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राजस्थान में माइनिंग विरोधी ऑपरेशन के दौरान मारे गए रेंजर को शहीद का दर्जा देने की मांग हुई तेज | Calls grow for martyr status to ranger killed during anti-mining operation in Rajasthan

राजस्थान में माइनिंग विरोधी ऑपरेशन के दौरान मारे गए रेंजर को शहीद का दर्जा देने की मांग हुई तेज जयपुर, 23 सितंबर (आईएएनएस)। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अवैध खनन के खिलाफ एक ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए मारे गए वन विभाग…

bhaskarhindi.com के अनुसार24 सितंबर 2026 को 05:05 am बजे
राजस्थान में माइनिंग विरोधी ऑपरेशन के दौरान मारे गए रेंजर को शहीद का दर्जा देने की मांग हुई तेज | Calls grow for martyr status to ranger killed during anti-mining operation in Rajasthan

सौजन्य से:- bhaskarhindi.com

राजस्थान में माइनिंग विरोधी ऑपरेशन के दौरान मारे गए रेंजर को शहीद का दर्जा देने की मांग हुई तेज

जयपुर, 23 सितंबर (आईएएनएस)। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में अवैध खनन के खिलाफ एक ऑपरेशन का नेतृत्व करते हुए मारे गए वन विभाग के रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की सेवा की हर तरफ तारीफ हो रही है। जनप्रतिनिधि, वन अधिकारी और सामाजिक संगठन उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं।

एडीएम विजयेश पांड्या ने कहा कि शहीद का दर्जा देने की मांग सरकार को भेजी जा रही है, जबकि डीएफओ सुरेश अग्रवाल ने कहा कि वन विभाग भी एक औपचारिक प्रस्ताव भेजेगा।

प्रताप सिंह के परिवार के लिए यह नुकसान बहुत ज्यादा निजी है। 40 साल के रेंजर अपने घर में अकेले कमाने वाले सदस्य थे। उनकी मौत से उनकी पत्नी आशा कुंवर, 13 साल की बेटी गुंजन और 8 साल के बेटे अनिरुद्ध का मुख्य सहारा छिन गया है। परिवार ने हाल ही में प्रताप सिंह के पिता को खोया था। अब उनकी अपनी मौत से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है।

प्रताप सिंह की पोस्टिंग लगभग दो साल पहले छोटी सादड़ी में हुई थी। इस दौरान वह जंगल की सुरक्षा, वन्यजीवों की निगरानी और बचाव कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल रहे। उन्होंने बाघों, तेंदुओं, अजगरों और मगरमच्छों से जुड़े बचाव कार्यों में हिस्सा लिया। उनके साथ काम करने वाले और उनके काम को जानने वाले लोग उन्हें एक कुशल निशानेबाज और बेहतरीन तैराक के तौर पर भी जानते थे। उनके काम को काफी पहचान मिली थी और उनकी सेवा के सम्मान में राज्य-स्तरीय पुरस्कार के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया गया था।

उनकी मौत तब हुई जब वह अपनी आधिकारिक ड्यूटी के सबसे मुश्किल कामों में से एक, जंगल वाले इलाके में अवैध माइनिंग और मिट्टी के गैर-कानूनी ट्रांसपोर्टेशन के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे।

सोमवार रात करीब 11.30 बजे, प्रताप सिंह और उनकी टीम को अवैध माइनिंग और मिट्टी के ट्रांसपोर्टेशन की जानकारी मिली, जिसके बाद वे छोटी सादड़ी में घाटी-वाले बालाजी के पास चक सुखद के जंगल वाले इलाके में पहुंचे।

टीम को मौके पर एक जेसीबी, एक ट्रैक्टर और मिट्टी से भरा एक डंपर मिला।

पुलिस के मुताबिक, डंपर ड्राइवर ने अचानक गाड़ी की स्पीड बढ़ा दी। आरोप है कि रेंजर और उनकी मोटरसाइकिल को करीब 50 मीटर तक घसीटा गया। प्रताप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी और डंपर चालक की तलाश शुरू कर दी। प्रतापगढ़ के एसपी विशाल जांगिड़ ने बताया कि पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपी चालक का पता लगाने के लिए पुलिस की तीन टीमें तैनात की गई हैं और अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है।

पुलिस ने घटनास्थल पर मिले जेसीबी और ट्रैक्टर को भी जब्त कर लिया है। जांचकर्ता डंपर और अवैध रूप से मिट्टी ढोने के काम में कथित तौर पर शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रहे हैं।

सांसद सीपी जोशी ने शहीद का दर्जा देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। एडीएम विजयेश पांड्या ने कहा कि यह अनुरोध सरकार को भेजा जाएगा।

डीएफओ सुरेश अग्रवाल ने भी कहा कि वन विभाग सरकार को औपचारिक रूप से प्रस्ताव भेजेगा। इस मांग पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है। इस घटना ने जंगल की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान खींचा है।

प्रतापगढ़ में लगभग 1,319 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र है, जिससे वन विभाग के लिए नियमों का पालन कराना और सुरक्षा करना एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।

इस घटना ने खाली पदों और कर्मचारियों की कमी जैसे मुद्दों पर भी फिर से ध्यान आकर्षित किया है।

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Created On : 23 Sept 2026 7:32 PM IST

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