590, 2024 में 7,25,863 और 2025 में 7,29,482 पर्यटक पहुंचे.

इसे भी पढे़ं. वर्ल्ड टूरिज्म डे : पर्यटकों की एंट्री फ्री, राजस्थानी अंदाज में हुआ सैलानियों का स्वागत

रेल व रोड कनेक्टिविटी का पर्यटन बढ़ाने में बड़ा रोल : नेचर गाइड लोकेश खंडेलवाल ने बताया कि एक दशक में अलवर के पर्यटन को पंख लगाने में रेल व रोड कनेक्टिविटी का बड़ा रोल रहा है. एक दशक में अलवर में हाईटेक रेल सुविधा का तेजी से विस्तार हुआ है. इन दिनों वंदे भारत, शताब्दी एक्सप्रेस, डबल डेकर, गरीब रथ और कई हाईटेक एक्सप्रेस ट्रेन अलवर होकर गुजर रही है.

अलवर के बड़े शहरों से कनेक्टिविटी : इससे दिल्ली, जयपुर, अजमेर, जोधपुर, चंडीगढ़ जैसे शहर अलवर से सीधे जुड़ गए हैं. इसका लाभ यह हुआ कि इन बड़े शहरों में आने वाले पर्यटकों के लिए अलवर पहुंचना आसान हो गया. वहीं, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, दिल्ली-जयपुर हाईवे के चलते भी अलवर के बड़े शहरों से कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ी है. सीधी कनेक्टिविटी के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक अलवर पहुंच रहे हैं.

पर्यटन बना अलवर का मुख्य रोजगार : अलवर जिले से भिवाड़ी एवं नीमराणा जैसे विकसित औद्योगिक क्षेत्र अलग होने के बाद अलवर में पर्यटन ही मुख्य रोजगार का स्रोत रह गया है. पर्यटन के चलते रोजगार बढ़ने का असर अलवर की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है. पर्यटन को पंख लगने से अलवर में होटल व्यवसाय, टैक्सी चालकों और चाय-पान व ढाबों वालों की आय भी बढ़ी है. यही कारण है कि जिले के पर्यटन केन्द्रों के आसपास लोग अब छोटे बड़े व्यवसाय कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं.

इसे भी पढे़ं. विदेशी पर्यटक बनाम घरेलू पर्यटक : सीकर ने जयपुर को पीछे छोड़ा, जानिए कैसे बदल रहा राजस्थान का पर्यटन मॉडल

एक ही जगह झील, किले, मंदिर और सरिस्का : अलवर जिले को पर्यटन केन्द्रों की खान माना जाता है. कारण है कि यहां 52 किले, धार्मिक पर्यटन स्थल महाराजा भर्तृहरि की तपोभूमि, महाभारतकालीन ऐतिहासिक पांडुपोल हनुमान मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, टाइगर रिजर्व सरिस्का, सिलीसेढ़ झील, भूतिया किला के नाम से विख्यात अजबगढ़-भानगढ़, बाला किला समेत अनेक पर्यटन केन्द्र हैं. एक ही जगह सिलीसेढ़ झील में बोटिंग का आनंद, भानगढ़ किले का हॉरर, ऐतिहासिक पांडुपोल व भर्तृहरि मंदिर व टाइगर रिजर्व में बाघों की साइटिंग का आनंद मिलने के कारण पर्यटकों की पहली पसंद अलवर बन रहा है.

अलवर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के प्रयास : केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं अलवर सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा कि अलवर विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रहा है. अलवर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं. इसके लिए अलवर में एनसीआर का सबसे बड़े चिड़ियाघर की स्थापना, नगर वन, श्रीराम वाटिका सहित अन्य पर्यटन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं, जिससे अलवर में पर्यटन को बढ़ावा मिले. उन्होंने कहा कि पर्यटन बढ़ने से अलवर में रोजगार में भी वृद्धि होगी, जिसका लाभ आम व्यक्ति को मिल सकेगा.

इसे भी पढे़ं. 'पहियों पर महल' पहुंचा स्वर्णनगरी...सैलानियों का राजस्थानी संस्कृति एवं परंपरा से स्वागत

Powered by Reporting Rajasthan Files

संबंधित ख़बरें