Sawan 2026 : जयपुर के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा शहर
Sawan 2026 : जयपुर के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा शहर सावन की शुरुआत पर जयपुर सहित राजस्थान के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष प…

सौजन्य से:- ETV Bharat
Sawan 2026 : जयपुर के शिवालयों में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजा शहर
सावन की शुरुआत पर जयपुर सहित राजस्थान के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई.
Published : July 30, 2026 at 2:05 PM IST
जयपुर : भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और पुण्यदायी माना जाने वाला सावन महीना आज से शुरू हो गया. सावन के पहले ही दिन जयपुर सहित पूरे राजस्थान में शिव भक्ति का अनुपम उत्साह देखने को मिला. सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं. "हर-हर महादेव", "बम-बम भोले" और "ॐ नमः शिवाय" के जयघोषों से मंदिर परिसर और पूरा वातावरण शिवमय हो उठा.
भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया : झारखंड महादेव मंदिर, ताड़केश्वर महादेव मंदिर सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पंचामृत अभिषेक, महाआरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया. श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का गंगाजल, शुद्ध जल, कच्चे दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति की कामना की.
सुबह से मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़ : सावन के पहले दिन सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु पूजा की थाली लेकर शिवालयों की ओर निकल पड़े. महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों में भगवान शिव के दर्शन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला. कई श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचे तो कई भक्त दूर-दराज से गंगाजल लेकर शिवलिंग का अभिषेक करने आए.
आकर्षक विद्युत सजावट : मंदिरों में भक्तों ने शिवलिंग पर जल, गंगाजल, कच्चा दूध, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, चंदन और पुष्प अर्पित किए. पूरे दिन मंदिरों में 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र का जाप निरंतर चलता रहा. जयपुर के प्रसिद्ध झारखंड महादेव मंदिर में सावन की शुरुआत के साथ विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया. मंदिर को रंग-बिरंगी फूल-मालाओं और आकर्षक विद्युत सजावट से सजाया गया.
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स्वयंसेवकों की भी तैनाती : सुबह मंगला आरती के बाद भगवान शिव का पंचामृत और रुद्राभिषेक किया गया. इसी प्रकार ताड़केश्वर महादेव मंदिर में भी हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन किए. मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. मंदिर समिति की ओर से दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए स्वयंसेवकों की भी तैनाती की गई.
समुद्र मंथन से जुड़ी है सावन की महिमा : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि इस पूरे महीने श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस दौरान व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया गया है. श्रद्धालु पूरे महीने नियमित रूप से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. इससे जीवन के दुख, कष्ट, रोग और बाधाएं दूर होती हैं.
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ये है सावन का महत्व : ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश भारद्वाज ने बताया कि सावन मास की महत्ता का संबंध समुद्र मंथन की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है. जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब सबसे पहले कालकूट विष निकला. उस विष की अग्नि से संपूर्ण सृष्टि संकट में आ गई थी. संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान किया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए.
जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक की परंपरा : भगवान शिव के शरीर में विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और विभिन्न पवित्र पदार्थों से अभिषेक किया. तभी से सावन मास में भगवान शिव का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है. इसी कारण श्रद्धालु सावन भर शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत अर्पित कर भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं.
उच्च राशि में बृहस्पति का विशेष संयोग : सावन के पहले दिन विशेष 'शिव वास योग' का शुभ संयोग भी बना है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस योग में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. श्रद्धालुओं ने इस विशेष योग में पूजा-अर्चना कर भगवान शिव से परिवार के सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की.
पंडित मुकेश भारद्वाज ने बताया कि इस वर्ष सावन मास में बृहस्पति अपनी उच्च राशि में स्थित हैं. ऐसी स्थिति लगभग 12 वर्षों में एक बार बनती है. यह संयोग विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं के लिए शुभ माना जा रहा है जो लंबे समय से किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं. सावन मास में नियमित रूप से व्रत, उपवास, जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त हो सकती है.
चार सावन सोमवार का रहेगा विशेष महत्व : इस वर्ष सावन मास में चार सोमवार पड़ेंगे. पहला सावन सोमवार 3 अगस्त, दूसरा 10 अगस्त, तीसरा 17 अगस्त और चौथा सोमवार 24 अगस्त को रहेगा. सावन सोमवार भगवान शिव की विशेष आराधना का दिन माना जाता है. इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. सावन के दौरान माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है.
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कांवड़ यात्रा को लेकर उत्साह : इस वर्ष चार मंगला गौरी व्रत रखे जाएंगे. विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से माता गौरी का व्रत और पूजन करेंगी. मंदिरों में माता पार्वती और भगवान शिव की संयुक्त आराधना के विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. सावन शुरू होते ही कांवड़ यात्रा को लेकर भी श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ गया है. शिवभक्त पवित्र नदियों का जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलेंगे. कई स्थानों पर कांवड़ियों के स्वागत के लिए सेवा शिविर, चिकित्सा शिविर और जलपान की व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं.
श्रद्धालुओं ने ये कहा : झारखंड महादेव मंदिर पहुंचे श्रद्धालु गजेंद्र सिंह ने कहा कि सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना है. इस महीने में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और मन को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है. श्रद्धालु पिंकी ने बताया कि वे प्रत्येक वर्ष सावन के पहले दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं. उनका विश्वास है कि श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती. वहीं, विक्रम सिंह ने कहा कि सावन केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है. इस महीने मंदिरों का वातावरण भक्तिमय हो जाता है और हर व्यक्ति भगवान शिव की भक्ति में लीन दिखाई देता है.
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पूरे महीने रहेंगे धार्मिक आयोजन : सावन मास 28 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान जयपुर सहित पूरे राजस्थान के शिवालयों में प्रतिदिन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महाआरती, भजन-कीर्तन, सत्संग, शिव महापुराण कथा और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. मंदिरों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई है. पंडित मुकेश भारद्वाज ने कहा कि सावन मास भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ समय माना जाता है.
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि पूरे सावन में श्रद्धा, संयम और सात्विक जीवन का पालन करते हुए भगवान शिव का नियमित अभिषेक, मंत्र जाप और आराधना करें. उनका विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा का फल अवश्य प्राप्त होता है और भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. सावन की शुरुआत के साथ ही जयपुर सहित पूरे प्रदेश में धार्मिक आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बन गया है. आने वाले चार सोमवार, मंगला गौरी व्रत, कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक, महाआरती और अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पूरा सावन माह शिव भक्ति की अविरल धारा में प्रवाहित होता रहेगा.
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