Nikay Chunav 2026 : जोधपुर निगम में कास्ट कॉम्बिनेशन, कांग्रेस की यह है खास रणनीति...
Nikay Chunav 2026 : जोधपुर निगम में कास्ट कॉम्बिनेशन, कांग्रेस की यह है खास रणनीति... जोधपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी के लिए प्रसन्न चंद मेहता और राजेंद्र सोलंकी के बीच मुकाबला होगा. मनोज वर्मा की रिपोर्ट... Publish…

सौजन्य से:- etvbharat.com
Nikay Chunav 2026 : जोधपुर निगम में कास्ट कॉम्बिनेशन, कांग्रेस की यह है खास रणनीति...
जोधपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी के लिए प्रसन्न चंद मेहता और राजेंद्र सोलंकी के बीच मुकाबला होगा. मनोज वर्मा की रिपोर्ट...
Published : September 23, 2026 at 1:11 PM IST
जोधपुर: नगर निगम चुनाव में महापौर की भिड़ंत की स्थिति साफ हो गई है. भाजपा से प्रसन्न चंद मेहता और कांग्रेस में हाइब्रिड मॉडल से उतरे राजेंद्र सोलंकी के बीच मुकाबला होगा. वर्तमान स्थिति में भाजपा के पास 100 पार्षदों वाले निगम में 52 सदस्य हैं. इनमें 7 निर्दलीय हैं. जबकि कांग्रेस के पास 44 खुद के, तीन निर्दलीय और एक रालोपा के सदस्य सहित कुल 48 सदस्य हैं. कांग्रेस बहुमत से तीन कम है, जबकि भाजपा एक ज्यादा.
कांग्रेस में पहले नरेश जोशी, प्रदीप गांग या गणपतसिंह चौहान में से किसी को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा थी, लेकिन लास्ट मोमेंट पर अशोक गहलोत और पार्टी की ओर से आए फोन ने पूरी रणनीति बदल दी. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार कांग्रेस ने यह प्लान क्यों बदला? इसकी वजह क्या है?
राजनीतिक समीकरणों से एक ही वजह निकल कर सामने आती है कि कांग्रेस को कास्ट कॉम्बिनेशन से क्रॉस वोटिंग की उम्मीद है. खुद राजेंद्र सोलंकी कह चुके हैं कि भाजपा के पास गए लोग उनके अपने हैं. उनके साथ पार्टी का काम किया है. उनको यकीन है कि उनका समर्थन मिलेगा और कांग्रेस का बोर्ड बनेगा.
कास्ट वोट से क्रॉस वोटिंग की उम्मीद : कांग्रेस ने राजेंद्र सिंह सोलंकी को महापौर का प्रत्याशी बनाया है. सोलंकी माली समाज से आते हैं, समाज में मजबूत पकड़ भी है. भाजपा खेमे में चार माली पार्षद हैं. इनमें दो माली पार्षद जो कांग्रेस के बागी थे वे भी भाजपा के साथ हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि सोलंकी की उम्मीदवारी से चार माली पार्षदों में से दो से तीन मत मिल सकते हैं, क्योंकि सोलंकी के कइयों से सीधे संबंध भी हैं.
इसके अलावा कांग्रेस छोड़कर भाजपा से चुनाव जीतने वाले एक पूर्व कांग्रेसी से भी सोलंकी के निजी संबंध हैं. दो अन्य निर्दलीय जो कांग्रेस के बागी हैं, उनसे भी क्रॉस वोट की उम्मीद है. इसके लिए जोर आजमाइश चल रही है. कांग्रेस को तीन मत ही चाहिए जो इस गणित से मिल सकते हैं. जिसके चलते हाइब्रिड फार्मूले पर कांग्रेस गई है.
कांग्रेस में भी नाराजगी हो सकती है : कांग्रेस ने नरेश जोशी व प्रदीप गांग को नामांकन के लिए तैयार किया था. दोनों सामान्य वर्ग से आते हैं. इनमें से एक को अंतिम प्रत्याशी बनाना था. इसके पीछे भी कांग्रेस की यही रणनीति थी कि नरेश जोशी ब्राह्मण होने से भाजपा में सेंधमारी कर सकते हैं. प्रदीप गांग जैन हैं, वो भी अपने वर्ग के वोट ले सकते हैं.
जबकि गणपत सिंह चौहान ने सबसे पहले अपना नामांकन मंगवाया था जो ओबीसी से आते हैं, लेकिन ऐन वक्त पर हालात बदल गए. ऐसे में सामान्य वर्ग के पार्षदों व दावेदारों की नाराजगी भी भारी पड़ सकती है, क्योंकि कांग्रेस ने 1992 में बने जोधपुर निगम में सिर्फ एक बार सवर्ण को मौका दिया है. बाकी माली समाज के ही महापौर बने हैं.
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कांग्रेस में माली समाज की मजबूत पकड़ : जोधपुर कांग्रेस में माली समाज की पकड़ मजबूत है. अशोक गहलोत खुद इसी समाज से आते हैं. उन्होंने अपनी सरकार के दौरान जोधपुर विकास प्राधिकरण बनाया तो उसका अध्यक्ष राजेंद्र सिंह सोलंकी को बनाया था. तीसरे कार्यकाल में भी उनको राज्यमंत्री का दर्जा दिया था. इससे पहले 1992 में नगर निगम बना तो पहले चुनाव में भाजपा का महापौर बना था.
1999 में कांग्रेस से शिवलालटाक बने, इसके बाद 2004 में ओमकुमारी गहलोत बनीं. 2009 में पहली बार सामान्य वर्ग से रामेश्वर दाधीच को मौका मिला. नगर निगम उत्तर-दक्षिण हुए तो उत्तर से 2020 में कुन्ती देवड़ा को महापौर बनाया. यानी कि अब तक पांच चुनाव में कांग्रेस ने तीन माली व एक ब्राह्मण को महापौर बनाया है. यही कारण है कि सोलंकी को इसी सोच के साथ उतारा गया है कि वे भाजपा में मौजूद समाज के वोटों में सेंधमारी कर सकते हैं.
सोलंकी के मैदान में उतरने से मुकाबला हुआ रोचक : भारतीय जनता पार्टी के महापौर पद के प्रत्याशी प्रश्नचंद मेहता के सामने राजेंद्र सिंह सोलंकी ही ऐसे उम्मीदवार हैं जो कुछ कर सकते हैं. जबसे उनका नाम सामने आया है, इसके बाद से शहर में इसकी चर्चा जोरों पर है कि अब कुछ भी हो सकता है. क्योंकि उनकी पकड़ भी मजबूत है. इसके अलावा पूर्व सीएम अशोक गहलोत के निर्देश पर ही उनको मैदान में उतारा गया है, उसका भी फायदा मिल सकता है.
सोलंकी का नाम आने से मुकाबला रोचक हो गया है. कांग्रेस जहां कास्ट कांबिनेशन बनाने की कोशिश करेगी तो दूसरी ओर भाजपा भी कांग्रेस के खेमे से मत प्राप्त करने का प्रयास करेगी. -सुनील चौधरी, राजनीतिक एक्सपर्ट.
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