राजस्थान की नदियों में बह रहा तेजाबी पानी! SC ने सरकार को लगाई फटकार
Advertisement राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने साफ कहा कि नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए ऐसा स्थायी समाधान तैयार किया जाए, जिसक…

सौजन्य से:- Aaj Tak News
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राजस्थान की जोजरी, बांडी और लूणी नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने साफ कहा कि नदियों में प्रदूषण रोकने के लिए ऐसा स्थायी समाधान तैयार किया जाए, जिसके लिए बार-बार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की जरूरत न पड़े. कोर्ट की सख्ती के बीच राजस्थान के मुख्य सचिव को भी जवाबदेह बनाया गया है.
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इससे पहले अदालत ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा था कि करीब 20 लाख लोगों की जिंदगी और स्वास्थ्य को आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के लिए खतरे में नहीं डाला जा सकता.
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सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी, लूणी और बांडी नदी में प्रदूषण से निपटने के लिए 20-सूत्रीय कार्ययोजना तैयार करने को कहा है. राजस्थान के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जिसमें सभी संबंधित विभाग और एजेंसियां शामिल होंगी. यह टास्क फोर्स हाई-पावर्ड कमेटी के साथ मिलकर काम करेगी और तीन सप्ताह के भीतर 20-सूत्रीय कार्ययोजना पेश करेगी.
एससी ने एसआईटी जांच को महज 'आईवॉश' बताया
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ कर रही है. अदालत इस बात पर भी सवाल उठा रही है कि नदियों में अवैध रूप से केमिकल कचरा और औद्योगिक अपशिष्ट छोड़ने वाली फैक्ट्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई. सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य की एसआईटी जांच को महज 'आईवॉश' बताया था, क्योंकि प्रदूषण की समस्या अब भी बनी हुई है.
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अदालत में सांगरिया कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) में जमा प्रदूषित पानी के तकनीकी ट्रीटमेंट प्लान पर भी चर्चा हुई. कोर्ट की अनुमति के बिना संबंधित फैक्ट्रियों को दोबारा शुरू नहीं किया जा सकेगा.
शासन तंत्र को 'ऑटो मोड' पर काम करना चाहिए- कोर्ट
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि शासन तंत्र को 'ऑटो मोड' पर काम करना चाहिए. नियमों के उल्लंघन का तुरंत पता लगाकर बिना न्यायिक हस्तक्षेप के सुधारात्मक कार्रवाई होनी चाहिए. अदालत ने राजस्थान सरकार को पाली औद्योगिक क्षेत्र को हटाने या स्थानांतरित करने पर फैसला लेने और प्राथमिकता के आधार पर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं. राजस्थान में जोजरी-बांडी-लूणी नदी तंत्र का प्रदूषण लंबे समय से न्यायिक निगरानी में है.
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