राजस्थान सरकार ने UP में मौजूद पुरानी जयपुर रियासत की संपत्तियों पर ठोका दावा, खंगाले जा रहे 70 साल पुराने रिकॉर्ड
राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में तत्कालीन जयपुर रियासत की संपत्तियों पर 1949 के कोवेनेंट के तहत मालिकाना हक जताया है। इसके बाद यूपी प्रशासन ने 70 साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालने श…

सौजन्य से:- Navbharat Times
राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में तत्कालीन जयपुर रियासत की संपत्तियों पर 1949 के कोवेनेंट के तहत मालिकाना हक जताया है। इसके बाद यूपी प्रशासन ने 70 साल पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं।
जयपुर: राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के चार प्रमुख शहरों आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में स्थित तत्कालीन जयपुर रियासत की ऐतिहासिक संपत्तियों पर अपने स्वामित्व का दावा ठोका है। इस नए राजनीतिक व प्रशासनिक घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सात दशक से भी अधिक पुराने राजस्व और स्वामित्व अभिलेखों की दोबारा जांच शुरू कर दी है।
राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की ओर से यूपी सरकार को भेजे गए पत्र में इन संपत्तियों को आधिकारिक तौर पर राजस्थान सरकार के नाम दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा के जिलाधिकारियों को रिकॉर्ड की गहन सत्यापन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश जारी किए हैं।
1949 के कोवेनेंट को बनाया कानूनी आधार
राजस्थान सरकार ने अपने दावे का आधार 1949 के 'राजस्थान कोवेनेंट' के अनुच्छेद VI(2)(c) और 1952 के विलयकालीन दस्तावेजों को बनाया है। राज्य सरकार का तर्क है कि रियासती एकीकरण के समय जयपुर राज्य की राजस्थान सीमा से बाहर स्थित सभी परिसंपत्तियां और संपत्तियां हस्तांतरित होकर कानूनी रूप से राजस्थान सरकार के अधीन आ गई थीं।
प्रयागराज में जमीनों की रजिस्ट्री पर रोक, आगरा में ADA का जवाब
राजस्थान सरकार के इस दावे का सबसे बड़ा और तुरंत प्रभाव प्रयागराज में देखा गया है, जहां प्रशासन ने कटरा सवाई जयसिंह क्षेत्र के 1,263 मकानों और दुकानों की खरीद-बिक्री व दाखिल-खारिज पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है।
वहीं आगरा के जयपुर हाउस इलाके में आज एडीए, जीएसटी भवन और व्यावसायिक परिसर स्थित हैं। आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम. अरुनमोली ने स्पष्ट किया कि 31 मई 1969 के पंजीकृत बैनामे से यह साबित होता है कि नगर निगम ने यह जमीन राजस्थान सरकार के पीडब्ल्यूडी विभाग से खरीदी थी। सभी जिला प्रशासनों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही उत्तर प्रदेश शासन स्तर पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
लेखक के बारे मेंपुलकित सक्सेनापुलकित सक्सेना नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। वह साल 2022 नवंबर महीने से नवभारत टाइम्स की डिजिटल विंग से जुड़े। वर्तमान में राजस्थान के लिए काम करते हैं। 2019 में पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली के नेशनल टीवी चैनल में इनपुट डेस्क से की। बीते 7 सालों में टेलीविजन से लेकर सोशल मीडिया और अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। वर्तमान में नवभारत टाइम्स में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका में कार्यरत हैं।
राजस्थान की राजनीति, क्राइम, करंट अफेयर्स और ऑफ बीट खबरों पर नजर रखना पुलकित सक्सेना की पहली प्राथमिकता रहती है।
विशेषज्ञता- राजनीति, क्राइम, एनलिसिस, सियासी उठा पटक को कवर करना।
पत्रकारिता अनुभव: 7 साल से कार्यरत
पुलकित सक्सेना ने साल 2017 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2019 में देश की प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से दिल्ली में प्रथम श्रेणी से पोस्ट ग्रेजुएशन पत्रकारिता में किया। इसके बाद साल 2019 में दिल्ली से टीवी 100 न्यूज चैनल से पत्रकारिता की शुरुआत की। इसके बाद राजस्थान के यूट्यूब न्यूज चैनल में एंकरिंग, पैकेज क्रिएशन और सोशल मीडिया हैंडल के लिए सक्रियता से काम किया। साल 2022 के नवंबर महीने में वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में जुड़े। वर्तमान में बीते तीन साल से वह नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में डिजिटल कंटेट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।... और पढ़ें
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